जालौन: कोंच के धनुताल मैदान में दशहरा मेले की धूम, राम-रावण युद्ध के हजारों लोग बने साक्षी

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अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

कोंच, जालौन। उत्तर प्रदेश के जालौन जनपद स्थित कोंच नगर में विजयादशमी के पावन अवसर पर ऐतिहासिक दशहरा मेले का भव्य आयोजन किया गया। धनुताल मैदान में आयोजित इस परंपरागत मेले में हजारों की संख्या में लोगों ने पहुंचकर भगवान श्रीराम और राक्षसराज रावण के बीच हुए युद्ध का रोमांचक मंचन देखा। रावण और मेघनाद के पुतलों के दहन के साथ बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश दिया गया। धार्मिक आस्था, लोक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा यह आयोजन कोंच की प्रसिद्ध रामलीला के 174वें महोत्सव का प्रमुख आकर्षण रहा।

मेले में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और नगर के गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही। रामलीला समिति के पदाधिकारियों ने अतिथियों का स्वागत करते हुए उन्हें स्मृति चिह्न भेंट किए। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस और प्रशासन की टीमें पूरे आयोजन के दौरान सक्रिय रहीं।

धनुताल मैदान में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

कोंच की ऐतिहासिक रामलीला का दशहरा मेला अपनी विशिष्ट परंपराओं और अनूठे युद्ध मंचन के लिए जाना जाता है। मंगलवार को धनुताल मैदान में सुबह से ही लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। समय बीतने के साथ मैदान में दर्शकों की संख्या बढ़ती गई। शाम होते-होते हजारों लोग राम-रावण और लक्ष्मण-मेघनाद के युद्ध को देखने के लिए एकत्र हो गए।

मैदान को रामायण के प्रमुख प्रसंगों के अनुरूप सजाया गया था। पूर्वी छोर पर लंका का दृश्य तैयार किया गया, जहां सबसे ऊंचे हिस्से में माता सीता को विराजमान दिखाया गया। दूसरी ओर रावण और मेघनाद के विशाल पुतले युद्ध के लिए तैयार खड़े थे। मैदान के पश्चिमी हिस्से में लंका विजय हनुमान मंदिर के निकट भगवान श्रीराम की सेना का शिविर बनाया गया था। वहीं, दक्षिण दिशा में धनुताल के किनारे नंदीग्राम का दृश्य मचान के माध्यम से प्रस्तुत किया गया, जहां भरत और शत्रुघ्न की उपस्थिति दिखाई गई।

युद्ध के नगाड़ों की गूंज, कलाकारों की वेशभूषा और मैदान में दौड़ते पुतलों ने पूरे वातावरण को रामायणकालीन प्रसंगों जैसा रूप प्रदान किया। दर्शक देर तक इस पारंपरिक आयोजन का आनंद लेते रहे।

लक्ष्मण और मेघनाद के युद्ध ने बढ़ाया रोमांच

दशहरा मेले के कार्यक्रम में सबसे पहले लक्ष्मण और मेघनाद के बीच युद्ध का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। मेघनाद का विशाल पुतला मैदान में युद्ध के लिए उतारा गया। परंपरागत रूप से इस प्रसंग में लक्ष्मण और हनुमान हाथी पर सवार होकर युद्ध करते थे, लेकिन इस बार हाथी के बिदकने के कारण उसे मैदान से बाहर कर दिया गया। इसके बाद लक्ष्मण और हनुमान ने रथ पर सवार होकर युद्ध का मंचन किया।

दोनों पक्षों के बीच बाणों की वर्षा और हनुमान की गदा के प्रहार ने दर्शकों में उत्साह भर दिया। युद्ध के दौरान मेघनाद की शक्ति से लक्ष्मण के मूर्छित होने का दृश्य दिखाया गया। इसके बाद युद्ध की ध्वनि थम जाती है और कथा के अनुसार हनुमान संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा करते हैं।

