जालौन साइबर सेल की बड़ी कामयाबी: क्रेडिट कार्ड से ठगी के 1.55 लाख रुपये पीड़ित को वापस दिलाए

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अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई, जालौन। साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच जालौन जनपद की साइबर सेल को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। क्रेडिट कार्ड से धोखाधड़ी कर निकाली गई 1,55,664 रुपये की पूरी धनराशि पुलिस ने पीड़ित को वापस दिला दी। बैंक के साथ समन्वय स्थापित कर की गई त्वरित कार्रवाई से पीड़ित को बड़ी आर्थिक राहत मिली है। रकम वापस मिलने के बाद पीड़ित ने राहत महसूस की। यह कार्रवाई साइबर ठगी के मामलों में समय पर शिकायत दर्ज कराने और पुलिस के साथ आवश्यक जानकारी साझा करने के महत्व को भी उजागर करती है।

क्रेडिट कार्ड से 1,55,664 रुपये की हुई थी धोखाधड़ी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उरई नगर के तुलसी नगर निवासी आकाश गुप्ता, पुत्र कृष्ण गोपाल गुप्ता, क्रेडिट कार्ड से संबंधित साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो गए थे। इस घटना में उनके क्रेडिट कार्ड से कुल 1,55,664 रुपये की धनराशि से जुड़ा फ्रॉड हुआ था। आर्थिक नुकसान की जानकारी मिलने के बाद पीड़ित ने मामले की शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर साइबर सेल ने कार्रवाई शुरू की।

यह शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज कराई गई थी। शिकायत संख्या 33110260276261 के माध्यम से मामले को संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया। शिकायत मिलने के बाद जनपदीय साइबर सेल ने प्रकरण की जांच करते हुए धनराशि वापस कराने के लिए आवश्यक प्रयास किए।

साइबर अपराधों में ठगी की रकम वापस प्राप्त करना कई बार चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे मामलों में संबंधित बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों के साथ समय रहते संपर्क स्थापित करना महत्वपूर्ण होता है। जालौन साइबर सेल ने इसी दिशा में कदम उठाते हुए पीड़ित की शिकायत पर कार्रवाई की।

पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में हुई कार्रवाई

जालौन पुलिस की ओर से साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने और पीड़ितों को राहत दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में साइबर सेल ने क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी के इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की।

पुलिस महानिदेशक साइबर, उत्तर प्रदेश, लखनऊ विनोद कुमार के निर्देशों के अनुसार तथा पुलिस महानिरीक्षक झांसी परिक्षेत्र आकाश कुलहरि और पुलिस अधीक्षक जालौन सुरेश चन्द्र रावत के मार्गदर्शन में जनपद में साइबर अपराधों के विरुद्ध अभियान चलाया जा रहा है।

इस अभियान के तहत अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. ईशान सोनी और क्षेत्राधिकारी साइबर क्राइम परमेश्वर प्रसाद के पर्यवेक्षण में मामले पर कार्रवाई की गई। जनपदीय साइबर सेल उरई के प्रभारी चन्द्रदेव यादव के नेतृत्व में टीम ने शिकायत से संबंधित तथ्यों पर काम किया और पीड़ित की रकम वापस कराने के लिए बैंक से संपर्क साधा।

पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन और साइबर सेल की सक्रियता के बीच मामले में आवश्यक समन्वय स्थापित किया गया। इसके परिणामस्वरूप पीड़ित को उसकी पूरी धनराशि वापस दिलाने में सफलता मिली।

बैंक से समन्वय कर वापस कराई गई पूरी रकम

साइबर सेल ने शिकायत पर कार्रवाई करते हुए संबंधित बैंक से संपर्क स्थापित किया। आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने और ई-मेल के माध्यम से समन्वय करने के बाद 1,55,664 रुपये की पूरी धनराशि पीड़ित के क्रेडिट कार्ड खाते में वापस कराई गई।

इस कार्रवाई से पीड़ित को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई करने में मदद मिली। पुलिस की ओर से कराई गई इस वापसी में कोई आंशिक राशि नहीं, बल्कि धोखाधड़ी से संबंधित पूरी बताई गई रकम वापस कराई गई।

साइबर ठगी के मामलों में पीड़ितों के लिए सबसे बड़ी चिंता अपने पैसे की वापसी को लेकर होती है। कई लोग शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को लेकर असमंजस में रहते हैं, जबकि कुछ लोग समय बीत जाने के कारण रकम वापस मिलने की उम्मीद छोड़ देते हैं। ऐसे में जालौन साइबर सेल की यह कार्रवाई लोगों को शिकायत दर्ज कराने के प्रति जागरूक करने वाली है।

