उरई: अब घर बैठे जमा करें डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र, बुजुर्ग पेंशनरों को कोषागार जाने से मिलेगी राहत

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अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई, जालौन | विशेष समाचार

जनपद जालौन के बुजुर्ग, अस्वस्थ और शारीरिक रूप से कमजोर पेंशनरों के लिए राहत भरी खबर है। अब ऐसे पेंशनरों को जीवन प्रमाण पत्र जमा करने के लिए अनिवार्य रूप से कोषागार कार्यालय तक पहुंचने की परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। भारत सरकार की डिजिटल सुविधा के माध्यम से पेंशनर अपना डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र ऑनलाइन प्रस्तुत कर सकते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को सहूलियत प्रदान करना और सरकारी सेवाओं को अधिक सरल एवं सुलभ बनाना है।

इसी विषय को लेकर उरई स्थित कोषागार कार्यालय में वरिष्ठ कोषाधिकारी आनन्द कुमार सिंह की अध्यक्षता में जनपद के पेंशनरों तथा विभिन्न पेंशनर संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट यानी डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र की उपयोगिता, इसे प्रस्तुत करने की प्रक्रिया और अधिक उम्र अथवा अस्वस्थता के कारण कार्यालय तक नहीं पहुंच पाने वाले पेंशनरों को उपलब्ध ऑनलाइन सुविधा के बारे में विस्तार से चर्चा की गई।

बुजुर्ग पेंशनरों को अनावश्यक परेशानी से बचाने की पहल

सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए पेंशन उनके जीवनयापन का एक महत्वपूर्ण आर्थिक सहारा होती है। पेंशन संबंधी औपचारिकताओं को समय पर पूरा करना भी आवश्यक होता है। इनमें जीवन प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से पेंशनर के जीवित होने की पुष्टि की जाती है।

हालांकि, अधिक उम्र, बीमारी, चलने-फिरने में कठिनाई और अन्य शारीरिक समस्याओं के कारण कई वरिष्ठ नागरिकों के लिए कोषागार कार्यालय तक पहुंचना आसान नहीं होता। ऐसे में डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र की सुविधा उनके लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है।

बैठक के दौरान वरिष्ठ कोषाधिकारी आनन्द कुमार सिंह ने ऐसे पेंशनरों से ऑनलाइन माध्यम अपनाने की अपील की, जो अपनी उम्र या स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण कार्यालय आने में असमर्थ हैं। उन्होंने इस सुविधा की जानकारी अधिक से अधिक पात्र पेंशनरों तक पहुंचाने पर जोर दिया, ताकि जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिक इसका लाभ उठा सकें।

आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से मिलेगी सुविधा

डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के लिए पेंशनर भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट jeevanpramaan.gov.in का उपयोग कर सकते हैं। जीवन प्रमाण पोर्टल डिजिटल माध्यम से जीवन प्रमाण पत्र तैयार करने और प्रस्तुत करने की व्यवस्था उपलब्ध कराता है।

इस प्रक्रिया में निर्धारित डिजिटल प्रमाणीकरण की आवश्यकता होती है। इसके लिए पेंशनर की पहचान और आवश्यक विवरणों का सत्यापन किया जाता है। उपलब्ध सुविधा के अनुसार डिजिटल प्रमाण पत्र तैयार किया जा सकता है, जिससे संबंधित विभाग तक जीवन प्रमाण की जानकारी पहुंच सके।

पेंशनरों को यह ध्यान रखना चाहिए कि ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करने के लिए निर्धारित तकनीकी साधनों और प्रमाणीकरण की आवश्यकता हो सकती है। इसलिए प्रमाण पत्र जमा करने से पहले आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़ना उचित होगा।

यदि किसी पेंशनर को ऑनलाइन प्रक्रिया समझने में कठिनाई होती है, तो वह परिवार के किसी विश्वसनीय सदस्य या अधिकृत सहायता केंद्र की मदद ले सकता है। सहायता लेते समय अपनी व्यक्तिगत जानकारी और प्रमाणीकरण संबंधी विवरणों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

