जालौन: खेत पर पहुंचे किसान को बंदूक दिखाकर धमकाने का आरोप, जिलाधिकारी से लगाई न्याय की गुहार

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अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

कोंच तहसील के पजोनिया गांव का मामला, पीड़ित ने निष्पक्ष जांच, परिवार की सुरक्षा और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की उठाई मांग

उरई (जालौन)। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में खेत पर काम करने गए एक किसान ने गांव के ही कुछ लोगों पर अभद्रता करने, गाली-गलौज करने और बंदूक दिखाकर जान से मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है। कथित धमकी से भयभीत किसान ने अब जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर न्याय की मांग की है। पीड़ित का आरोप है कि स्थानीय स्तर पर शिकायत करने के बावजूद उसकी समस्या का समाधान नहीं हो सका। ऐसे में उसने प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच कराने और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।

खेत पर जाते समय विवाद होने का आरोप

मामला कोंच तहसील क्षेत्र के ग्राम पजोनिया का बताया जा रहा है। गांव निवासी हरविजय सिंह पुत्र हरवंश सिंह ने जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में घटना का विवरण देते हुए बताया कि 14 अक्टूबर 2026 को दोपहर लगभग 12:30 बजे वह अपने खेत की ओर जा रहे थे। उनके खेत में धान की फसल खड़ी थी और वहां मौजूद गायों को हटाने का काम किया जा रहा था।

पीड़ित के मुताबिक, इसी दौरान उनके परिवार के हरवेन्द्र सिंह और उनके छोटे भाई हेमेन्द्र सिंह कथित तौर पर बंदूक लेकर मौके पर पहुंच गए। किसान का आरोप है कि दोनों ने उसके साथ गाली-गलौज की और बंदूक दिखाकर उसे डराया-धमकाया। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि उसे खेत से चले जाने के लिए कहा गया और दोबारा वहां दिखाई देने पर उसे तथा उसके पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई।

हरविजय सिंह के अनुसार, आरोपियों के इस व्यवहार से वह काफी भयभीत हो गए। अपनी सुरक्षा को लेकर आशंकित होने के कारण उन्हें खेत से वापस लौटना पड़ा। पीड़ित ने अपने शिकायती पत्र में घटना का उल्लेख करते हुए प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेने की मांग की है।

स्थानीय स्तर पर शिकायत करने के बाद भी सुनवाई नहीं होने का दावा

किसान ने जिलाधिकारी को बताया कि कथित घटना के बाद उसने संबंधित हल्का इंचार्ज को पूरे मामले की जानकारी दी थी। उसे उम्मीद थी कि शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच होगी और उसे सुरक्षा प्रदान करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

हालांकि, पीड़ित का आरोप है कि उसे स्थानीय स्तर पर अपेक्षित सहायता नहीं मिली। उसने शिकायत में दावा किया कि जिन लोगों पर धमकी देने का आरोप लगाया गया है, उनका प्रभाव होने के कारण उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। किसान के अनुसार, आरोपियों ने कथित रूप से संबंधित स्तर पर भी अपना प्रभाव दिखाया, जिसके चलते उसे वहां से भी निराश होकर लौटना पड़ा।

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय थाने में आरोपियों का प्रभाव होने के कारण उसकी शिकायत पर प्रभावी सुनवाई नहीं हो पा रही है। इसी वजह से उसने जिलाधिकारी के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है।

हालांकि, शिकायती पत्र में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। मामले में संबंधित पक्षों का जवाब और प्रशासन या पुलिस की जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

पुराने मुकदमे को लेकर भी उठाए सवाल

हरविजय सिंह ने अपने शिकायती पत्र में एक पुराने मामले का भी जिक्र किया है। उसका कहना है कि 16 फरवरी 2026 को उसके छोटे भाई सुमित सिंह और संजय के नाम से कथित रूप से फर्जी प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। पीड़ित ने आरोप लगाया कि इस मामले के चलते उसके भाई को जेल जाना पड़ा था।

शिकायतकर्ता के अनुसार, वह इस प्रकरण को लेकर पहले भी कई बार प्रार्थना पत्र दे चुका है, लेकिन उसके मुताबिक अब तक कोई ऐसी प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे उसे न्याय मिलने का भरोसा हो सके। उसने पुराने मामले का उल्लेख करते हुए प्रशासन से संबंधित शिकायतों और मौजूदा विवाद, दोनों की निष्पक्षता के साथ जांच कराने की मांग की है।

पीड़ित का कहना है कि पुराने मुकदमे को लेकर उसकी आपत्तियों और हालिया घटना के संबंध में उठाए गए सवालों की जांच आवश्यक है। उसके अनुसार, यदि पूरे मामले की निष्पक्ष पड़ताल की जाती है तो घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है।

यह उल्लेखनीय है कि किसी प्राथमिकी को फर्जी बताना शिकायतकर्ता का आरोप है। उसकी सत्यता का निर्धारण संबंधित दस्तावेजों, उपलब्ध साक्ष्यों और सक्षम अधिकारियों की जांच के आधार पर ही किया जा सकता है।

