जालौन में सड़क सुरक्षा को लेकर डीएम सख्त, 15 दिन में गड्ढामुक्त करना होगा राष्ट्रीय राजमार्ग-27
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
चौराहों के 50 मीटर दायरे में बैनर-होर्डिंग और ई-रिक्शा पर रोक की तैयारी, यातायात नियम तोड़ने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई

उरई (जालौन)। जिले में सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने और यातायात व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी समीर ने कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला सड़क सुरक्षा समिति की समीक्षा बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग-27 की खराब स्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए 15 दिनों के भीतर सड़क के गड्ढों की मरम्मत पूरी कराने का निर्देश दिया। साथ ही, शहर के प्रमुख चौराहों पर यातायात में बाधा पैदा करने वाले बैनर, होर्डिंग और ई-रिक्शा की समस्या दूर करने के लिए भी आवश्यक कदम उठाने को कहा।
राष्ट्रीय राजमार्ग-27 की मरम्मत के लिए 15 दिन की समयसीमा
बैठक के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर जगह-जगह बने बड़े गड्ढों और उनकी समय से मरम्मत नहीं होने का मुद्दा प्रमुखता से उठा। जिलाधिकारी ने इस स्थिति पर असंतोष जताते हुए संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि खराब सड़कें वाहन चालकों और राहगीरों के लिए खतरा बन सकती हैं। ऐसे में सड़कों की मरम्मत को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाना आवश्यक है।
जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिया कि पर्याप्त श्रमिकों, तकनीकी कर्मचारियों और जरूरी मशीनों की व्यवस्था कर गड्ढों को भरने का काम तेजी से कराया जाए। राष्ट्रीय राजमार्ग-27 सहित संबंधित मार्गों की स्थिति में सुधार लाकर आवागमन को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाया जाए।
उन्होंने निर्धारित समयसीमा के भीतर मरम्मत कार्य पूरा करने पर जोर देते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा से संबंधित निर्देशों का पालन केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका असर सड़कों पर दिखाई देना चाहिए।
चौराहों पर बैनर और होर्डिंग लगाने पर होगी कार्रवाई
शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जिलाधिकारी ने प्रमुख चौराहों के आसपास अनधिकृत प्रचार सामग्री हटाने के निर्देश दिए। उन्होंने नगर मजिस्ट्रेट, नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी और यातायात पुलिस को संयुक्त रूप से अभियान चलाने को कहा।
निर्देशों के अनुसार, चौराहों के 50 मीटर के दायरे में बैनर, होर्डिंग और अन्य विज्ञापन सामग्री लगाने पर रोक सुनिश्चित करने की तैयारी की जाएगी। ऐसी सामग्री के कारण वाहन चालकों की दृश्यता प्रभावित होने और यातायात संचालन में परेशानी होने की आशंका रहती है। इसलिए चौराहों को अवरोधमुक्त रखना जरूरी है।
जिलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि चौराहों के आसपास ई-रिक्शा खड़े होने से यातायात बाधित नहीं होना चाहिए। नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध संबंधित विभाग नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई करें।
ई-रिक्शा संचालन के लिए बनेगी सड़कवार कार्ययोजना
उरई शहर में ई-रिक्शा की बढ़ती आवाजाही के बीच यातायात को व्यवस्थित करना भी प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। जिलाधिकारी ने नगर मजिस्ट्रेट, नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी और यातायात निरीक्षक को इस संबंध में विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि शहर की सभी सड़कों पर यातायात की स्थिति का आकलन कर यह तय किया जाए कि किन मार्गों पर ई-रिक्शा का संचालन सुविधाजनक है और किन स्थानों पर इनकी आवाजाही से जाम की स्थिति बनती है। आवश्यकता के अनुसार कुछ मार्गों पर ई-रिक्शा संचालन प्रतिबंधित करने की व्यवस्था की जाए।
जिन स्थानों पर प्रतिबंध या यातायात संबंधी अन्य निर्देश लागू किए जाएं, वहां स्पष्ट संकेतक बोर्ड लगाए जाएं, ताकि चालकों को पहले से जानकारी मिल सके और नियमों के पालन में किसी तरह की भ्रम की स्थिति न बने।
प्रशासन का उद्देश्य शहर के प्रमुख मार्गों और चौराहों पर वाहनों की आवाजाही को सुचारु बनाना तथा आम नागरिकों को जाम और अनावश्यक रुकावटों से राहत दिलाना है।
सड़क पर निर्माण सामग्री छोड़ने वालों को चेतावनी
जिलाधिकारी ने सड़कों और सार्वजनिक मार्गों पर निर्माण सामग्री बिखरी रहने की समस्या को भी गंभीरता से लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि सड़क किनारे या आवागमन वाले स्थानों पर पड़ी बजरी, ईंट, बालू और अन्य निर्माण सामग्री को तत्काल हटवाया जाए।