पेंशनर संगठनों से जागरूकता बढ़ाने की अपील

कोषागार कार्यालय में आयोजित बैठक का एक प्रमुख उद्देश्य डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी रहा। कई बुजुर्ग पेंशनरों को ऑनलाइन सेवाओं की पूरी जानकारी नहीं होती। इसके कारण सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद वे पारंपरिक प्रक्रिया पर निर्भर रहते हैं।

बैठक में पेंशनर संगठनों के प्रतिनिधियों से कहा गया कि वे अपने सदस्यों और अन्य सेवानिवृत्त कर्मचारियों को डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दें। विशेष रूप से उन पेंशनरों तक इस सुविधा का संदेश पहुंचाने की आवश्यकता बताई गई, जो बीमारी या अधिक आयु के कारण कोषागार कार्यालय तक नहीं पहुंच सकते।

यदि पेंशनर संगठनों के माध्यम से सही जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जाती है, तो वरिष्ठ नागरिकों को प्रक्रिया समझने में मदद मिल सकती है। इससे न केवल उनकी परेशानी कम होगी, बल्कि डिजिटल सरकारी सेवाओं के प्रति उनका भरोसा भी बढ़ेगा।

डिजिटल व्यवस्था से समय और मेहनत की बचत

डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे पेंशनरों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऑनलाइन माध्यम से अपना प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने का विकल्प मिलता है। विशेष रूप से उन लोगों के लिए यह सुविधा उपयोगी है, जिन्हें कार्यालय तक आने-जाने में अधिक समय और मेहनत लगती है।

बुजुर्गों को अक्सर यात्रा की व्यवस्था करने, किसी परिजन की सहायता लेने और लंबी दूरी तय करने जैसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। अस्वस्थ पेंशनरों के लिए यह चुनौती और भी बढ़ जाती है। ऐसे में डिजिटल विकल्प उपलब्ध होने से उनकी निर्भरता कम करने में सहायता मिल सकती है।

हालांकि, पेंशनरों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका जीवन प्रमाण पत्र संबंधित पेंशन वितरण व्यवस्था तक सफलतापूर्वक पहुंच गया है। केवल ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू कर देना पर्याप्त नहीं है। प्रमाण पत्र की स्थिति की पुष्टि करना और किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में संबंधित कार्यालय से संपर्क करना भी जरूरी है।

पेंशन से जुड़ी औपचारिकताओं को समय पर पूरा करना जरूरी

जीवन प्रमाण पत्र जमा करने के संबंध में पेंशनरों को संबंधित विभाग के निर्देशों और लागू समय-सीमा का पालन करना चाहिए। प्रत्येक पेंशनर को अपनी पेंशन व्यवस्था के अनुसार आवश्यक औपचारिकताओं की जानकारी रखनी चाहिए, ताकि प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने में देरी न हो।

यदि किसी पेंशनर को वेबसाइट पर जानकारी भरने, पहचान सत्यापन या प्रमाण पत्र की स्थिति जानने में परेशानी आती है, तो उसे आधिकारिक माध्यमों से सहायता प्राप्त करनी चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति को बैंक खाते का पासवर्ड, ओटीपी या अन्य गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

डिजिटल सुविधा का लाभ उठाते समय सतर्कता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी प्रक्रिया की जानकारी। आधिकारिक वेबसाइट और अधिकृत सहायता माध्यमों का इस्तेमाल करके पेंशनर धोखाधड़ी की आशंका को कम कर सकते हैं।

बैठक में पेंशनर संगठनों के प्रतिनिधि रहे मौजूद

इस बैठक में सेवानिवृत्त कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष हरगोविन्द दयाल श्रीवास्तव, गवर्नमेंट वेलफेयर कर्मचारी ऑर्गनाइजेशन के अध्यक्ष पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी और बेसिक शिक्षा के वरिष्ठ पेंशनर रामराजा द्विवेदी सहित अन्य संबंधित लोग उपस्थित रहे।

बैठक में डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र की प्रक्रिया पर बिंदुवार चर्चा की गई। साथ ही पेंशनर संगठनों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए इस सुविधा का संदेश व्यापक स्तर पर पहुंचाने पर जोर दिया गया।

