वर्ष 1932 भारतीय इतिहास के उस महत्वपूर्ण कालखंड का प्रतीक है, जब देश स्वतंत्रता संग्राम के साथ-साथ सामाजिक और शैक्षिक जागरण के दौर से गुजर रहा था। इसी समय गोरखपुर की पावन धरती पर तत्कालीन गोरक्षपीठाधीश्वर, युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज ने “महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद” की स्थापना कर शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल की।
महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज केवल एक धार्मिक संत ही नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी समाज सुधारक और राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रबल...