लक्ष्मण के स्वस्थ होने के बाद युद्ध दोबारा शुरू होता है। अंततः लक्ष्मण के हाथों मेघनाद का अंत दिखाया जाता है और उसके पुतले में आग लगा दी जाती है। इस प्रसंग के बाद सुलोचना का प्रवेश हुआ। अपने पति मेघनाद की मृत्यु पर शोक और आक्रोश व्यक्त करने के लिए सुलोचना द्वारा दर्शकों की ओर टूटी चूड़ियां फेंकने का पारंपरिक दृश्य भी मंचित किया गया, जिसने रामलीला की भावनात्मक प्रस्तुति को और प्रभावशाली बना दिया।

रावण के युद्ध में उतरते ही दर्शकों की बढ़ी उत्सुकता

मेघनाद के वध के बाद दशहरा मेले का मुख्य आकर्षण रावण और भगवान श्रीराम के बीच युद्ध रहा। रावण स्वयं युद्ध के लिए मैदान में पहुंचता है, जिसके बाद राम और लक्ष्मण अपनी सेना के साथ उसका सामना करने आते हैं।

आयोजन की खास परंपरा के अनुसार भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को लगभग तीन दर्जन कहारों द्वारा उठाए जाने वाले विमान में बैठाकर लाया गया। उनके साथ विमान में मौजूद नमन चतुर्वेदी चंवर डुलाने और युद्ध के दौरान बाण उपलब्ध कराने की भूमिका निभा रहे थे।

मैदान में रावण और मेघनाद के करीब 40 फीट ऊंचे पुतलों का संचालन दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण बना रहा। पुतलों का मैदान में इधर-उधर दौड़ना, युद्ध के दौरान गिरना और फिर उठकर मुकाबले के लिए तैयार होना मंचन को जीवंत बना रहा था। इस अनोखी प्रस्तुति को देखने के लिए दर्शकों में खास उत्सुकता दिखाई दी।

अंततः भगवान श्रीराम के हाथों रावण के वध का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। रावण का पुतला धरती पर गिरा और फिर उसमें अग्नि प्रज्वलित कर दी गई। पुतलों के दहन के साथ ही मैदान जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। इस दृश्य ने बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म और अहंकार पर सत्य की विजय का संदेश दिया।

स्थानीय कलाकारों ने निभाईं महत्वपूर्ण भूमिकाएं

कोंच की रामलीला में स्थानीय कलाकारों की भागीदारी इस आयोजन की खास पहचान रही। इस वर्ष हनुमान की भूमिका राहुल तिवारी ने निभाई। वहीं, रावण के पात्र में अभिषेक रिछारिया और मेघनाद के किरदार में रुचिर रस्तोगी ने अभिनय किया।

कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा और संवादों के माध्यम से रामायण के प्रमुख प्रसंगों को दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया। युद्ध के दृश्यों में पुतलों की गतिविधियों और कलाकारों के अभिनय के तालमेल ने कार्यक्रम को आकर्षक बनाया।

कोंच की रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि नगर की सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। 174वें महोत्सव के अंतर्गत आयोजित इस दशहरा मेले ने एक बार फिर स्थानीय परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाई।

जिलाधिकारी, एसपी और जनप्रतिनिधियों ने दीं शुभकामनाएं

दशहरा मेले में क्षेत्रीय विधायक मूलचंद्र निरंजन, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व राज्यमंत्री भानुप्रताप वर्मा, जिलाधिकारी समीर, पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र रावत, अपर पुलिस अधीक्षक ईशान सोनी और नगर पालिका अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता मौजूद रहे। अतिथियों ने नगरवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं और पर्व के सामाजिक संदेश को महत्वपूर्ण बताया।

इस दौरान रामलीला समिति के अध्यक्ष राजीव पटेल, मंत्री शैलेष सोनी और लालजी कुशवाहा सहित अन्य पदाधिकारियों ने अतिथियों का स्वागत किया। समिति की ओर से उन्हें स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया।

रामलीला का संचालन करने वाली संस्था धर्मादा रक्षिणी सभा के अध्यक्ष विजय गुप्ता भोले, मंत्री विनोद दुबे लौना और कोषाध्यक्ष मुकेश सोनी सहित अन्य सदस्य भी आयोजन की व्यवस्थाओं में सक्रिय रहे। समिति के सदस्यों ने मेले के सफल संचालन में सहयोग करने वाले लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।

सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस और प्रशासन रहा सतर्क

धनुताल मैदान में हजारों लोगों की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। उपजिलाधिकारी अभिनव कुमार और क्षेत्राधिकारी परमेश्वर प्रसाद के निर्देशन में पुलिसकर्मियों की टीमें मैदान में तैनात रहीं। कोतवाल निगवेंद्र प्रताप सिंह, वरिष्ठ उपनिरीक्षक विमलेश कुमार और अन्य पुलिसकर्मियों ने भीड़ प्रबंधन तथा सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाली।

मेले में लोगों की भारी मौजूदगी को देखते हुए सर्किल के अन्य थानों से भी अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया था। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए फायर सर्विस और एंबुलेंस की गाड़ियों को भी मैदान में तैनात रखा गया।

पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने आयोजन स्थल पर व्यवस्था बनाए रखने के लिए निगरानी की। धार्मिक कार्यक्रम के दौरान भीड़ को नियंत्रित रखने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया गया।

धर्म और संस्कृति का संदेश देकर संपन्न हुआ दशहरा मेला

कोंच का दशहरा मेला धार्मिक आस्था, सामाजिक सहभागिता और सांस्कृतिक परंपराओं का संगम बनकर सामने आया। हजारों लोगों ने राम-रावण युद्ध का मंचन देखकर विजयादशमी के महत्व को समझा। रावण और मेघनाद के पुतलों का दहन इस बात का प्रतीक रहा कि अहंकार, अन्याय और बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः सत्य और धर्म की ही विजय होती है।

नगर की ऐतिहासिक रामलीला के 174वें महोत्सव में उमड़ी भीड़ और प्रशासन की सक्रियता ने आयोजन को विशेष पहचान दी। धार्मिक उत्साह के बीच संपन्न हुए इस दशहरा मेले ने कोंच की सांस्कृतिक विरासत और वर्षों पुरानी परंपरा को एक बार फिर नई पीढ़ी के सामने प्रस्तुत किया।

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जालौन: कोंच के धनुताल मैदान में दशहरा मेले की धूम, राम-रावण युद्ध के हजारों लोग बने साक्षी

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 20, 2026

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

कोंच, जालौन। उत्तर प्रदेश के जालौन जनपद स्थित कोंच नगर में विजयादशमी के पावन अवसर पर ऐतिहासिक दशहरा मेले का भव्य आयोजन किया गया। धनुताल मैदान में आयोजित इस परंपरागत मेले में हजारों की संख्या में लोगों ने पहुंचकर भगवान श्रीराम और राक्षसराज रावण के बीच हुए युद्ध का रोमांचक मंचन देखा। रावण और मेघनाद के पुतलों के दहन के साथ बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश दिया गया। धार्मिक आस्था, लोक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा यह आयोजन कोंच की प्रसिद्ध रामलीला के 174वें महोत्सव का प्रमुख आकर्षण रहा।

मेले में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और नगर के गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही। रामलीला समिति के पदाधिकारियों ने अतिथियों का स्वागत करते हुए उन्हें स्मृति चिह्न भेंट किए। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस और प्रशासन की टीमें पूरे आयोजन के दौरान सक्रिय रहीं।

धनुताल मैदान में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

कोंच की ऐतिहासिक रामलीला का दशहरा मेला अपनी विशिष्ट परंपराओं और अनूठे युद्ध मंचन के लिए जाना जाता है। मंगलवार को धनुताल मैदान में सुबह से ही लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। समय बीतने के साथ मैदान में दर्शकों की संख्या बढ़ती गई। शाम होते-होते हजारों लोग राम-रावण और लक्ष्मण-मेघनाद के युद्ध को देखने के लिए एकत्र हो गए।