वरिष्ठ कोषाधिकारी आनन्द कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक के माध्यम से बुजुर्ग और अस्वस्थ पेंशनरों को डिजिटल विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसका उद्देश्य यह है कि जिन लोगों के लिए कोषागार कार्यालय तक पहुंचना कठिन है, वे उपलब्ध ऑनलाइन सुविधा का उपयोग करके जीवन प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को आसान बना सकें।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है डिजिटल सुविधा

आज सरकारी सेवाओं में डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। जीवन प्रमाण पत्र जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में ऑनलाइन विकल्प उपलब्ध होना वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुविधाजनक है। इससे उन्हें अपनी परिस्थितियों के अनुसार प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने का विकल्प मिलता है।

जालौन कोषागार में हुई बैठक ने यह संदेश दिया कि पेंशन संबंधी सुविधाओं की जानकारी प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना जरूरी है। विशेष रूप से उन बुजुर्गों और अस्वस्थ पेंशनरों को जागरूक करना आवश्यक है, जिन्हें सामान्य प्रक्रियाओं को पूरा करने में अधिक कठिनाई होती है।

पेंशनरों को सलाह दी जाती है कि वे डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र से संबंधित जानकारी आधिकारिक वेबसाइट jeevanpramaan.gov.in पर प्राप्त करें और अपनी पेंशन व्यवस्था के अनुरूप आवश्यक प्रक्रिया पूरी करें। इससे उन्हें अनावश्यक भागदौड़ से बचने में मदद मिल सकती है और जीवन प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक बन सकती है।

निष्कर्ष: उरई स्थित कोषागार कार्यालय में आयोजित बैठक के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र की सुविधा के प्रति जागरूक करने की पहल की गई है। वरिष्ठ कोषाधिकारी आनन्द कुमार सिंह ने अस्वस्थ और अधिक आयु वाले पेंशनरों से ऑनलाइन विकल्प अपनाने की अपील की। यदि इस सुविधा की जानकारी जरूरतमंद पेंशनरों तक प्रभावी ढंग से पहुंचती है, तो उन्हें जीवन प्रमाण पत्र जमा करने के लिए होने वाली कठिनाइयों से राहत मिल सकती है।

स्थान: उरई, जनपद जालौन, उत्तर प्रदेश

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उरई: अब घर बैठे जमा करें डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र, बुजुर्ग पेंशनरों को कोषागार जाने से मिलेगी राहत

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 16, 2026

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई, जालौन | विशेष समाचार

जनपद जालौन के बुजुर्ग, अस्वस्थ और शारीरिक रूप से कमजोर पेंशनरों के लिए राहत भरी खबर है। अब ऐसे पेंशनरों को जीवन प्रमाण पत्र जमा करने के लिए अनिवार्य रूप से कोषागार कार्यालय तक पहुंचने की परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। भारत सरकार की डिजिटल सुविधा के माध्यम से पेंशनर अपना डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र ऑनलाइन प्रस्तुत कर सकते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को सहूलियत प्रदान करना और सरकारी सेवाओं को अधिक सरल एवं सुलभ बनाना है।

इसी विषय को लेकर उरई स्थित कोषागार कार्यालय में वरिष्ठ कोषाधिकारी आनन्द कुमार सिंह की अध्यक्षता में जनपद के पेंशनरों तथा विभिन्न पेंशनर संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट यानी डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र की उपयोगिता, इसे प्रस्तुत करने की प्रक्रिया और अधिक उम्र अथवा अस्वस्थता के कारण कार्यालय तक नहीं पहुंच पाने वाले पेंशनरों को उपलब्ध ऑनलाइन सुविधा के बारे में विस्तार से चर्चा की गई।

बुजुर्ग पेंशनरों को अनावश्यक परेशानी से बचाने की पहल

सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए पेंशन उनके जीवनयापन का एक महत्वपूर्ण आर्थिक सहारा होती है। पेंशन संबंधी औपचारिकताओं को समय पर पूरा करना भी आवश्यक होता है। इनमें जीवन प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से पेंशनर के जीवित होने की पुष्टि की जाती है।

हालांकि, अधिक उम्र, बीमारी, चलने-फिरने में कठिनाई और अन्य शारीरिक समस्याओं के कारण कई वरिष्ठ नागरिकों के लिए कोषागार कार्यालय तक पहुंचना आसान नहीं होता। ऐसे में डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र की सुविधा उनके लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है।