उन्होंने कहा कि सड़क पर इस तरह की सामग्री पड़े रहने से दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, वाहनों के निकलने के लिए उपलब्ध स्थान कम होने से यातायात भी प्रभावित होता है।
संबंधित विभागों को निर्देश दिया गया कि ऐसे मामलों में जिम्मेदार व्यक्तियों और प्रतिष्ठानों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। सार्वजनिक मार्गों को अनावश्यक अवरोधों से मुक्त रखना सभी संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।
ओवरस्पीडिंग और रॉन्ग साइड ड्राइविंग पर सख्ती
सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जिलाधिकारी ने यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमित कार्रवाई करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तेज गति से वाहन चलाना, गलत दिशा में गाड़ी ले जाना और नशे की हालत में वाहन चलाना गंभीर जोखिम पैदा करता है।
हेलमेट और सीट बेल्ट का इस्तेमाल नहीं करने वालों के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि यातायात नियमों के पालन को लेकर जांच अभियान चलाएं और वाहन चालकों को सुरक्षा उपायों के प्रति जागरूक करें।
सड़क सुरक्षा के लिए केवल प्रशासनिक कार्रवाई ही नहीं, बल्कि नागरिकों की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण है। वाहन चालकों को गति सीमा का ध्यान रखने, निर्धारित दिशा में चलने और यातायात संकेतों का पालन करने की आवश्यकता है।
वाहन चालकों के स्वास्थ्य की जांच कराने के निर्देश
बैठक में सड़क दुर्घटनाओं के संभावित कारणों में वाहन चालकों के स्वास्थ्य को भी महत्वपूर्ण विषय माना गया। जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिया कि जनपद में समय-समय पर स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए जाएं।
इन शिविरों में बस, ट्रक, चार पहिया और दोपहिया वाहन चालकों की आंखों की जांच, रक्त शर्करा परीक्षण तथा अन्य आवश्यक स्वास्थ्य परीक्षण कराने को कहा गया। इसका उद्देश्य ऐसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान करना है, जो वाहन चलाते समय एकाग्रता और सुरक्षित संचालन को प्रभावित कर सकती हैं।
विशेष रूप से व्यावसायिक वाहन चालकों की नियमित स्वास्थ्य जांच से उन्हें अपनी सेहत के प्रति जागरूक करने और संभावित जोखिमों को समय रहते पहचानने में सहायता मिल सकती है।
स्कूलों में चलेंगे सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम
जिलाधिकारी ने जिला विद्यालय निरीक्षक और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को विद्यालयों में नियमित रूप से सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को यातायात नियमों की जानकारी देना दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए जरूरी है।
विद्यालयों में विद्यार्थियों को हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने, सड़क पार करते समय सावधानी बरतने और यातायात संकेतों का पालन करने के बारे में जागरूक किया जा सकता है। इस तरह के कार्यक्रमों से विद्यार्थी स्वयं सुरक्षित व्यवहार अपनाने के साथ अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी जागरूक कर सकेंगे।
बिजली के पोल और केबल भी हटाने के निर्देश
यातायात व्यवस्था को बाधारहित बनाने के लिए विद्युत विभाग को भी आवश्यक निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली चोरी रोकने के लिए अभियान चलाने, जरूरत के अनुसार नए विद्युत कनेक्शन सुनिश्चित करने और ट्रांसफार्मरों की जांच कराने को कहा।
इसके साथ ही ऐसे विद्युत पोल और केबल हटाने के निर्देश दिए गए, जो सड़क पर आवागमन में अनावश्यक बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। संबंधित विभागों को विद्युत व्यवस्था और सड़क सुरक्षा के बीच समन्वय बनाकर काम करने को कहा गया।
समयबद्ध कार्रवाई पर प्रशासन का जोर
जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को आपसी तालमेल के साथ कार्य करने और निर्धारित समयसीमा में निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने सड़क मरम्मत, यातायात नियंत्रण, वाहन चालकों की स्वास्थ्य जांच और जनजागरूकता जैसे विषयों पर जिम्मेदारी के साथ कार्रवाई करने पर जोर दिया।
बैठक में नगर मजिस्ट्रेट सुनील कुमार, क्षेत्राधिकारी (सीओ), मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एच.एन. प्रसाद, लोक निर्माण विभाग से अमित सक्सेना, सुनील कुमार और महेंद्र सिंह, एआरटीओ प्रशासन सौम्या पाण्डेय, प्रवर्तन से राजेश कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
अब राष्ट्रीय राजमार्ग-27 के गड्ढों की मरम्मत के लिए निर्धारित 15 दिनों की समयसीमा और शहर के चौराहों को अवरोधमुक्त बनाने के निर्देशों के अनुपालन पर नजर रहेगी। प्रशासन की इन पहलों का उद्देश्य जालौन में सड़क दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करना, यातायात को व्यवस्थित बनाना और आम नागरिकों के लिए सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना है।