अजीत कुमार की हिरासत में मौत: मद्रास हाईकोर्ट ने परिजनों को ₹25 लाख मुआवज़ा देने का आदेश दिया

मदुरै (तमिलनाडु), 23 जुलाई 2025 — शिवगंगा ज़िले के मडापुरम कालीअम्मन मंदिर के सुरक्षा गार्ड अजीत कुमार की कथित हिरासत में मौत के मामले में मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने अजीत कुमार के परिजनों को ₹25 लाख का अंतरिम मुआवज़ा देने का आदेश दिया है।
परिवार की ओर से अदालत में पैरवी कर रहे अधिवक्ता मॉरिस कुमार ने बताया कि पहले अदालत ने ₹40 लाख का मुआवज़ा तय किया था, लेकिन सरकार की आपत्ति के बाद डिवीजन बेंच ने राशि घटाकर ₹25 लाख कर दी। सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि पहले ही ₹7.5 लाख की सहायता राशि पीड़ित परिवार को दी जा चुकी है, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।
अब यह मामला अगली सुनवाई में अंतिम मुआवज़े की राशि तय करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। इसके साथ ही, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भी अब इस संवेदनशील हिरासत मौत मामले की जांच अपने हाथ में ले ली है।
क्या है पूरा मामला?
अजीत कुमार, जो मडापुरम कालीअम्मन मंदिर में सुरक्षा गार्ड के तौर पर कार्यरत थे, उन्हें एक चोरी की जांच के सिलसिले में पुलिस द्वारा तिरुप्पुवनाम (शिवगंगा) में हिरासत में लिया गया था। हिरासत के दौरान ही उनकी कथित तौर पर मौत हो गई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस मौत को और भी गंभीर बना दिया। रिपोर्ट में अजीत कुमार के शरीर पर 44 जगह चोट के निशान पाए गए हैं, जिससे संदेह और गहरा गया है कि उन्हें हिरासत में प्रताड़ित किया गया हो सकता है।
परिवार की न्याय की लड़ाई
पीड़ित परिवार के अधिवक्ता ने ANI से बात करते हुए कहा, “अदालत ने पहले ही इस मामले में गंभीरता दिखाई है और सरकार की दलील को अस्वीकार करते हुए उचित मुआवज़े की दिशा में कदम उठाया है। अब उम्मीद है कि सीबीआई जांच के बाद दोषियों को सज़ा मिलेगी और न्याय की प्रक्रिया पूरी होगी।”
निष्कर्ष
अजीत कुमार की हिरासत में हुई मौत ना सिर्फ एक व्यक्ति के जीवन की क्षति है, बल्कि यह कानून व्यवस्था और मानवाधिकारों पर भी गंभीर सवाल उठाती है। मद्रास हाईकोर्ट का यह फैसला पीड़ित परिवार को आंशिक राहत जरूर देता है, लेकिन सच्चे न्याय की दिशा में अगला कदम अब सीबीआई की निष्पक्ष जांच और दोषियों की पहचान होगी।
