तालिबान की ड्रेस कोड नीति पर यूएन की कड़ी चिंता: काबुल में महिलाओं की गिरफ्तारी पर मचा हड़कंप

काबुल, 22 जुलाई 2025 — अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में महिलाओं और लड़कियों की हालिया गिरफ्तारी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता की लहर पैदा कर दी है। संयुक्त राष्ट्र की सहायता मिशन (UNAMA) ने तालिबान शासन द्वारा लागू किए गए कठोर ड्रेस कोड नियमों के उल्लंघन के आरोप में महिलाओं की गिरफ्तारी पर गहरी आपत्ति जताई है।
UNAMA ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि यह कदम न केवल महिलाओं के बुनियादी मानवाधिकारों का हनन है, बल्कि अफगान समाज में महिलाओं को और अधिक अलग-थलग करने और भय का माहौल पैदा करने की दिशा में एक गंभीर कदम है। बयान में यह भी कहा गया कि तालिबान को इस मामले पर पारदर्शिता बरतनी चाहिए और स्पष्ट करना चाहिए कि महिलाएं किन आधारों पर हिरासत में ली गईं।
कई इलाकों में ‘नैतिक पुलिस’ की कार्रवाई
खामा प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान की तथाकथित नैतिकता पुलिस ने काबुल के विभिन्न इलाकों जैसे दश्त-ए-बरची, क़ाला-ए-फतुल्लाह, कोटे सांग़ी और शहर-ए-नव में छापेमारी कर महिलाओं और किशोरियों को गिरफ्तार किया। उन्हें अज्ञात स्थानों पर ले जाया गया है और उनके परिवारों को उनके ठिकाने की जानकारी तक नहीं दी गई।
महिला अधिकारों का दमन
UNAMA ने तालिबान से अपील की है कि वे महिलाओं के अधिकारों को सीमित करने वाली नीतियों को समाप्त करें और उन्हें स्वतंत्रता तथा गरिमा के साथ जीने का अवसर दें। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों ने भी इन गिरफ्तारियों को महिलाओं की स्वतंत्रता पर गंभीर हमला बताया है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया
2021 में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद से अफगान महिलाओं की स्थिति लगातार खराब हुई है। स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थलों पर उनके अधिकारों को लगातार सीमित किया गया है। अब यह नया ड्रेस कोड विवाद उनके जीवन पर और अधिक भय और असुरक्षा की परछाई डाल रहा है।
अफगान डायस्पोरा और कई वैश्विक मानवाधिकार संस्थाएं इस कदम को एक बड़े दमन चक्र का हिस्सा मानती हैं, जिसका उद्देश्य महिलाओं की आवाज को पूरी तरह से दबा देना है।
नारी अस्तित्व पर संकट
खामा प्रेस की रिपोर्ट बताती है कि हालिया गिरफ्तारियों ने अफगान महिलाओं के बीच भय का वातावरण और गहरा कर दिया है। कई महिलाएं अब घर से बाहर निकलने में भी डर महसूस कर रही हैं, क्योंकि उन्हें नहीं पता कि कब उनकी पोशाक पर कोई उंगली उठा देगा।
निष्कर्ष:
अफगानिस्तान में महिलाओं की स्वतंत्रता और गरिमा पर लगातार चोट की जा रही है। ड्रेस कोड जैसे व्यक्तिगत विषय पर जबरदस्ती और गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकती। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की यह जिम्मेदारी है कि वह तालिबान पर लगातार दबाव बनाए रखे, ताकि अफगान महिलाओं को फिर से वह सम्मान और अधिकार मिल सके, जिसके वे स्वाभाविक रूप से हकदार हैं।