बैठक के दौरान वरिष्ठ कोषाधिकारी आनन्द कुमार सिंह ने ऐसे पेंशनरों से ऑनलाइन माध्यम अपनाने की अपील की, जो अपनी उम्र या स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण कार्यालय आने में असमर्थ हैं। उन्होंने इस सुविधा की जानकारी अधिक से अधिक पात्र पेंशनरों तक पहुंचाने पर जोर दिया, ताकि जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिक इसका लाभ उठा सकें।

आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से मिलेगी सुविधा

डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के लिए पेंशनर भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट jeevanpramaan.gov.in का उपयोग कर सकते हैं। जीवन प्रमाण पोर्टल डिजिटल माध्यम से जीवन प्रमाण पत्र तैयार करने और प्रस्तुत करने की व्यवस्था उपलब्ध कराता है।

इस प्रक्रिया में निर्धारित डिजिटल प्रमाणीकरण की आवश्यकता होती है। इसके लिए पेंशनर की पहचान और आवश्यक विवरणों का सत्यापन किया जाता है। उपलब्ध सुविधा के अनुसार डिजिटल प्रमाण पत्र तैयार किया जा सकता है, जिससे संबंधित विभाग तक जीवन प्रमाण की जानकारी पहुंच सके।

पेंशनरों को यह ध्यान रखना चाहिए कि ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करने के लिए निर्धारित तकनीकी साधनों और प्रमाणीकरण की आवश्यकता हो सकती है। इसलिए प्रमाण पत्र जमा करने से पहले आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़ना उचित होगा।

यदि किसी पेंशनर को ऑनलाइन प्रक्रिया समझने में कठिनाई होती है, तो वह परिवार के किसी विश्वसनीय सदस्य या अधिकृत सहायता केंद्र की मदद ले सकता है। सहायता लेते समय अपनी व्यक्तिगत जानकारी और प्रमाणीकरण संबंधी विवरणों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

पेंशनर संगठनों से जागरूकता बढ़ाने की अपील

कोषागार कार्यालय में आयोजित बैठक का एक प्रमुख उद्देश्य डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी रहा। कई बुजुर्ग पेंशनरों को ऑनलाइन सेवाओं की पूरी जानकारी नहीं होती। इसके कारण सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद वे पारंपरिक प्रक्रिया पर निर्भर रहते हैं।

बैठक में पेंशनर संगठनों के प्रतिनिधियों से कहा गया कि वे अपने सदस्यों और अन्य सेवानिवृत्त कर्मचारियों को डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दें। विशेष रूप से उन पेंशनरों तक इस सुविधा का संदेश पहुंचाने की आवश्यकता बताई गई, जो बीमारी या अधिक आयु के कारण कोषागार कार्यालय तक नहीं पहुंच सकते।

यदि पेंशनर संगठनों के माध्यम से सही जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जाती है, तो वरिष्ठ नागरिकों को प्रक्रिया समझने में मदद मिल सकती है। इससे न केवल उनकी परेशानी कम होगी, बल्कि डिजिटल सरकारी सेवाओं के प्रति उनका भरोसा भी बढ़ेगा।

डिजिटल व्यवस्था से समय और मेहनत की बचत

डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे पेंशनरों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऑनलाइन माध्यम से अपना प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने का विकल्प मिलता है। विशेष रूप से उन लोगों के लिए यह सुविधा उपयोगी है, जिन्हें कार्यालय तक आने-जाने में अधिक समय और मेहनत लगती है।

बुजुर्गों को अक्सर यात्रा की व्यवस्था करने, किसी परिजन की सहायता लेने और लंबी दूरी तय करने जैसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। अस्वस्थ पेंशनरों के लिए यह चुनौती और भी बढ़ जाती है। ऐसे में डिजिटल विकल्प उपलब्ध होने से उनकी निर्भरता कम करने में सहायता मिल सकती है।

हालांकि, पेंशनरों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका जीवन प्रमाण पत्र संबंधित पेंशन वितरण व्यवस्था तक सफलतापूर्वक पहुंच गया है। केवल ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू कर देना पर्याप्त नहीं है। प्रमाण पत्र की स्थिति की पुष्टि करना और किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में संबंधित कार्यालय से संपर्क करना भी जरूरी है।

