बौध में खुटाबंध दुर्गा पूजा की तीसरी शाम ‘सीता थाबा’ नाटक के नाम, रावण के दमदार अभिनय ने मोहा दर्शकों का मन

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सुदाम बाबू स्टेट ब्यूरो ओडिशा

हिट एंड हॉट न्यूज़

बौध, ओडिशा | 15 अक्टूबर 2026

ओडिशा के बौध जिले के बौध ब्लॉक अंतर्गत खुटाबंध बस स्टैंड पर आयोजित नौ दिवसीय दुर्गा पूजा महोत्सव में तीसरी शाम सांस्कृतिक रंगों और रामायण के प्रसंगों से सराबोर रही। इस अवसर पर मंचित पौराणिक नाटक ‘सीता थाबा’ (सीता की खोज) ने उपस्थित दर्शकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। कलाकारों ने अपने अभिनय, संवाद और मंचीय प्रस्तुति के माध्यम से भगवान श्रीराम की ओर से माता सीता की खोज में हनुमान जी को लंका भेजे जाने की कथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में खुटाबंध तथा आसपास के गांवों से लोग पहुंचे। दर्शकों ने नाटक के विभिन्न दृश्यों का आनंद लिया और कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना की। विशेष रूप से रावण की भूमिका निभा रहे मनोज मोहंती के प्रभावशाली अभिनय ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। उनके संवाद बोलने के अंदाज और पात्र के अनुरूप भाव-भंगिमाओं ने दर्शकों को देर रात तक कार्यक्रम से जोड़े रखा।

सुबह रामायण पाठ, शाम को हुआ पौराणिक नाटक का मंचन

खुटाबंध में दुर्गा पूजा के अवसर पर धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन निरंतर किया जा रहा है। महोत्सव के तीसरे दिन सुबह रामायण पाठ का आयोजन हुआ। इस दौरान भगवान श्रीराम के वनवास से संबंधित प्रसंगों का पाठ किया गया। राम वनवास की कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को त्याग, मर्यादा, कर्तव्य और धर्म के महत्व से परिचित कराया गया।

सुबह के धार्मिक कार्यक्रम के बाद शाम को सांस्कृतिक आयोजन की शुरुआत हुई। इस दौरान प्रस्तुत नाटक ‘सीता थाबा’ ने रामायण की उस महत्वपूर्ण घटना को मंच पर उतारा, जिसमें माता सीता की खोज के लिए हनुमान जी लंका पहुंचते हैं। नाटक में लंका के राजदरबार, अशोक वाटिका और हनुमान जी की वीरता से जुड़े प्रसंगों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

कलाकारों ने पौराणिक कथा को नाटकीय शैली में पेश करते हुए दर्शकों के सामने घटनाओं का क्रम स्पष्ट किया। संवादों, अभिनय और संगीत के तालमेल ने प्रस्तुति को आकर्षक बनाया।

हनुमान जी के लंका पहुंचने से लेकर माता सीता को अंगूठी देने तक के दृश्य

नाटक की कहानी में भगवान श्रीराम द्वारा हनुमान जी को माता सीता की तलाश में लंका भेजे जाने का प्रसंग प्रमुख रहा। लंका पहुंचने के बाद हनुमान जी की गतिविधियों, रावण के दरबार से जुड़े घटनाक्रम और अशोक वाटिका में माता सीता से उनकी भेंट को मंच पर दिखाया गया।

प्रस्तुति में अक्षय कुमार और जम्बुमाली के वध से जुड़े प्रसंग भी शामिल किए गए। इसके बाद अशोक वाटिका में हनुमान जी के माता सीता तक पहुंचने और उन्हें भगवान श्रीराम की बहुमूल्य अंगूठी सौंपने का दृश्य दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण बना।

