मार्च 21, 2026

‘जमीन के बदले नौकरी’ मामला: तेजस्वी यादव पर लगे आरोपों पर वकील का पलटवार

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नई दिल्ली — ‘जमीन के बदले नौकरी’ घोटाले में पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के खिलाफ चल रही सुनवाई के दौरान सोमवार को उनके पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू कोर्ट में जोरदार बहस की। उन्होंने दलील दी कि केवल किसी कंपनी के शेयर खरीद लेने मात्र से किसी व्यक्ति को साजिशकर्ता करार नहीं दिया जा सकता।

मनिंदर सिंह ने अदालत में कहा कि वर्ष 2009 से 2014 के बीच किसी भी प्रकार का भूमि सौदा नहीं हुआ था और इस अवधि में किसी ने भी लालू प्रसाद यादव से जुड़ा कोई बयान नहीं दिया। उन्होंने स्पष्ट किया,

“एक व्यक्ति यदि किसी कंपनी के शेयर खरीदता है, तो वह अधिकतम लाभार्थी हो सकता है, पर उसे साजिश में शामिल दिखाने के लिए ठोस सबूत आवश्यक हैं, जो इस मामले में सीबीआई के पास नहीं हैं।”

अधिवक्ता ने यह भी रेखांकित किया कि सीबीआई ने जिस आधार पर पाँच वर्ष पहले मामला शुरू किया था—कि जमीन ली गई और नौकरी दी गई—उसी दलील को आज भी दोहरा रही है, जबकि नए साक्ष्य पेश नहीं किए गए। उन्होंने सवाल उठाया,

“क्या महज़ 1,500 शेयर खरीदना किसी को ‘जमीन के बदले नौकरी’ जैसी साजिश में शामिल कर देता है?”

उन्होंने कहा कि यदि तेजस्वी वास्तव में किसी साजिश का हिस्सा होते, तो यह बताना आवश्यक है कि वे किस समय इसमें शामिल हुए। यह विरोधाभास है कि एक तरफ सीबीआई उनके नाम को शुरुआत में शामिल नहीं करती, और बाद में उन्हें पूरे परिवार के साथ कथित लाभार्थी बता देती है।

मनिंदर सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि बचाव पक्ष को आरोपी के पक्ष में धारा 161 और 164 के तहत दर्ज बयानों का उपयोग करने के लिए बाध्य किया गया, जबकि उनके मुताबिक इन बयानों में तेजस्वी के खिलाफ कुछ भी ठोस नहीं है।

अंत में उन्होंने कहा कि नौ वर्षों से चल रही इस जांच में सीबीआई के पास तेजस्वी के खिलाफ केवल इतना ही प्रमाण है कि उन्होंने वर्ष 2014 में 1,500 शेयर खरीदे थे।

“यदि आप उन्हें ‘अंतिम लाभार्थी’ बताना चाहते हैं, तो आपको इससे कहीं अधिक मजबूत साक्ष्य पेश करने होंगे,” उन्होंने जोड़ा।


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