जनवरी 13, 2026

सूडान में नागरिकों पर हमले अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ: एंटोनियो गुटेरेस की कड़ी चेतावनी, तुरंत संघर्षविराम की मांग

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सूडान में लगातार बढ़ती हिंसा और आम नागरिकों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने वैश्विक स्तर पर गहरी चिंता पैदा कर दी है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने हालिया ड्रोन हमलों को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा है कि यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से तत्काल युद्धविराम लागू करने और राजनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की है।

नागरिकों पर हमले: मानवीय मूल्यों पर प्रहार

दक्षिण दारफुर के कटिला शहर में 8 दिसंबर 2025 को हुए ड्रोन हमले में कम से कम 30 निर्दोष लोगों की जान चली गई। मृतकों में महिलाओं और बच्चों की संख्या भी चिंताजनक बताई जा रही है। यह क्षेत्र न्याला से लगभग 150 किलोमीटर दूर स्थित है। इसी दौरान दक्षिण कोर्डोफान के कालोगी इलाके में भी कई ड्रोन हमले सामने आए, जिनमें एक बालवाड़ी और एक अस्पताल को नुकसान पहुंचा।

महासचिव गुटेरेस ने कहा कि स्कूलों, अस्पतालों और मानवीय ढांचे पर हमले किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आम नागरिकों और राहत कार्यों में लगे संगठनों को निशाना बनाना युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है।

RSF पर गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप

एक अंतरराष्ट्रीय संवाद में गुटेरेस ने सूडान में जारी संघर्ष को “नैतिक रूप से शर्मनाक” करार दिया। उन्होंने अर्धसैनिक संगठन रैपिड सपोर्ट फोर्सेस (RSF) पर गंभीर अत्याचारों के आरोप लगाए और कहा कि इनके कृत्य मानवता के विरुद्ध अपराध हो सकते हैं। उन्होंने ऐसे मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जांच की आवश्यकता पर जोर दिया।

संयुक्त राष्ट्र की स्पष्ट अपील

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने सभी युद्धरत गुटों से तुरंत हिंसा रोकने और स्थायी संघर्षविराम की दिशा में ठोस कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सूडान का भविष्य केवल सैन्य समाधान से तय नहीं हो सकता। देश में स्थायी शांति के लिए एक ऐसी राजनीतिक प्रक्रिया आवश्यक है जो पूरी तरह सूडानी नागरिकों के नेतृत्व में, समावेशी और पारदर्शी हो।

निष्कर्ष

सूडान में जारी रक्तपात और आम लोगों की पीड़ा अब अंतरराष्ट्रीय विवेक की परीक्षा बन चुकी है। एंटोनियो गुटेरेस की चेतावनी यह स्पष्ट करती है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो मानवीय संकट और गहरा सकता है। संघर्ष में शामिल पक्षों को यह समझना होगा कि नागरिकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान किसी भी राजनीतिक या सैन्य उद्देश्य से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।


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