अखिलेश यादव का सरकार पर हमला, बोले- बंद किए गए 26 हजार प्राथमिक विद्यालय फिर खुलेंगे
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रदेश की मौजूदा सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने सरकारी संपत्तियों, शिक्षा व्यवस्था, भ्रष्टाचार, पुलिस की कार्यप्रणाली और सामाजिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा। अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश के संसाधनों और संस्थानों को जनता के हित में इस्तेमाल किया जाना चाहिए, न कि उन्हें खत्म या बेचने की दिशा में ले जाया जाना चाहिए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने खास तौर पर कन्नौज के दुग्ध संयंत्र और लखनऊ की ऐतिहासिक इमारतों से जुड़े मुद्दों को उठाया। उनका आरोप था कि सरकार प्रदेश की महत्वपूर्ण संपत्तियों को लेकर ऐसी नीतियां अपना रही है, जिनसे आम लोगों और आने वाली पीढ़ियों के हित प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन परिसंपत्तियों का निर्माण सार्वजनिक धन से हुआ, उनके संरक्षण और बेहतर उपयोग की जिम्मेदारी सरकार की होनी चाहिए।

सरकारी संपत्तियों को लेकर उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने कन्नौज के गाय के दूध संयंत्र का उदाहरण देते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालकों से जुड़े संस्थानों को मजबूत करने के बजाय यदि उन्हें कमजोर किया जाता है तो इसका सीधा असर किसानों और पशुपालकों पर पड़ता है।
उन्होंने लखनऊ की ऐतिहासिक इमारतों का भी उल्लेख किया। अखिलेश के मुताबिक ऐतिहासिक धरोहरें केवल ईंट-पत्थर की इमारतें नहीं होतीं, बल्कि वे प्रदेश की पहचान और इतिहास का हिस्सा होती हैं। ऐसे स्थानों के संरक्षण को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
हालांकि, इन मुद्दों पर सरकार का पक्ष अलग हो सकता है। इसलिए अखिलेश यादव द्वारा लगाए गए आरोपों को राजनीतिक आरोपों के रूप में देखा जाना चाहिए और संबंधित सरकारी पक्ष के स्पष्टीकरण को भी महत्व दिया जाना जरूरी है।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के रखरखाव पर सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे का मुद्दा भी सामने आया। अखिलेश यादव ने सड़क के रखरखाव को लेकर कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बड़े बुनियादी ढांचे के निर्माण के बाद उसका नियमित रखरखाव उतना ही जरूरी है जितना उसका निर्माण।
उनका कहना था कि जनता के पैसे से तैयार हुई परियोजनाओं में पारदर्शिता होनी चाहिए। यदि किसी परियोजना के रखरखाव में लापरवाही या आर्थिक अनियमितता का आरोप सामने आता है तो उसकी जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
26 हजार प्राथमिक विद्यालय खोलने का वादा
अखिलेश यादव ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में बंद किए गए लगभग 26 हजार प्राथमिक विद्यालयों को दोबारा खोलने की दिशा में काम किया जाएगा। उनका तर्क था कि प्राथमिक शिक्षा की पहुंच कमजोर होने से ग्रामीण और आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के बच्चों को सबसे अधिक नुकसान होता है।
उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं और PDA यानी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज से जुड़े परिवारों का उल्लेख किया। उनके अनुसार शिक्षा के अवसरों में कमी का प्रभाव उन समुदायों पर अधिक पड़ता है, जिनके लिए सरकारी विद्यालय शिक्षा का प्रमुख माध्यम हैं।
अखिलेश यादव ने कहा कि स्कूल केवल पढ़ाई की जगह नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक बदलाव की नींव भी तैयार करते हैं। इसलिए सरकारी विद्यालयों को बंद करने के बजाय उनमें शिक्षक, संसाधन और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मेरठ से जुड़े एक मामले को लेकर रहा। अखिलेश यादव ने डॉ. दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव का उल्लेख करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। दोनों व्यक्तियों की ओर से एक पुलिस अधिकारी पर कथित रूप से गंभीर दुर्व्यवहार और शारीरिक उत्पीड़न के आरोप लगाए जाने की बात सामने आई।
