भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर जयशंकर का मजबूत बयान: पुतिन की यात्रा से अमेरिका संग व्यापार वार्ता पर कोई असर नहीं

नई दिल्ली, 6 दिसंबर 2025 — विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने HT लीडरशिप समिट 2025 में स्पष्ट किया कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा को लेकर उठाई जा रहीं आशंकाएँ निराधार हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस दौरे का भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता पर किसी भी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
🇮🇳 स्वतंत्र विदेश नीति पर भारत का अडिग रुख
जयशंकर ने कहा कि भारत की विदेश नीति पूरी तरह से “रणनीतिक स्वायत्तता” पर आधारित है। उन्होंने इस धारणा को खारिज किया कि कोई भी देश भारत को यह बता सकता है कि उसे किससे संबंध रखने चाहिए और किससे नहीं।
उन्होंने स्पष्ट किया:
“भारत अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर दुनिया के हर प्रमुख देश से रिश्ते बनाता है। किसी बाहरी शक्ति की ओर से हमें दिशा देने की सोच वास्तविकता से परे है।”
यह बयान उन सवालों के बीच आया है, जिनमें पुतिन की यात्रा को भारत-अमेरिका संबंधों की कसौटी पर तौला जा रहा था।
🤝 अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता—भारत का संतुलित और सख्त रुख
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत की स्थिति बताते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत अपने किसानों, श्रमिकों, एमएसएमई और घरेलू उद्योगों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि:
- अमेरिका की नई प्रशासनिक शैली में बदलाव जरूर है,
- पर भारत अपने हितों से समझौता किए बिना एक व्यावहारिक समाधान की दिशा में बातचीत कर रहा है।
जयशंकर ने विश्वास जताया कि दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच एक ऐसा व्यापार ढांचा बन सकता है जो दोनों के लिए सकारात्मक और संतुलित होगा।
🗣️ संवाद के माध्यम से समाधान की ओर कदम
विदेश मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ मुद्दों पर मतभेद अवश्य हैं, लेकिन उन्होंने बताया कि भारत समस्या को टकराव के बजाय संवाद और सहयोग के रास्ते से हल करने में विश्वास रखता है।
“मौजूदा चुनौतियों के बावजूद, हम बातचीत जारी रखे हुए हैं। समाधान तभी निकलता है जब दोनों पक्ष एक-दूसरे की बात समझें और साझे हितों को प्राथमिकता दें।”
🔍 सार: आत्मविश्वासी और स्वतंत्र भारत की झलक
जयशंकर के यह बयान साफ दिखाते हैं कि भारत आज अपनी विदेश नीति में:
- स्वतंत्रता,
- संतुलन,
- और राष्ट्रीय हितों
को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।
रूस के साथ उच्च-स्तरीय संवाद हो या अमेरिका के साथ व्यापारिक चर्चा—भारत किसी दबाव में नहीं झुकता और अपने हितों के आधार पर ही कदम उठाता है।
भारत की यही आत्मनिर्भर और दृढ़ विदेश नीति आने वाले वर्षों में उसे वैश्विक शक्ति के रूप में और मजबूत बनाएगी।
