मई 20, 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऐतिहासिक कीर्तिमान: 17 विदेशी संसदों को संबोधित कर कांग्रेस प्रधानमंत्रियों के कुल योग की बराबरी

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Anoop singh

📅 विंडहोक (नामीबिया), 10 जुलाई 2025

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। उन्होंने नामीबिया की संसद को संबोधित कर विदेशी संसदों में अपने कुल भाषणों की संख्या 17 तक पहुँचा दी है — जो कि अब तक के सभी कांग्रेस प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए भाषणों के संयुक्त कुल के बराबर है। यह उपलब्धि न केवल भारत की कूटनीतिक सक्रियता को दर्शाती है, बल्कि विश्व मंच पर भारत की उभरती छवि का प्रतीक भी बन गई है।

🌍 नामीबिया में अभूतपूर्व सम्मान

नामीबिया की संसद में प्रधानमंत्री मोदी का भाषण विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। उनके उद्बोधन के बाद वहां के सांसदों ने खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन दिया। इस प्रकार का स्वागत यह दिखाता है कि भारत की वैश्विक साख में कितना इज़ाफा हुआ है।

🌐 पांच देशों की यात्रा, कई ऐतिहासिक पलों की गवाही

इस पांच देशों के दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने घाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, तथा नामीबिया की संसदों को संबोधित किया। इन भाषणों में उन्होंने भारत के विकास, सहयोग, वैश्विक दक्षिण की भूमिका, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल समावेशन और वैश्विक शांति जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

🧾 कांग्रेस के प्रधानमंत्रियों का रिकॉर्ड

अब तक के कांग्रेस प्रधानमंत्री, जिनमें शामिल हैं:

  • डॉ. मनमोहन सिंह – 7 भाषण
  • इंदिरा गांधी – 4 भाषण
  • जवाहरलाल नेहरू – 3 भाषण
  • राजीव गांधी – 2 भाषण
  • पी.वी. नरसिम्हा राव – 1 भाषण

इन सभी का कुल योग 17 भाषणों का बनता है, जिसे अब अकेले प्रधानमंत्री मोदी ने स्पर्श कर लिया है।

🗣️ अटल बिहारी वाजपेयी और मोरारजी देसाई का योगदान

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने कार्यकाल में दो बार विदेशी संसदों को संबोधित किया था, जबकि मोरारजी देसाई ने एक बार किसी विदेशी संसद में भाषण दिया था। लेकिन नरेंद्र मोदी ने इसे नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है।


🔎 निष्कर्ष

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह रिकॉर्ड भारत के लिए गौरव की बात है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक साख, रणनीतिक सोच, और राजनयिक कौशल का प्रमाण है। आज जब दुनिया एक नए वैश्विक संतुलन की तलाश में है, भारत की भूमिका पहले से कहीं अधिक अहम हो चुकी है — और उसमें मोदी जैसे नेतृत्व की स्पष्ट छाप दिखती है।

🇮🇳 भारत की यह कूटनीतिक विजय आगे आने वाली पीढ़ियों को एक प्रेरणा देती है कि वैश्विक नेतृत्व कोई सपना नहीं, बल्कि एक रणनीतिक दृष्टिकोण और निष्ठा से अर्जित की जाने वाली उपलब्धि है।


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