हालांकि, प्रत्येक साइबर धोखाधड़ी के मामले में रकम वापस मिलने की गारंटी नहीं होती। धनराशि की वापसी मामले की परिस्थितियों, समय पर की गई शिकायत और संबंधित वित्तीय संस्थानों की कार्रवाई सहित कई बातों पर निर्भर करती है।

इन पुलिसकर्मियों की रही महत्वपूर्ण भूमिका

क्रेडिट कार्ड फ्रॉड की रकम वापस कराने की कार्रवाई में जनपदीय साइबर सेल की टीम ने अहम भूमिका निभाई। इस टीम का नेतृत्व निरीक्षक चन्द्रदेव यादव ने किया।

कार्रवाई में शामिल पुलिसकर्मियों में निरीक्षक चन्द्रदेव यादव, प्रभारी जनपदीय साइबर सेल, उपनिरीक्षक अजीत शर्मा, उपनिरीक्षक जगवीर सिंह और कांस्टेबल आर्म्ड ग्रेड-बी प्रिन्स त्यागी के साथ जनपदीय साइबर सेल के अन्य कर्मचारी शामिल रहे।

टीम ने शिकायत पर कार्रवाई करते हुए बैंक के साथ समन्वय स्थापित किया और पीड़ित को आर्थिक राहत दिलाने के लिए आवश्यक प्रयास किए। पुलिस की इस कार्रवाई से स्पष्ट होता है कि साइबर अपराध की शिकायत मिलने पर संबंधित एजेंसियों के साथ तालमेल बनाकर काम करना कितना आवश्यक है।

साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्कता जरूरी

डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधी भी धोखाधड़ी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, बैंक खाते और ऑनलाइन लेनदेन से संबंधित धोखाधड़ी के मामलों में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों की ओर से आम तौर पर सलाह दी जाती है कि किसी भी व्यक्ति के साथ अपना ओटीपी, कार्ड का सीवीवी नंबर, पिन या इंटरनेट बैंकिंग का पासवर्ड साझा न करें। बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाले अनजान लोगों पर बिना सत्यापन भरोसा न करें। किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने या संदिग्ध वेबसाइट पर कार्ड की जानकारी भरने से भी बचना चाहिए।

यदि क्रेडिट कार्ड से कोई अनधिकृत लेनदेन दिखाई देता है, तो संबंधित बैंक को तत्काल सूचना देकर कार्ड को सुरक्षित कराने और लेनदेन की शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क किया जा सकता है और आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

शिकायत करते समय लेनदेन से संबंधित संदेश, बैंक से प्राप्त सूचना, ट्रांजैक्शन आईडी और अन्य उपलब्ध प्रमाण सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है। समय पर सूचना देने से संबंधित संस्थानों को लेनदेन की जांच करने और संभावित नुकसान को रोकने के लिए कदम उठाने में मदद मिल सकती है।

साइबर अपराध के खिलाफ जागरूकता पर जोर

जालौन साइबर सेल की इस सफलता ने एक बार फिर दिखाया है कि साइबर धोखाधड़ी के मामलों में शिकायत मिलने के बाद त्वरित कार्रवाई और बैंक के साथ समन्वय कितना महत्वपूर्ण है। आकाश गुप्ता के क्रेडिट कार्ड से संबंधित 1,55,664 रुपये की पूरी धनराशि वापस कराया जाना पीड़ित के लिए बड़ी राहत है।

पुलिस की कार्रवाई के साथ ही आम नागरिकों की सतर्कता भी साइबर अपराधों की रोकथाम में अहम भूमिका निभाती है। ऑनलाइन लेनदेन करते समय सावधानी बरतना, गोपनीय बैंकिंग जानकारी साझा नहीं करना और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल शिकायत करना आवश्यक है।

उरई में सामने आया यह मामला उन लोगों के लिए भी एक संदेश है, जो साइबर ठगी का शिकार होने के बाद शिकायत दर्ज कराने से हिचकिचाते हैं। ऐसी स्थिति में बिना देरी किए संबंधित बैंक और साइबर अपराध शिकायत तंत्र से संपर्क करना चाहिए। समय पर उठाया गया कदम नुकसान को कम करने और धनराशि वापस पाने की संभावना बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

मुख्य जानकारी एक नजर में

  • स्थान: उरई, जनपद जालौन, उत्तर प्रदेश
  • पीड़ित: आकाश गुप्ता, निवासी तुलसी नगर, उरई
  • अपराध का प्रकार: क्रेडिट कार्ड से संबंधित साइबर धोखाधड़ी
  • वापस कराई गई धनराशि: 1,55,664 रुपये
  • शिकायत संख्या: 33110260276261
  • कार्रवाई करने वाली इकाई: जनपदीय साइबर सेल, जालौन
  • टीम प्रभारी: निरीक्षक चन्द्रदेव यादव

