जालौन में धान खरीद शून्य मिलने पर डीएम सख्त, क्रय केंद्र प्रभारियों से मांगा स्पष्टीकरण

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अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

एमएसपी पर खरीद की समीक्षा में सामने आई लापरवाही, ज्वार और बाजरा की खरीद भी बेहद धीमी; किसानों को परेशान करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की चेतावनी

जालौन, 04 नवंबर 2026। किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य दिलाने और सरकारी खरीद व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए जिला प्रशासन लगातार प्रयास करने का दावा कर रहा है। इसके बावजूद जालौन जनपद में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कृषि उपज की खरीद की स्थिति बेहद निराशाजनक सामने आई है। धान खरीद के लिए निर्धारित लक्ष्य के बावजूद जिले के किसी भी क्रय केंद्र पर खरीद शुरू नहीं होने की जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी समीर ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित क्रय केंद्र प्रभारियों से स्पष्टीकरण मांगते हुए तत्काल खरीद प्रक्रिया शुरू कराने के निर्देश दिए।

कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने धान, ज्वार और बाजरा की सरकारी खरीद की प्रगति का बिंदुवार आकलन किया। बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों ने क्रय केंद्रों की तैयारियों और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। डीएम ने अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया कि किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी केंद्रों को निर्धारित मानकों के अनुसार संचालित करना और किसानों की उपज की खरीद सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

धान खरीद शुरू नहीं होने पर डीएम ने जताई नाराजगी

समीक्षा बैठक में धान खरीद की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक पाई गई। जनपद में चालू खरीद व्यवस्था के तहत कुल 800 मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए उरई, जालौन और माधौगढ़ क्षेत्रों में क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। हालांकि, समीक्षा के समय तक किसी भी केंद्र पर धान की खरीद शुरू नहीं हुई थी।

किसानों से सरकारी दरों पर धान खरीदने के लिए केंद्र स्थापित किए जाने के बावजूद खरीद का आंकड़ा शून्य रहना प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल खड़े करता है। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित केंद्र प्रभारियों से जवाब मांगा। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी आवश्यक व्यवस्थाएं तत्काल पूरी की जाएं और किसानों से धान की खरीद बिना अनावश्यक देरी के शुरू की जाए।

डीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल क्रय केंद्र स्थापित कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका नियमित संचालन और वास्तविक खरीद सुनिश्चित करना भी जरूरी है। किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए सरकारी कार्यालयों और केंद्रों के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए।

ज्वार खरीद में भी लक्ष्य से काफी पीछे जिला

धान के साथ ज्वार की खरीद की प्रगति भी उम्मीद के अनुरूप नहीं मिली। जनपद में ज्वार खरीद के लिए 14,500 मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए जिले में 12 क्रय केंद्र बनाए गए हैं।

लेकिन बैठक के दौरान सामने आए आंकड़ों के मुताबिक अब तक केवल 849 कुंतल ज्वार की खरीद हो पाई है। स्थिति यह भी सामने आई कि निर्धारित 12 केंद्रों में से छह केंद्रों पर खरीद की प्रक्रिया शुरू ही नहीं हुई थी।

इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल सक्रिय होने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन केंद्रों पर अभी तक खरीद शुरू नहीं हुई है, वहां सभी व्यवस्थाएं पूरी कराई जाएं। किसानों को ज्वार बेचने के लिए पर्याप्त सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए। साथ ही खरीद की प्रतिदिन समीक्षा करते हुए प्रगति रिपोर्ट तैयार की जाए, ताकि लक्ष्य प्राप्त करने में आने वाली बाधाओं को समय रहते दूर किया जा सके।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को यह भी समझाया कि ज्वार उत्पादक किसानों के लिए सरकारी खरीद केंद्र महत्वपूर्ण हैं। यदि समय पर खरीद नहीं होती है तो किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी हो सकती है। इसलिए केंद्रों पर कर्मचारियों की उपलब्धता, आवश्यक संसाधनों और खरीद संबंधी प्रक्रियाओं को दुरुस्त रखना जरूरी है।

बाजरा खरीद के आंकड़े भी बेहद कमजोर

बैठक में बाजरा खरीद की समीक्षा के दौरान भी जिले की स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई। जनपद के लिए बाजरा खरीद का लक्ष्य 3,000 मीट्रिक टन निर्धारित किया गया है, लेकिन अब तक केवल 32.50 कुंतल बाजरे की खरीद हो सकी है।