अखिलेश यादव ने इस मामले को कानून-व्यवस्था और पुलिस जवाबदेही से जोड़ते हुए सरकार से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। उनका कहना था कि पुलिस को नागरिकों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए। यदि किसी पुलिसकर्मी पर गंभीर आरोप लगते हैं तो मामले की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।
ऐसे मामलों में आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही तय होती है। इसलिए संबंधित व्यक्तियों के दावों के साथ-साथ पुलिस और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष भी महत्वपूर्ण है।
आबादी के आधार पर अधिकार और प्रतिनिधित्व की मांग
समाजवादी पार्टी प्रमुख ने सामाजिक प्रतिनिधित्व के सवाल को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि समाज के अलग-अलग वर्गों को उनकी जनसंख्या और सामाजिक स्थिति के अनुरूप अधिकार और प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
उन्होंने खंगार और अरगवंशी समाज सहित विभिन्न समुदायों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार की नीतियों में सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। अखिलेश यादव ने जातीय जनगणना को इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
उनका कहना था कि जब तक विभिन्न सामाजिक समूहों की वास्तविक स्थिति और जनसंख्या से संबंधित आंकड़े सामने नहीं आएंगे, तब तक संसाधनों और प्रतिनिधित्व का न्यायपूर्ण वितरण सुनिश्चित करना कठिन रहेगा।
जातीय जनगणना को लेकर संकेत
अखिलेश यादव ने कहा कि सत्ता में आने पर समाज के विभिन्न वर्गों की स्थिति को समझने के लिए जनगणना और सामाजिक आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा। उनका जोर इस बात पर रहा कि सरकारी योजनाओं और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में किसी भी समुदाय की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
समाजवादी पार्टी लंबे समय से सामाजिक न्याय और PDA की राजनीति को अपने राजनीतिक एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाती रही है। अखिलेश यादव का यह बयान उसी राजनीतिक रणनीति का विस्तार माना जा सकता है।
शिक्षा और सामाजिक न्याय को बताया प्राथमिकता
पूरे संबोधन में शिक्षा, सामाजिक प्रतिनिधित्व और सरकारी संस्थानों की भूमिका जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। अखिलेश यादव ने दावा किया कि समाज के कमजोर वर्गों को आगे बढ़ाने के लिए सरकारी स्कूल, सार्वजनिक संस्थान और कल्याणकारी योजनाएं मजबूत रहनी चाहिए।
उन्होंने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि विकास का वास्तविक अर्थ तभी है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उनके मुताबिक केवल बड़ी परियोजनाओं की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके रखरखाव, पारदर्शिता और आम नागरिकों को मिलने वाले लाभ की भी नियमित समीक्षा होनी चाहिए।
राजनीतिक संदेश के साथ समाप्त हुआ कार्यक्रम
प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद कार्यक्रम का माहौल राजनीतिक से सांस्कृतिक रंग में बदल गया। कार्यक्रम के अंतिम हिस्से में प्रतीक्षा ने प्रस्तुति दी। गीत के माध्यम से समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार के कार्यकाल को याद किया गया और पार्टी की वापसी का संदेश सामने रखा गया।
इस सांस्कृतिक प्रस्तुति ने पूरे कार्यक्रम को राजनीतिक संदेश के साथ भावनात्मक रूप भी दिया। मंच से उठाए गए मुद्दों में शिक्षा, सामाजिक न्याय, सरकारी संपत्तियों के संरक्षण, पुलिस जवाबदेही और प्रतिनिधित्व जैसे विषयों को प्रमुखता मिली।
कुल मिलाकर अखिलेश यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आए। उन्होंने मौजूदा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए अपनी पार्टी की प्राथमिकताओं का संकेत भी दिया। 26 हजार प्राथमिक विद्यालयों को फिर खोलने की बात, सामाजिक प्रतिनिधित्व के लिए जनगणना का समर्थन और पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही की मांग उनके संबोधन के प्रमुख बिंदु रहे।
आने वाले समय में इन मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। खासकर शिक्षा, जातीय प्रतिनिधित्व और सरकारी संपत्तियों से जुड़े सवाल उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।