उरई में 12 सूत्री मांगों को लेकर आशा कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, 21 हजार रुपये मानदेय और राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
उरई, जालौन। उत्तर प्रदेश के जालौन जनपद मुख्यालय उरई में गुरुवार को आशा एवं आशा संगिनी कार्यकर्ताओं ने अपनी विभिन्न समस्याओं और लंबित मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। ऑल आशा एवं आशा संगिनी कार्यकर्ता सेवा समिति के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन कर सरकार से 12 सूत्री मांगों को पूरा करने की अपील की। प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट सुनील कुमार को सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने अपने लिए सम्मानजनक मानदेय, राज्य कर्मचारी का दर्जा, कैशलेस चिकित्सा सुविधा और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठाई।

आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को आम नागरिकों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। गर्भवती महिलाओं की देखभाल से लेकर बच्चों के टीकाकरण, स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता और विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तक उनकी जिम्मेदारियां व्यापक हैं। इसके बावजूद उन्हें अपनी सेवाओं के अनुरूप मानदेय और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। इसी को लेकर कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के माध्यम से प्रदेश सरकार तक अपनी बात पहुंचाई।
राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग
प्रदर्शन कर रही आशा एवं आशा संगिनी कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांग है कि उन्हें राज्य कर्मचारी का दर्जा प्रदान किया जाए। उनका कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं को धरातल पर लागू करने में उनकी जिम्मेदारी अहम होती है। वे नियमित रूप से विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों में सहयोग करती हैं और समुदाय के बीच रहकर लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति जागरूक करती हैं।
कार्यकर्ताओं ने कहा कि उनकी सेवाओं और जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए सरकार को सेवा संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। राज्य कर्मचारी का दर्जा मिलने से उन्हें रोजगार संबंधी सुरक्षा और अन्य सुविधाओं के लिए बेहतर व्यवस्था मिलने की उम्मीद है। उन्होंने सरकार से इस विषय पर स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की।
आशा के लिए 21 हजार और आशा संगिनी के लिए 26 हजार रुपये मानदेय
आशा कार्यकर्ताओं ने आर्थिक समस्याओं का उल्लेख करते हुए अपने मानदेय में बढ़ोतरी की मांग की। उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं के लिए 21 हजार रुपये प्रतिमाह और आशा संगिनी के लिए 26 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय निर्धारित करने की मांग रखी।
प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं का कहना था कि बढ़ती महंगाई के बीच मौजूदा भुगतान व्यवस्था में परिवार की जरूरतों को पूरा करना कठिन हो जाता है। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कार्यों के लिए उन्हें लगातार समय देना पड़ता है। ऐसे में उनकी आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उचित और सम्मानजनक मानदेय निर्धारित किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी मांग की कि मानदेय और प्रोत्साहन राशि के भुगतान में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। निर्धारित समय पर भुगतान होने से कार्यकर्ताओं को आर्थिक परेशानियों से राहत मिल सकती है और वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन बेहतर तरीके से कर सकेंगी।
कार्यकर्ताओं और परिवार को कैशलेस इलाज की सुविधा मिले
ज्ञापन में आशा और आशा संगिनी कार्यकर्ताओं के साथ उनके परिवार के सदस्यों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग शामिल रही। कार्यकर्ताओं का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्य करने के बावजूद उन्हें चिकित्सा संबंधी खर्चों से राहत देने वाली पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
उन्होंने सरकार से ऐसी व्यवस्था लागू करने की अपील की, जिसके तहत जरूरत पड़ने पर कार्यकर्ता और उनके परिवार के सदस्य बिना तत्काल आर्थिक बोझ के उपचार प्राप्त कर सकें। उनके अनुसार, चिकित्सा सुविधा और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेना आवश्यक है, ताकि लंबे समय से सेवाएं दे रही महिलाओं को राहत मिल सके।