परिवार की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता

किसान ने जिलाधिकारी से अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उसका कहना है कि यदि धमकी से संबंधित शिकायत पर समय रहते उचित कार्रवाई नहीं हुई तो उसके परिवार के सामने परेशानी बनी रह सकती है। इसी आशंका को देखते हुए उसने प्रशासन से मामले में आवश्यक कदम उठाने की अपील की है।

ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों तक पहुंच, फसलों की देखभाल और कृषि कार्य किसानों की रोजमर्रा की जरूरतों का हिस्सा हैं। ऐसे में खेत पर काम करने के दौरान विवाद या असुरक्षा की आशंका उत्पन्न होना संबंधित परिवार के लिए चिंता का विषय बन सकता है। हालांकि, इस मामले में वास्तव में क्या हुआ, इसका निर्णय जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

हरविजय सिंह का कहना है कि वह प्रशासन से केवल निष्पक्ष जांच और न्याय की अपेक्षा कर रहा है। उसने मांग की है कि शिकायत में नामित लोगों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पड़ताल की जाए और यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

जिलाधिकारी को सौंपे गए शिकायती पत्र के माध्यम से किसान ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, कथित धमकी के मामले में उचित कदम उठाने और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है। उसने यह भी मांग की है कि उसकी पूर्व शिकायतों और पुराने मुकदमे से जुड़े आरोपों को संबंधित अभिलेखों के आधार पर देखा जाए, ताकि मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

पीड़ित की प्रमुख मांग है कि स्थानीय स्तर पर शिकायत की सुनवाई में आ रही कथित बाधाओं को दूर किया जाए और उसे अपनी बात रखने का उचित अवसर मिले। इसके साथ ही उसने आरोप लगाया है कि प्रभावशाली लोगों के कारण उसे न्याय पाने में कठिनाई हो रही है। इस संबंध में प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, यह आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगा।

फिलहाल, इस प्रकरण में किसान की ओर से जिलाधिकारी को शिकायत दिए जाने और कार्रवाई की मांग किए जाने की जानकारी सामने आई है। बंदूक दिखाकर धमकी देने, पुराने मुकदमे में कथित फर्जीवाड़े और स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं होने जैसे आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

अब देखना होगा कि प्रशासन शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और संबंधित अधिकारियों की जांच में कौन-से तथ्य सामने आते हैं। पीड़ित को न्याय दिलाने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण होगा कि मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी संबंधित पक्षों की बात सुनी जाए और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार निर्णय लिया जाए।

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जालौन: खेत पर पहुंचे किसान को बंदूक दिखाकर धमकाने का आरोप, जिलाधिकारी से लगाई न्याय की गुहार

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 16, 2026

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

कोंच तहसील के पजोनिया गांव का मामला, पीड़ित ने निष्पक्ष जांच, परिवार की सुरक्षा और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की उठाई मांग

उरई (जालौन)। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में खेत पर काम करने गए एक किसान ने गांव के ही कुछ लोगों पर अभद्रता करने, गाली-गलौज करने और बंदूक दिखाकर जान से मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है। कथित धमकी से भयभीत किसान ने अब जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर न्याय की मांग की है। पीड़ित का आरोप है कि स्थानीय स्तर पर शिकायत करने के बावजूद उसकी समस्या का समाधान नहीं हो सका। ऐसे में उसने प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच कराने और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।

खेत पर जाते समय विवाद होने का आरोप

मामला कोंच तहसील क्षेत्र के ग्राम पजोनिया का बताया जा रहा है। गांव निवासी हरविजय सिंह पुत्र हरवंश सिंह ने जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में घटना का विवरण देते हुए बताया कि 14 अक्टूबर 2026 को दोपहर लगभग 12:30 बजे वह अपने खेत की ओर जा रहे थे। उनके खेत में धान की फसल खड़ी थी और वहां मौजूद गायों को हटाने का काम किया जा रहा था।

पीड़ित के मुताबिक, इसी दौरान उनके परिवार के हरवेन्द्र सिंह और उनके छोटे भाई हेमेन्द्र सिंह कथित तौर पर बंदूक लेकर मौके पर पहुंच गए। किसान का आरोप है कि दोनों ने उसके साथ गाली-गलौज की और बंदूक दिखाकर उसे डराया-धमकाया। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि उसे खेत से चले जाने के लिए कहा गया और दोबारा वहां दिखाई देने पर उसे तथा उसके पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई।

हरविजय सिंह के अनुसार, आरोपियों के इस व्यवहार से वह काफी भयभीत हो गए। अपनी सुरक्षा को लेकर आशंकित होने के कारण उन्हें खेत से वापस लौटना पड़ा। पीड़ित ने अपने शिकायती पत्र में घटना का उल्लेख करते हुए प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेने की मांग की है।

स्थानीय स्तर पर शिकायत करने के बाद भी सुनवाई नहीं होने का दावा

किसान ने जिलाधिकारी को बताया कि कथित घटना के बाद उसने संबंधित हल्का इंचार्ज को पूरे मामले की जानकारी दी थी। उसे उम्मीद थी कि शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच होगी और उसे सुरक्षा प्रदान करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