इन प्रसंगों के माध्यम से कलाकारों ने रामायण की कथा को मनोरंजक और भावनात्मक स्वरूप देने का प्रयास किया। दर्शकों ने प्रस्तुति के दौरान उत्साह दिखाया और कलाकारों की मेहनत की सराहना की। पौराणिक पात्रों की वेशभूषा तथा मंच सज्जा ने भी नाटक के प्रभाव को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मनोज मोहंती बने रावण, अन्य कलाकारों ने भी निभाईं अहम भूमिकाएं

नाटक में अलग-अलग पात्रों का अभिनय करने वाले कलाकारों ने अपनी भूमिकाओं के अनुरूप प्रस्तुति दी। रावण के किरदार में मनोज मोहंती नजर आए, जबकि मानस साहू ने माता सीता की भूमिका निभाई। सुरेंद्र दांता ने हनुमान जी का पात्र प्रस्तुत किया।

अन्य कलाकारों में बुद्धराम राणा ने अक्षय कुमार, सच्चिदानंद खमारी ने इंद्रजीत, संजीव बारिक ने मुख्य मंत्री और मनोज बारिक ने जम्बुमाली की भूमिका निभाई। शांतनु बदामाली ने संदेशवाहक का पात्र निभाकर नाटक के घटनाक्रम को आगे बढ़ाने में योगदान दिया।

वहीं, एलिना, सोना और वर्षा ने राजदरबार की नर्तकियों के रूप में प्रस्तुति दी। कलाकारों के सामूहिक प्रयास से नाटक के विभिन्न दृश्य मंच पर सजीव दिखाई दिए।

इन सभी भूमिकाओं में मनोज मोहंती का रावण के रूप में अभिनय विशेष रूप से चर्चा में रहा। उनके सशक्त संवाद और पात्र के अनुरूप प्रस्तुति ने दर्शकों को प्रभावित किया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के लिए यह अभिनय शाम के प्रमुख आकर्षणों में से एक रहा।

मंच सज्जा और संगीत ने बढ़ाई कार्यक्रम की भव्यता

किसी भी नाट्य प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाने में मंच सज्जा और संगीत की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। खुटाबंध दुर्गा पूजा महोत्सव में भी इन पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया।

मंच की सजावट की जिम्मेदारी कुशा सेठी ने संभाली। वहीं, सुशांत महार, सौमित्र मल्लिक और सुधीर बड़छता ने संगीत सहयोग प्रदान किया। संगीत और मंचीय गतिविधियों के समन्वय से नाटक के विभिन्न दृश्यों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिली।

रामायण के प्रसंगों पर आधारित नाटक में संवादों के साथ संगीत का इस्तेमाल दर्शकों को कथा से जोड़ने का माध्यम बना। स्थानीय कलाकारों और आयोजन से जुड़े लोगों के सामूहिक प्रयास ने सांस्कृतिक कार्यक्रम को व्यवस्थित रूप प्रदान किया।

नगर पालिका अध्यक्ष मृत्युंजय मिश्रा ने किया कार्यक्रम का उद्घाटन

खुटाबंध में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में बौध नगर पालिका के अध्यक्ष मृत्युंजय मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कार्यक्रम का उद्घाटन किया और आयोजन से जुड़े लोगों की सराहना की।

कार्यक्रम में मुंडापाड़ा पंचायत के पूर्व सरपंच विद्याधर स्वाईं, तेलीबंध पैक्स अध्यक्ष त्रिपुर महाकुड़, समाजसेवी स्वतंत्र कुमार प्रधान, खुटाबंध पैक्स अध्यक्ष राज किशोर देहुरी और समाजसेवी विक्रम महानंदिया भी मौजूद रहे।

उपस्थित अतिथियों ने स्थानीय स्तर पर धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए आयोजकों के प्रयासों की प्रशंसा की। ऐसे आयोजनों को ग्रामीण क्षेत्रों में सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने और नई पीढ़ी को पारंपरिक कथाओं से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।

कार्यक्रम के दौरान पूर्व सरपंच जोगेश्वर महाकुल ने अतिथियों का परिचय कराया और मंच संचालन की जिम्मेदारी निभाई। उनके संचालन से कार्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों को क्रमबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया गया।