जालौन पुलिस की इस कार्रवाई से पीड़ित को आर्थिक राहत मिली है। साथ ही यह मामला साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने और किसी भी धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल शिकायत दर्ज कराने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

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जालौन साइबर सेल की बड़ी कामयाबी: क्रेडिट कार्ड से ठगी के 1.55 लाख रुपये पीड़ित को वापस दिलाए

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 16, 2026

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई, जालौन। साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच जालौन जनपद की साइबर सेल को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। क्रेडिट कार्ड से धोखाधड़ी कर निकाली गई 1,55,664 रुपये की पूरी धनराशि पुलिस ने पीड़ित को वापस दिला दी। बैंक के साथ समन्वय स्थापित कर की गई त्वरित कार्रवाई से पीड़ित को बड़ी आर्थिक राहत मिली है। रकम वापस मिलने के बाद पीड़ित ने राहत महसूस की। यह कार्रवाई साइबर ठगी के मामलों में समय पर शिकायत दर्ज कराने और पुलिस के साथ आवश्यक जानकारी साझा करने के महत्व को भी उजागर करती है।

क्रेडिट कार्ड से 1,55,664 रुपये की हुई थी धोखाधड़ी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उरई नगर के तुलसी नगर निवासी आकाश गुप्ता, पुत्र कृष्ण गोपाल गुप्ता, क्रेडिट कार्ड से संबंधित साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो गए थे। इस घटना में उनके क्रेडिट कार्ड से कुल 1,55,664 रुपये की धनराशि से जुड़ा फ्रॉड हुआ था। आर्थिक नुकसान की जानकारी मिलने के बाद पीड़ित ने मामले की शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर साइबर सेल ने कार्रवाई शुरू की।

यह शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज कराई गई थी। शिकायत संख्या 33110260276261 के माध्यम से मामले को संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया। शिकायत मिलने के बाद जनपदीय साइबर सेल ने प्रकरण की जांच करते हुए धनराशि वापस कराने के लिए आवश्यक प्रयास किए।

साइबर अपराधों में ठगी की रकम वापस प्राप्त करना कई बार चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे मामलों में संबंधित बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों के साथ समय रहते संपर्क स्थापित करना महत्वपूर्ण होता है। जालौन साइबर सेल ने इसी दिशा में कदम उठाते हुए पीड़ित की शिकायत पर कार्रवाई की।

पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में हुई कार्रवाई

जालौन पुलिस की ओर से साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने और पीड़ितों को राहत दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में साइबर सेल ने क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी के इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की।

पुलिस महानिदेशक साइबर, उत्तर प्रदेश, लखनऊ विनोद कुमार के निर्देशों के अनुसार तथा पुलिस महानिरीक्षक झांसी परिक्षेत्र आकाश कुलहरि और पुलिस अधीक्षक जालौन सुरेश चन्द्र रावत के मार्गदर्शन में जनपद में साइबर अपराधों के विरुद्ध अभियान चलाया जा रहा है।

इस अभियान के तहत अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. ईशान सोनी और क्षेत्राधिकारी साइबर क्राइम परमेश्वर प्रसाद के पर्यवेक्षण में मामले पर कार्रवाई की गई। जनपदीय साइबर सेल उरई के प्रभारी चन्द्रदेव यादव के नेतृत्व में टीम ने शिकायत से संबंधित तथ्यों पर काम किया और पीड़ित की रकम वापस कराने के लिए बैंक से संपर्क साधा।

पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन और साइबर सेल की सक्रियता के बीच मामले में आवश्यक समन्वय स्थापित किया गया। इसके परिणामस्वरूप पीड़ित को उसकी पूरी धनराशि वापस दिलाने में सफलता मिली।

बैंक से समन्वय कर वापस कराई गई पूरी रकम

साइबर सेल ने शिकायत पर कार्रवाई करते हुए संबंधित बैंक से संपर्क स्थापित किया। आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने और ई-मेल के माध्यम से समन्वय करने के बाद 1,55,664 रुपये की पूरी धनराशि पीड़ित के क्रेडिट कार्ड खाते में वापस कराई गई।

इस कार्रवाई से पीड़ित को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई करने में मदद मिली। पुलिस की ओर से कराई गई इस वापसी में कोई आंशिक राशि नहीं, बल्कि धोखाधड़ी से संबंधित पूरी बताई गई रकम वापस कराई गई।