सीएचसी और पीएचसी पर आवास तथा शौचालय की व्यवस्था की मांग
आशा कार्यकर्ताओं ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य केंद्रों पर काम के दौरान ठहरने के लिए उचित स्थान और शौचालय की व्यवस्था होनी चाहिए।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों के संचालन के दौरान आशा एवं आशा संगिनी को अलग-अलग स्थानों पर जाना पड़ता है। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्रों पर मूलभूत सुविधाओं का होना उनके कामकाज के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। कार्यकर्ताओं ने संबंधित विभाग से इन व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने की मांग की।
आशा संगिनी को इलेक्ट्रॉनिक स्कूटी और 5जी मोबाइल देने की मांग
प्रदर्शन के दौरान आशा संगिनी के कामकाज से संबंधित सुविधाओं का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। कार्यकर्ताओं ने आशा संगिनी को इलेक्ट्रॉनिक स्कूटी, 5जी मोबाइल फोन और अनलिमिटेड इंटरनेट डाटा उपलब्ध कराने की मांग की।
उनका कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी सूचनाओं के आदान-प्रदान, विभिन्न रिपोर्टों और डिजिटल माध्यम से होने वाले कार्यों के लिए मोबाइल तथा इंटरनेट की सुविधा उपयोगी है। इसी तरह, क्षेत्र में लगातार भ्रमण करने वाली आशा संगिनी के लिए आवागमन की सुविधा भी काम को सुचारु रूप से पूरा करने में मददगार हो सकती है।
कार्यकर्ताओं ने मांग की कि सरकार उनकी कार्य संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाए।
30 दिन काम, लेकिन भुगतान केवल 24 दिन का मिलने का आरोप
आशा संगिनी कार्यकर्ताओं ने भुगतान व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि वे पूरे 30 दिन काम करती हैं, लेकिन उन्हें भुगतान केवल 24 दिनों का मिलता है। उन्होंने इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए पूरे 30 दिनों का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की।
कार्यकर्ताओं के मुताबिक, काम के दिनों और भुगतान में अंतर होने से उनकी आर्थिक परेशानियां बढ़ती हैं। उन्होंने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से इस मामले की समीक्षा कर उचित समाधान निकालने की अपील की। उनका कहना है कि काम के अनुरूप भुगतान मिलना चाहिए, ताकि कार्यकर्ताओं को अपनी मेहनत का उचित प्रतिफल प्राप्त हो सके।
इसके अलावा, उन्होंने गैर-संचारी रोगों यानी एनसीडी से जुड़े कार्यों का भुगतान सुनिश्चित करने और प्रोत्साहन राशि को दोगुना करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की।
मांगें पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार की चेतावनी
आशा एवं आशा संगिनी कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगों पर समय रहते सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने 15 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू करने की चेतावनी दी। साथ ही कहा कि उचित मानदेय की घोषणा होने तक आपातकालीन कार्य काली पट्टी बांधकर किए जाएंगे।
कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री तक अपनी समस्याएं पहुंचाते हुए मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। उनका कहना है कि वे स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े दायित्व निभाती रहेंगी, लेकिन अपनी आर्थिक और सेवा संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन करने को भी मजबूर हैं।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता रहीं मौजूद
कलेक्ट्रेट परिसर में हुए इस प्रदर्शन में रश्मि, मनीषा, कांती, नीतू, पूजा देवी, विनीता, संगीता, अलका, प्रेमलता, संतोषी, उपदेश कुमारी, कल्पना यादव, मुबीना, रजनी, पार्वती, रानी, रूपरानी, सरिता, सुमन, आरती, ऊषा, मंजू, मीरा देवी, सावित्री, रामकुमारी, जयवती और प्रभा नूरपुर सहित अन्य आशा एवं आशा संगिनी कार्यकर्ता शामिल रहीं।
प्रदर्शन के माध्यम से कार्यकर्ताओं ने सरकार के सामने अपनी मांगों को प्रमुखता से रखा। अब उनकी निगाहें ज्ञापन पर होने वाली कार्रवाई और लंबित समस्याओं के समाधान पर टिकी हैं। कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर उचित निर्णय लिया जाएगा।
निष्कर्ष: उरई में आशा एवं आशा संगिनी कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन मानदेय, सेवा सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को सामने लाता है। राज्य कर्मचारी का दर्जा, निर्धारित मानदेय, कैशलेस चिकित्सा सुविधा, समय पर भुगतान और कार्यस्थल पर जरूरी संसाधनों की मांग को लेकर कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाई है। अब देखना होगा कि प्रदेश सरकार उनकी 12 सूत्री मांगों पर क्या कदम उठाती है।