मैदान को रामायण के प्रमुख प्रसंगों के अनुरूप सजाया गया था। पूर्वी छोर पर लंका का दृश्य तैयार किया गया, जहां सबसे ऊंचे हिस्से में माता सीता को विराजमान दिखाया गया। दूसरी ओर रावण और मेघनाद के विशाल पुतले युद्ध के लिए तैयार खड़े थे। मैदान के पश्चिमी हिस्से में लंका विजय हनुमान मंदिर के निकट भगवान श्रीराम की सेना का शिविर बनाया गया था। वहीं, दक्षिण दिशा में धनुताल के किनारे नंदीग्राम का दृश्य मचान के माध्यम से प्रस्तुत किया गया, जहां भरत और शत्रुघ्न की उपस्थिति दिखाई गई।

युद्ध के नगाड़ों की गूंज, कलाकारों की वेशभूषा और मैदान में दौड़ते पुतलों ने पूरे वातावरण को रामायणकालीन प्रसंगों जैसा रूप प्रदान किया। दर्शक देर तक इस पारंपरिक आयोजन का आनंद लेते रहे।

लक्ष्मण और मेघनाद के युद्ध ने बढ़ाया रोमांच

दशहरा मेले के कार्यक्रम में सबसे पहले लक्ष्मण और मेघनाद के बीच युद्ध का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। मेघनाद का विशाल पुतला मैदान में युद्ध के लिए उतारा गया। परंपरागत रूप से इस प्रसंग में लक्ष्मण और हनुमान हाथी पर सवार होकर युद्ध करते थे, लेकिन इस बार हाथी के बिदकने के कारण उसे मैदान से बाहर कर दिया गया। इसके बाद लक्ष्मण और हनुमान ने रथ पर सवार होकर युद्ध का मंचन किया।

दोनों पक्षों के बीच बाणों की वर्षा और हनुमान की गदा के प्रहार ने दर्शकों में उत्साह भर दिया। युद्ध के दौरान मेघनाद की शक्ति से लक्ष्मण के मूर्छित होने का दृश्य दिखाया गया। इसके बाद युद्ध की ध्वनि थम जाती है और कथा के अनुसार हनुमान संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा करते हैं।

लक्ष्मण के स्वस्थ होने के बाद युद्ध दोबारा शुरू होता है। अंततः लक्ष्मण के हाथों मेघनाद का अंत दिखाया जाता है और उसके पुतले में आग लगा दी जाती है। इस प्रसंग के बाद सुलोचना का प्रवेश हुआ। अपने पति मेघनाद की मृत्यु पर शोक और आक्रोश व्यक्त करने के लिए सुलोचना द्वारा दर्शकों की ओर टूटी चूड़ियां फेंकने का पारंपरिक दृश्य भी मंचित किया गया, जिसने रामलीला की भावनात्मक प्रस्तुति को और प्रभावशाली बना दिया।

रावण के युद्ध में उतरते ही दर्शकों की बढ़ी उत्सुकता

मेघनाद के वध के बाद दशहरा मेले का मुख्य आकर्षण रावण और भगवान श्रीराम के बीच युद्ध रहा। रावण स्वयं युद्ध के लिए मैदान में पहुंचता है, जिसके बाद राम और लक्ष्मण अपनी सेना के साथ उसका सामना करने आते हैं।

आयोजन की खास परंपरा के अनुसार भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को लगभग तीन दर्जन कहारों द्वारा उठाए जाने वाले विमान में बैठाकर लाया गया। उनके साथ विमान में मौजूद नमन चतुर्वेदी चंवर डुलाने और युद्ध के दौरान बाण उपलब्ध कराने की भूमिका निभा रहे थे।

मैदान में रावण और मेघनाद के करीब 40 फीट ऊंचे पुतलों का संचालन दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण बना रहा। पुतलों का मैदान में इधर-उधर दौड़ना, युद्ध के दौरान गिरना और फिर उठकर मुकाबले के लिए तैयार होना मंचन को जीवंत बना रहा था। इस अनोखी प्रस्तुति को देखने के लिए दर्शकों में खास उत्सुकता दिखाई दी।

अंततः भगवान श्रीराम के हाथों रावण के वध का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। रावण का पुतला धरती पर गिरा और फिर उसमें अग्नि प्रज्वलित कर दी गई। पुतलों के दहन के साथ ही मैदान जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। इस दृश्य ने बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म और अहंकार पर सत्य की विजय का संदेश दिया।