स्थानीय लोगों के सहयोग से जारी है नौ दिवसीय दुर्गा पूजा महोत्सव

खुटाबंध में आयोजित नौ दिवसीय दुर्गा पूजा महोत्सव स्थानीय लोगों की सहभागिता का उदाहरण बन रहा है। इस आयोजन को सफल बनाने में खुटाबंध गांव के निवासियों और कलिंग युवा परिषद की सक्रिय भूमिका है।

दुर्गा पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसके साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर भी मिलता है। रामायण आधारित नाटक, संगीत और पारंपरिक प्रस्तुतियां लोगों को सामूहिक रूप से उत्सव में शामिल होने का अवसर देती हैं।

‘सीता थाबा’ नाटक की प्रस्तुति ने महोत्सव की तीसरी शाम को यादगार बनाने में अहम योगदान दिया। इसमें कलाकारों ने रामायण के परिचित प्रसंगों को स्थानीय सांस्कृतिक परिवेश में प्रस्तुत किया। बड़ी संख्या में दर्शकों की मौजूदगी ने कार्यक्रम के प्रति लोगों की रुचि को दर्शाया।

महोत्सव के दौरान धार्मिक कार्यक्रमों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का यह मेल खुटाबंध की सामुदायिक एकजुटता को भी सामने लाता है। स्थानीय निवासियों तथा कलिंग युवा परिषद के सहयोग से आयोजित यह उत्सव क्षेत्र की परंपराओं को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।

निष्कर्ष: खुटाबंध बस स्टैंड पर दुर्गा पूजा की तीसरी शाम रामायण के प्रसंगों, स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा और दर्शकों के उत्साह के नाम रही। ‘सीता थाबा’ नाटक में मनोज मोहंती के रावण रूप और अन्य कलाकारों के सामूहिक अभिनय ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया। धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत के संगम के रूप में यह आयोजन स्थानीय लोगों के लिए उत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।

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बौध में खुटाबंध दुर्गा पूजा की तीसरी शाम ‘सीता थाबा’ नाटक के नाम, रावण के दमदार अभिनय ने मोहा दर्शकों का मन

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 16, 2026

सुदाम बाबू स्टेट ब्यूरो ओडिशा

हिट एंड हॉट न्यूज़

बौध, ओडिशा | 15 अक्टूबर 2026

ओडिशा के बौध जिले के बौध ब्लॉक अंतर्गत खुटाबंध बस स्टैंड पर आयोजित नौ दिवसीय दुर्गा पूजा महोत्सव में तीसरी शाम सांस्कृतिक रंगों और रामायण के प्रसंगों से सराबोर रही। इस अवसर पर मंचित पौराणिक नाटक ‘सीता थाबा’ (सीता की खोज) ने उपस्थित दर्शकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। कलाकारों ने अपने अभिनय, संवाद और मंचीय प्रस्तुति के माध्यम से भगवान श्रीराम की ओर से माता सीता की खोज में हनुमान जी को लंका भेजे जाने की कथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में खुटाबंध तथा आसपास के गांवों से लोग पहुंचे। दर्शकों ने नाटक के विभिन्न दृश्यों का आनंद लिया और कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना की। विशेष रूप से रावण की भूमिका निभा रहे मनोज मोहंती के प्रभावशाली अभिनय ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। उनके संवाद बोलने के अंदाज और पात्र के अनुरूप भाव-भंगिमाओं ने दर्शकों को देर रात तक कार्यक्रम से जोड़े रखा।

सुबह रामायण पाठ, शाम को हुआ पौराणिक नाटक का मंचन

खुटाबंध में दुर्गा पूजा के अवसर पर धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन निरंतर किया जा रहा है। महोत्सव के तीसरे दिन सुबह रामायण पाठ का आयोजन हुआ। इस दौरान भगवान श्रीराम के वनवास से संबंधित प्रसंगों का पाठ किया गया। राम वनवास की कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को त्याग, मर्यादा, कर्तव्य और धर्म के महत्व से परिचित कराया गया।