साइबर ठगी के मामलों में पीड़ितों के लिए सबसे बड़ी चिंता अपने पैसे की वापसी को लेकर होती है। कई लोग शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को लेकर असमंजस में रहते हैं, जबकि कुछ लोग समय बीत जाने के कारण रकम वापस मिलने की उम्मीद छोड़ देते हैं। ऐसे में जालौन साइबर सेल की यह कार्रवाई लोगों को शिकायत दर्ज कराने के प्रति जागरूक करने वाली है।

हालांकि, प्रत्येक साइबर धोखाधड़ी के मामले में रकम वापस मिलने की गारंटी नहीं होती। धनराशि की वापसी मामले की परिस्थितियों, समय पर की गई शिकायत और संबंधित वित्तीय संस्थानों की कार्रवाई सहित कई बातों पर निर्भर करती है।

इन पुलिसकर्मियों की रही महत्वपूर्ण भूमिका

क्रेडिट कार्ड फ्रॉड की रकम वापस कराने की कार्रवाई में जनपदीय साइबर सेल की टीम ने अहम भूमिका निभाई। इस टीम का नेतृत्व निरीक्षक चन्द्रदेव यादव ने किया।

कार्रवाई में शामिल पुलिसकर्मियों में निरीक्षक चन्द्रदेव यादव, प्रभारी जनपदीय साइबर सेल, उपनिरीक्षक अजीत शर्मा, उपनिरीक्षक जगवीर सिंह और कांस्टेबल आर्म्ड ग्रेड-बी प्रिन्स त्यागी के साथ जनपदीय साइबर सेल के अन्य कर्मचारी शामिल रहे।

टीम ने शिकायत पर कार्रवाई करते हुए बैंक के साथ समन्वय स्थापित किया और पीड़ित को आर्थिक राहत दिलाने के लिए आवश्यक प्रयास किए। पुलिस की इस कार्रवाई से स्पष्ट होता है कि साइबर अपराध की शिकायत मिलने पर संबंधित एजेंसियों के साथ तालमेल बनाकर काम करना कितना आवश्यक है।

साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्कता जरूरी

डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधी भी धोखाधड़ी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, बैंक खाते और ऑनलाइन लेनदेन से संबंधित धोखाधड़ी के मामलों में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों की ओर से आम तौर पर सलाह दी जाती है कि किसी भी व्यक्ति के साथ अपना ओटीपी, कार्ड का सीवीवी नंबर, पिन या इंटरनेट बैंकिंग का पासवर्ड साझा न करें। बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाले अनजान लोगों पर बिना सत्यापन भरोसा न करें। किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने या संदिग्ध वेबसाइट पर कार्ड की जानकारी भरने से भी बचना चाहिए।

यदि क्रेडिट कार्ड से कोई अनधिकृत लेनदेन दिखाई देता है, तो संबंधित बैंक को तत्काल सूचना देकर कार्ड को सुरक्षित कराने और लेनदेन की शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क किया जा सकता है और आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

शिकायत करते समय लेनदेन से संबंधित संदेश, बैंक से प्राप्त सूचना, ट्रांजैक्शन आईडी और अन्य उपलब्ध प्रमाण सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है। समय पर सूचना देने से संबंधित संस्थानों को लेनदेन की जांच करने और संभावित नुकसान को रोकने के लिए कदम उठाने में मदद मिल सकती है।

साइबर अपराध के खिलाफ जागरूकता पर जोर

जालौन साइबर सेल की इस सफलता ने एक बार फिर दिखाया है कि साइबर धोखाधड़ी के मामलों में शिकायत मिलने के बाद त्वरित कार्रवाई और बैंक के साथ समन्वय कितना महत्वपूर्ण है। आकाश गुप्ता के क्रेडिट कार्ड से संबंधित 1,55,664 रुपये की पूरी धनराशि वापस कराया जाना पीड़ित के लिए बड़ी राहत है।

पुलिस की कार्रवाई के साथ ही आम नागरिकों की सतर्कता भी साइबर अपराधों की रोकथाम में अहम भूमिका निभाती है। ऑनलाइन लेनदेन करते समय सावधानी बरतना, गोपनीय बैंकिंग जानकारी साझा नहीं करना और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल शिकायत करना आवश्यक है।

उरई में सामने आया यह मामला उन लोगों के लिए भी एक संदेश है, जो साइबर ठगी का शिकार होने के बाद शिकायत दर्ज कराने से हिचकिचाते हैं। ऐसी स्थिति में बिना देरी किए संबंधित बैंक और साइबर अपराध शिकायत तंत्र से संपर्क करना चाहिए। समय पर उठाया गया कदम नुकसान को कम करने और धनराशि वापस पाने की संभावना बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

मुख्य जानकारी एक नजर में

जालौन पुलिस की इस कार्रवाई से पीड़ित को आर्थिक राहत मिली है। साथ ही यह मामला साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने और किसी भी धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल शिकायत दर्ज कराने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।