स्थानीय कलाकारों ने निभाईं महत्वपूर्ण भूमिकाएं

कोंच की रामलीला में स्थानीय कलाकारों की भागीदारी इस आयोजन की खास पहचान रही। इस वर्ष हनुमान की भूमिका राहुल तिवारी ने निभाई। वहीं, रावण के पात्र में अभिषेक रिछारिया और मेघनाद के किरदार में रुचिर रस्तोगी ने अभिनय किया।

कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा और संवादों के माध्यम से रामायण के प्रमुख प्रसंगों को दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया। युद्ध के दृश्यों में पुतलों की गतिविधियों और कलाकारों के अभिनय के तालमेल ने कार्यक्रम को आकर्षक बनाया।

कोंच की रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि नगर की सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। 174वें महोत्सव के अंतर्गत आयोजित इस दशहरा मेले ने एक बार फिर स्थानीय परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाई।

जिलाधिकारी, एसपी और जनप्रतिनिधियों ने दीं शुभकामनाएं

दशहरा मेले में क्षेत्रीय विधायक मूलचंद्र निरंजन, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व राज्यमंत्री भानुप्रताप वर्मा, जिलाधिकारी समीर, पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र रावत, अपर पुलिस अधीक्षक ईशान सोनी और नगर पालिका अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता मौजूद रहे। अतिथियों ने नगरवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं और पर्व के सामाजिक संदेश को महत्वपूर्ण बताया।

इस दौरान रामलीला समिति के अध्यक्ष राजीव पटेल, मंत्री शैलेष सोनी और लालजी कुशवाहा सहित अन्य पदाधिकारियों ने अतिथियों का स्वागत किया। समिति की ओर से उन्हें स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया।

रामलीला का संचालन करने वाली संस्था धर्मादा रक्षिणी सभा के अध्यक्ष विजय गुप्ता भोले, मंत्री विनोद दुबे लौना और कोषाध्यक्ष मुकेश सोनी सहित अन्य सदस्य भी आयोजन की व्यवस्थाओं में सक्रिय रहे। समिति के सदस्यों ने मेले के सफल संचालन में सहयोग करने वाले लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।

सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस और प्रशासन रहा सतर्क

धनुताल मैदान में हजारों लोगों की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। उपजिलाधिकारी अभिनव कुमार और क्षेत्राधिकारी परमेश्वर प्रसाद के निर्देशन में पुलिसकर्मियों की टीमें मैदान में तैनात रहीं। कोतवाल निगवेंद्र प्रताप सिंह, वरिष्ठ उपनिरीक्षक विमलेश कुमार और अन्य पुलिसकर्मियों ने भीड़ प्रबंधन तथा सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाली।

मेले में लोगों की भारी मौजूदगी को देखते हुए सर्किल के अन्य थानों से भी अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया था। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए फायर सर्विस और एंबुलेंस की गाड़ियों को भी मैदान में तैनात रखा गया।

पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने आयोजन स्थल पर व्यवस्था बनाए रखने के लिए निगरानी की। धार्मिक कार्यक्रम के दौरान भीड़ को नियंत्रित रखने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया गया।

धर्म और संस्कृति का संदेश देकर संपन्न हुआ दशहरा मेला

कोंच का दशहरा मेला धार्मिक आस्था, सामाजिक सहभागिता और सांस्कृतिक परंपराओं का संगम बनकर सामने आया। हजारों लोगों ने राम-रावण युद्ध का मंचन देखकर विजयादशमी के महत्व को समझा। रावण और मेघनाद के पुतलों का दहन इस बात का प्रतीक रहा कि अहंकार, अन्याय और बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः सत्य और धर्म की ही विजय होती है।

नगर की ऐतिहासिक रामलीला के 174वें महोत्सव में उमड़ी भीड़ और प्रशासन की सक्रियता ने आयोजन को विशेष पहचान दी। धार्मिक उत्साह के बीच संपन्न हुए इस दशहरा मेले ने कोंच की सांस्कृतिक विरासत और वर्षों पुरानी परंपरा को एक बार फिर नई पीढ़ी के सामने प्रस्तुत किया।