सुबह के धार्मिक कार्यक्रम के बाद शाम को सांस्कृतिक आयोजन की शुरुआत हुई। इस दौरान प्रस्तुत नाटक ‘सीता थाबा’ ने रामायण की उस महत्वपूर्ण घटना को मंच पर उतारा, जिसमें माता सीता की खोज के लिए हनुमान जी लंका पहुंचते हैं। नाटक में लंका के राजदरबार, अशोक वाटिका और हनुमान जी की वीरता से जुड़े प्रसंगों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

कलाकारों ने पौराणिक कथा को नाटकीय शैली में पेश करते हुए दर्शकों के सामने घटनाओं का क्रम स्पष्ट किया। संवादों, अभिनय और संगीत के तालमेल ने प्रस्तुति को आकर्षक बनाया।

हनुमान जी के लंका पहुंचने से लेकर माता सीता को अंगूठी देने तक के दृश्य

नाटक की कहानी में भगवान श्रीराम द्वारा हनुमान जी को माता सीता की तलाश में लंका भेजे जाने का प्रसंग प्रमुख रहा। लंका पहुंचने के बाद हनुमान जी की गतिविधियों, रावण के दरबार से जुड़े घटनाक्रम और अशोक वाटिका में माता सीता से उनकी भेंट को मंच पर दिखाया गया।

प्रस्तुति में अक्षय कुमार और जम्बुमाली के वध से जुड़े प्रसंग भी शामिल किए गए। इसके बाद अशोक वाटिका में हनुमान जी के माता सीता तक पहुंचने और उन्हें भगवान श्रीराम की बहुमूल्य अंगूठी सौंपने का दृश्य दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण बना।

इन प्रसंगों के माध्यम से कलाकारों ने रामायण की कथा को मनोरंजक और भावनात्मक स्वरूप देने का प्रयास किया। दर्शकों ने प्रस्तुति के दौरान उत्साह दिखाया और कलाकारों की मेहनत की सराहना की। पौराणिक पात्रों की वेशभूषा तथा मंच सज्जा ने भी नाटक के प्रभाव को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मनोज मोहंती बने रावण, अन्य कलाकारों ने भी निभाईं अहम भूमिकाएं

नाटक में अलग-अलग पात्रों का अभिनय करने वाले कलाकारों ने अपनी भूमिकाओं के अनुरूप प्रस्तुति दी। रावण के किरदार में मनोज मोहंती नजर आए, जबकि मानस साहू ने माता सीता की भूमिका निभाई। सुरेंद्र दांता ने हनुमान जी का पात्र प्रस्तुत किया।

अन्य कलाकारों में बुद्धराम राणा ने अक्षय कुमार, सच्चिदानंद खमारी ने इंद्रजीत, संजीव बारिक ने मुख्य मंत्री और मनोज बारिक ने जम्बुमाली की भूमिका निभाई। शांतनु बदामाली ने संदेशवाहक का पात्र निभाकर नाटक के घटनाक्रम को आगे बढ़ाने में योगदान दिया।

वहीं, एलिना, सोना और वर्षा ने राजदरबार की नर्तकियों के रूप में प्रस्तुति दी। कलाकारों के सामूहिक प्रयास से नाटक के विभिन्न दृश्य मंच पर सजीव दिखाई दिए।

इन सभी भूमिकाओं में मनोज मोहंती का रावण के रूप में अभिनय विशेष रूप से चर्चा में रहा। उनके सशक्त संवाद और पात्र के अनुरूप प्रस्तुति ने दर्शकों को प्रभावित किया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के लिए यह अभिनय शाम के प्रमुख आकर्षणों में से एक रहा।

मंच सज्जा और संगीत ने बढ़ाई कार्यक्रम की भव्यता

किसी भी नाट्य प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाने में मंच सज्जा और संगीत की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। खुटाबंध दुर्गा पूजा महोत्सव में भी इन पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया।