हालांकि, पीड़ित का आरोप है कि उसे स्थानीय स्तर पर अपेक्षित सहायता नहीं मिली। उसने शिकायत में दावा किया कि जिन लोगों पर धमकी देने का आरोप लगाया गया है, उनका प्रभाव होने के कारण उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। किसान के अनुसार, आरोपियों ने कथित रूप से संबंधित स्तर पर भी अपना प्रभाव दिखाया, जिसके चलते उसे वहां से भी निराश होकर लौटना पड़ा।

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय थाने में आरोपियों का प्रभाव होने के कारण उसकी शिकायत पर प्रभावी सुनवाई नहीं हो पा रही है। इसी वजह से उसने जिलाधिकारी के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है।

हालांकि, शिकायती पत्र में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। मामले में संबंधित पक्षों का जवाब और प्रशासन या पुलिस की जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

पुराने मुकदमे को लेकर भी उठाए सवाल

हरविजय सिंह ने अपने शिकायती पत्र में एक पुराने मामले का भी जिक्र किया है। उसका कहना है कि 16 फरवरी 2026 को उसके छोटे भाई सुमित सिंह और संजय के नाम से कथित रूप से फर्जी प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। पीड़ित ने आरोप लगाया कि इस मामले के चलते उसके भाई को जेल जाना पड़ा था।

शिकायतकर्ता के अनुसार, वह इस प्रकरण को लेकर पहले भी कई बार प्रार्थना पत्र दे चुका है, लेकिन उसके मुताबिक अब तक कोई ऐसी प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे उसे न्याय मिलने का भरोसा हो सके। उसने पुराने मामले का उल्लेख करते हुए प्रशासन से संबंधित शिकायतों और मौजूदा विवाद, दोनों की निष्पक्षता के साथ जांच कराने की मांग की है।

पीड़ित का कहना है कि पुराने मुकदमे को लेकर उसकी आपत्तियों और हालिया घटना के संबंध में उठाए गए सवालों की जांच आवश्यक है। उसके अनुसार, यदि पूरे मामले की निष्पक्ष पड़ताल की जाती है तो घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है।

यह उल्लेखनीय है कि किसी प्राथमिकी को फर्जी बताना शिकायतकर्ता का आरोप है। उसकी सत्यता का निर्धारण संबंधित दस्तावेजों, उपलब्ध साक्ष्यों और सक्षम अधिकारियों की जांच के आधार पर ही किया जा सकता है।

परिवार की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता

किसान ने जिलाधिकारी से अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उसका कहना है कि यदि धमकी से संबंधित शिकायत पर समय रहते उचित कार्रवाई नहीं हुई तो उसके परिवार के सामने परेशानी बनी रह सकती है। इसी आशंका को देखते हुए उसने प्रशासन से मामले में आवश्यक कदम उठाने की अपील की है।

ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों तक पहुंच, फसलों की देखभाल और कृषि कार्य किसानों की रोजमर्रा की जरूरतों का हिस्सा हैं। ऐसे में खेत पर काम करने के दौरान विवाद या असुरक्षा की आशंका उत्पन्न होना संबंधित परिवार के लिए चिंता का विषय बन सकता है। हालांकि, इस मामले में वास्तव में क्या हुआ, इसका निर्णय जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

हरविजय सिंह का कहना है कि वह प्रशासन से केवल निष्पक्ष जांच और न्याय की अपेक्षा कर रहा है। उसने मांग की है कि शिकायत में नामित लोगों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पड़ताल की जाए और यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

जिलाधिकारी को सौंपे गए शिकायती पत्र के माध्यम से किसान ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, कथित धमकी के मामले में उचित कदम उठाने और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है। उसने यह भी मांग की है कि उसकी पूर्व शिकायतों और पुराने मुकदमे से जुड़े आरोपों को संबंधित अभिलेखों के आधार पर देखा जाए, ताकि मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

पीड़ित की प्रमुख मांग है कि स्थानीय स्तर पर शिकायत की सुनवाई में आ रही कथित बाधाओं को दूर किया जाए और उसे अपनी बात रखने का उचित अवसर मिले। इसके साथ ही उसने आरोप लगाया है कि प्रभावशाली लोगों के कारण उसे न्याय पाने में कठिनाई हो रही है। इस संबंध में प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, यह आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगा।

फिलहाल, इस प्रकरण में किसान की ओर से जिलाधिकारी को शिकायत दिए जाने और कार्रवाई की मांग किए जाने की जानकारी सामने आई है। बंदूक दिखाकर धमकी देने, पुराने मुकदमे में कथित फर्जीवाड़े और स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं होने जैसे आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

अब देखना होगा कि प्रशासन शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और संबंधित अधिकारियों की जांच में कौन-से तथ्य सामने आते हैं। पीड़ित को न्याय दिलाने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण होगा कि मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी संबंधित पक्षों की बात सुनी जाए और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार निर्णय लिया जाए।