पेंशन से जुड़ी औपचारिकताओं को समय पर पूरा करना जरूरी

जीवन प्रमाण पत्र जमा करने के संबंध में पेंशनरों को संबंधित विभाग के निर्देशों और लागू समय-सीमा का पालन करना चाहिए। प्रत्येक पेंशनर को अपनी पेंशन व्यवस्था के अनुसार आवश्यक औपचारिकताओं की जानकारी रखनी चाहिए, ताकि प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने में देरी न हो।

यदि किसी पेंशनर को वेबसाइट पर जानकारी भरने, पहचान सत्यापन या प्रमाण पत्र की स्थिति जानने में परेशानी आती है, तो उसे आधिकारिक माध्यमों से सहायता प्राप्त करनी चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति को बैंक खाते का पासवर्ड, ओटीपी या अन्य गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

डिजिटल सुविधा का लाभ उठाते समय सतर्कता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी प्रक्रिया की जानकारी। आधिकारिक वेबसाइट और अधिकृत सहायता माध्यमों का इस्तेमाल करके पेंशनर धोखाधड़ी की आशंका को कम कर सकते हैं।

बैठक में पेंशनर संगठनों के प्रतिनिधि रहे मौजूद

इस बैठक में सेवानिवृत्त कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष हरगोविन्द दयाल श्रीवास्तव, गवर्नमेंट वेलफेयर कर्मचारी ऑर्गनाइजेशन के अध्यक्ष पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी और बेसिक शिक्षा के वरिष्ठ पेंशनर रामराजा द्विवेदी सहित अन्य संबंधित लोग उपस्थित रहे।

बैठक में डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र की प्रक्रिया पर बिंदुवार चर्चा की गई। साथ ही पेंशनर संगठनों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए इस सुविधा का संदेश व्यापक स्तर पर पहुंचाने पर जोर दिया गया।

वरिष्ठ कोषाधिकारी आनन्द कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक के माध्यम से बुजुर्ग और अस्वस्थ पेंशनरों को डिजिटल विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसका उद्देश्य यह है कि जिन लोगों के लिए कोषागार कार्यालय तक पहुंचना कठिन है, वे उपलब्ध ऑनलाइन सुविधा का उपयोग करके जीवन प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को आसान बना सकें।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है डिजिटल सुविधा

आज सरकारी सेवाओं में डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। जीवन प्रमाण पत्र जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में ऑनलाइन विकल्प उपलब्ध होना वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुविधाजनक है। इससे उन्हें अपनी परिस्थितियों के अनुसार प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने का विकल्प मिलता है।

जालौन कोषागार में हुई बैठक ने यह संदेश दिया कि पेंशन संबंधी सुविधाओं की जानकारी प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना जरूरी है। विशेष रूप से उन बुजुर्गों और अस्वस्थ पेंशनरों को जागरूक करना आवश्यक है, जिन्हें सामान्य प्रक्रियाओं को पूरा करने में अधिक कठिनाई होती है।

पेंशनरों को सलाह दी जाती है कि वे डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र से संबंधित जानकारी आधिकारिक वेबसाइट jeevanpramaan.gov.in पर प्राप्त करें और अपनी पेंशन व्यवस्था के अनुरूप आवश्यक प्रक्रिया पूरी करें। इससे उन्हें अनावश्यक भागदौड़ से बचने में मदद मिल सकती है और जीवन प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक बन सकती है।

निष्कर्ष: उरई स्थित कोषागार कार्यालय में आयोजित बैठक के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र की सुविधा के प्रति जागरूक करने की पहल की गई है। वरिष्ठ कोषाधिकारी आनन्द कुमार सिंह ने अस्वस्थ और अधिक आयु वाले पेंशनरों से ऑनलाइन विकल्प अपनाने की अपील की। यदि इस सुविधा की जानकारी जरूरतमंद पेंशनरों तक प्रभावी ढंग से पहुंचती है, तो उन्हें जीवन प्रमाण पत्र जमा करने के लिए होने वाली कठिनाइयों से राहत मिल सकती है।

स्थान: उरई, जनपद जालौन, उत्तर प्रदेश