इतने बड़े लक्ष्य के मुकाबले खरीद की यह बेहद कम मात्रा प्रशासन के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। जिलाधिकारी ने इस पर संबंधित अधिकारियों को तेजी से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी बाजरा क्रय केंद्रों को पूरी क्षमता के साथ संचालित किया जाए और किसानों को खरीद प्रक्रिया से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सरकारी खरीद व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाना है। यदि केंद्रों पर खरीद ही नहीं होगी तो किसानों को निर्धारित समर्थन मूल्य का लाभ नहीं मिल पाएगा। इसलिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें।

किसानों को मिलेगा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य

समीक्षा बैठक में विभिन्न फसलों के लिए निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य की जानकारी भी दी गई। सरकार की ओर से तय दरों के अनुसार किसानों को उनकी उपज का भुगतान निर्धारित मानकों के आधार पर किया जाना है।

धान, ज्वार और बाजरा के समर्थन मूल्य इस प्रकार हैं:

  • धान कॉमन: 2,441 रुपये प्रति कुंतल।
  • धान ग्रेड-ए: 2,461 रुपये प्रति कुंतल।
  • ज्वार हाइब्रिड: 4,023 रुपये प्रति कुंतल।
  • ज्वार मालदण्डी: 4,073 रुपये प्रति कुंतल।
  • बाजरा: 2,900 रुपये प्रति कुंतल।

इन दरों का उद्देश्य किसानों को बाजार में संभावित कम कीमतों से राहत देना और उनकी कृषि उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करना है। सरकारी खरीद केंद्रों के माध्यम से निर्धारित समर्थन मूल्य पर फसल बेचने की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

ऐसे में जरूरी है कि खरीद केंद्र समय से खुलें, वहां जिम्मेदार कर्मचारी मौजूद रहें और किसानों को फसल बेचने में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

क्रय केंद्रों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश

जिलाधिकारी समीर ने बैठक में अधिकारियों को निर्देशित किया कि सरकारी खरीद प्रक्रिया को केवल कागजों तक सीमित न रखा जाए। प्रत्येक क्रय केंद्र की वास्तविक स्थिति का नियमित निरीक्षण किया जाए। खरीद की प्रगति, किसानों की संख्या और केंद्रों पर उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी लगातार प्राप्त की जाए।

उन्होंने कहा कि किसानों को यह जानकारी होनी चाहिए कि किस केंद्र पर किस फसल की खरीद हो रही है और इसके लिए क्या प्रक्रिया निर्धारित है। खरीद केंद्रों पर स्पष्ट सूचना व्यवस्था बनाई जाए, जिससे किसानों को अनावश्यक रूप से इधर-उधर भटकना न पड़े।

डीएम ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही के कारण किसान परेशान होते हैं अथवा उन्हें सरकारी खरीद का लाभ नहीं मिल पाता है तो संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि किसानों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए। किसी भी किसान को बिना उचित कारण लौटाना, खरीद प्रक्रिया में अनावश्यक बाधा उत्पन्न करना या उसे बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगवाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अधिकारियों की मौजूदगी में हुई समीक्षा

कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित इस बैठक में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व राजीव राज, खाद्य विपणन अधिकारी रुचिता ओमर और संबंधित क्रय केंद्रों के प्रभारी मौजूद रहे। बैठक में खरीद के आंकड़ों की समीक्षा के साथ-साथ लक्ष्य प्राप्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाने पर चर्चा की गई।

जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में खरीद व्यवस्था को सक्रिय करें और निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कार्य करें। धान, ज्वार और बाजरा की खरीद में तेजी लाने के लिए नियमित निगरानी की जाए तथा किसी भी प्रकार की समस्या सामने आने पर तत्काल उसका समाधान कराया जाए।

किसानों की उम्मीदें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकीं

जालौन में धान खरीद का शून्य आंकड़ा और ज्वार-बाजरा की बेहद धीमी खरीद किसानों के लिए चिंता का विषय है। किसानों को उम्मीद रहती है कि सरकारी क्रय केंद्रों पर उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा और उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए निजी व्यापारियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी है कि खरीद व्यवस्था समयबद्ध और प्रभावी तरीके से संचालित हो। जिलाधिकारी की सख्ती के बाद अब संबंधित विभागों और क्रय केंद्र प्रभारियों पर खरीद में तेजी लाने का दबाव बढ़ गया है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासनिक निर्देशों के बाद धान की खरीद कब शुरू होती है और ज्वार-बाजरा की खरीद निर्धारित लक्ष्य की दिशा में कितनी तेजी से आगे बढ़ती है। फिलहाल जिलाधिकारी ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि किसानों के हितों से जुड़ी सरकारी खरीद व्यवस्था में लापरवाही करने वालों को जवाब देना होगा।

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