मंच की सजावट की जिम्मेदारी कुशा सेठी ने संभाली। वहीं, सुशांत महार, सौमित्र मल्लिक और सुधीर बड़छता ने संगीत सहयोग प्रदान किया। संगीत और मंचीय गतिविधियों के समन्वय से नाटक के विभिन्न दृश्यों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिली।

रामायण के प्रसंगों पर आधारित नाटक में संवादों के साथ संगीत का इस्तेमाल दर्शकों को कथा से जोड़ने का माध्यम बना। स्थानीय कलाकारों और आयोजन से जुड़े लोगों के सामूहिक प्रयास ने सांस्कृतिक कार्यक्रम को व्यवस्थित रूप प्रदान किया।

नगर पालिका अध्यक्ष मृत्युंजय मिश्रा ने किया कार्यक्रम का उद्घाटन

खुटाबंध में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में बौध नगर पालिका के अध्यक्ष मृत्युंजय मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कार्यक्रम का उद्घाटन किया और आयोजन से जुड़े लोगों की सराहना की।

कार्यक्रम में मुंडापाड़ा पंचायत के पूर्व सरपंच विद्याधर स्वाईं, तेलीबंध पैक्स अध्यक्ष त्रिपुर महाकुड़, समाजसेवी स्वतंत्र कुमार प्रधान, खुटाबंध पैक्स अध्यक्ष राज किशोर देहुरी और समाजसेवी विक्रम महानंदिया भी मौजूद रहे।

उपस्थित अतिथियों ने स्थानीय स्तर पर धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए आयोजकों के प्रयासों की प्रशंसा की। ऐसे आयोजनों को ग्रामीण क्षेत्रों में सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने और नई पीढ़ी को पारंपरिक कथाओं से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।

कार्यक्रम के दौरान पूर्व सरपंच जोगेश्वर महाकुल ने अतिथियों का परिचय कराया और मंच संचालन की जिम्मेदारी निभाई। उनके संचालन से कार्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों को क्रमबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया गया।

स्थानीय लोगों के सहयोग से जारी है नौ दिवसीय दुर्गा पूजा महोत्सव

खुटाबंध में आयोजित नौ दिवसीय दुर्गा पूजा महोत्सव स्थानीय लोगों की सहभागिता का उदाहरण बन रहा है। इस आयोजन को सफल बनाने में खुटाबंध गांव के निवासियों और कलिंग युवा परिषद की सक्रिय भूमिका है।

दुर्गा पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसके साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर भी मिलता है। रामायण आधारित नाटक, संगीत और पारंपरिक प्रस्तुतियां लोगों को सामूहिक रूप से उत्सव में शामिल होने का अवसर देती हैं।

‘सीता थाबा’ नाटक की प्रस्तुति ने महोत्सव की तीसरी शाम को यादगार बनाने में अहम योगदान दिया। इसमें कलाकारों ने रामायण के परिचित प्रसंगों को स्थानीय सांस्कृतिक परिवेश में प्रस्तुत किया। बड़ी संख्या में दर्शकों की मौजूदगी ने कार्यक्रम के प्रति लोगों की रुचि को दर्शाया।

महोत्सव के दौरान धार्मिक कार्यक्रमों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का यह मेल खुटाबंध की सामुदायिक एकजुटता को भी सामने लाता है। स्थानीय निवासियों तथा कलिंग युवा परिषद के सहयोग से आयोजित यह उत्सव क्षेत्र की परंपराओं को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।

निष्कर्ष: खुटाबंध बस स्टैंड पर दुर्गा पूजा की तीसरी शाम रामायण के प्रसंगों, स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा और दर्शकों के उत्साह के नाम रही। ‘सीता थाबा’ नाटक में मनोज मोहंती के रावण रूप और अन्य कलाकारों के सामूहिक अभिनय ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया। धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत के संगम के रूप में यह आयोजन स्थानीय लोगों के लिए उत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।