♻️ ₹23,731 करोड़ की ‘गोबरधन’ क्रांति: किसानों की बढ़ेगी आय, कचरे से बनेगी स्वच्छ ऊर्जा, आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी नई रफ्तार

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में ₹23,731 करोड़ की राष्ट्रीय चक्रीय जैव ऊर्जा योजना ‘गोबरधन’ (GOBARdhan) को मंजूरी दी है। यह योजना कृषि अवशेष, गोबर और जैविक अपशिष्ट को कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG), जैविक खाद और स्वच्छ ऊर्जा में बदलकर किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने तथा आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

भारत सरकार ने स्वच्छ ऊर्जा, किसानों की आय में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹23,731 करोड़ की राष्ट्रीय चक्रीय जैव ऊर्जा योजना ‘गोबरधन’ (GOBARdhan – Galvanizing Organic Bio-Agro Resources Dhan) को मंजूरी दे दी है। यह योजना वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू रहेगी और इसका उद्देश्य कृषि अवशेष, गोबर तथा अन्य जैविक अपशिष्ट को मूल्यवान संसाधनों में बदलना है।

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की समृद्धि और स्वच्छ ऊर्जा आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में एक दूरदर्शी निर्णय बताया। उनके अनुसार यह योजना न केवल जैविक कचरे के बेहतर प्रबंधन का रास्ता खोलेगी, बल्कि ग्रामीण भारत में रोजगार, निवेश और हरित विकास को भी नई गति देगी।

🌱 क्या है राष्ट्रीय चक्रीय जैव ऊर्जा योजना ‘गोबरधन’?

‘गोबरधन’ योजना का उद्देश्य गोबर, कृषि अवशेष, पशु अपशिष्ट और अन्य जैविक कचरे का वैज्ञानिक उपयोग कर कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG), जैविक खाद और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार करना है। इससे जैविक अपशिष्ट का निस्तारण भी होगा और उसे आर्थिक संपत्ति में बदला जा सकेगा।

यह योजना ‘वेस्ट टू वेल्थ’ (Waste to Wealth) की अवधारणा पर आधारित है, जिसमें बेकार समझे जाने वाले संसाधनों को आय और ऊर्जा के स्रोत में परिवर्तित किया जाता है।

🚜 किसानों के लिए कैसे बनेगी वरदान?

भारत में हर वर्ष बड़ी मात्रा में कृषि अवशेष और गोबर उपलब्ध होता है। इनका सही उपयोग न होने के कारण पर्यावरण प्रदूषण और आर्थिक नुकसान दोनों होते हैं।

गोबरधन योजना के माध्यम से किसान—

  • गोबर और कृषि अपशिष्ट बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे।
  • जैविक खाद का उत्पादन बढ़ने से खेती की लागत कम होगी।
  • पराली जलाने जैसी समस्याओं में कमी आएगी।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में नए रोजगार और उद्यम स्थापित होंगे।

इस प्रकार यह योजना किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ टिकाऊ कृषि को भी बढ़ावा देगी।

⚡ स्वच्छ ऊर्जा को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन

भारत लगातार हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है। गोबरधन योजना के तहत तैयार होने वाली कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) पेट्रोलियम आधारित ईंधनों का एक स्वच्छ विकल्प बनेगी।

इससे—

  • जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटेगी।
  • कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
  • पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी।
  • स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।

🌍 ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम

भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयातित ईंधनों से पूरा करता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर बायोगैस और जैव ऊर्जा का उत्पादन बढ़ने से ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ तो आने वाले वर्षों में भारत स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर सकता है।

🏭 ग्रामीण उद्योगों को मिलेगी नई ताकत

गोबरधन योजना के तहत देशभर में बायोगैस संयंत्र, जैविक खाद इकाइयां और अपशिष्ट प्रबंधन परियोजनाएं विकसित की जाएंगी।

इससे ग्रामीण क्षेत्रों में—

  • नए उद्योग स्थापित होंगे।
  • स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा।
  • महिला स्वयं सहायता समूहों को नए अवसर प्राप्त होंगे।
  • छोटे उद्यमियों को निवेश और व्यवसाय बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

🌾 जैविक खेती को मिलेगा बढ़ावा

रासायनिक उर्वरकों पर बढ़ती निर्भरता को कम करने के लिए जैविक खाद का उत्पादन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

गोबरधन योजना से तैयार होने वाली जैविक खाद—

  • मिट्टी की उर्वरता बढ़ाएगी।
  • कृषि उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार करेगी।
  • पर्यावरण के अनुकूल खेती को प्रोत्साहित करेगी।

♻️ ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की सोच को मिलेगा विस्तार

यह योजना केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि देश में संसाधनों के बेहतर उपयोग की नई सोच को भी बढ़ावा देती है।

जो जैविक अपशिष्ट पहले समस्या माना जाता था, वही अब आय, ऊर्जा और रोजगार का स्रोत बनेगा। इससे स्वच्छता और आर्थिक विकास दोनों को एक साथ बढ़ावा मिलेगा।

🇮🇳 आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मिलेगी मजबूती

सरकार का मानना है कि स्वदेशी संसाधनों से ऊर्जा उत्पादन बढ़ाकर भारत आयातित ईंधन पर अपनी निर्भरता कम कर सकता है।

यह योजना आत्मनिर्भर भारत, हरित विकास, स्वच्छ भारत मिशन और सतत विकास जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

📈 दीर्घकालिक आर्थिक लाभ

₹23,731 करोड़ के इस निवेश से आने वाले वर्षों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है। इससे ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और जैव ऊर्जा उद्योग का विस्तार होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना भारत को हरित अर्थव्यवस्था की दिशा में मजबूत आधार प्रदान कर सकती है।

📝 निष्कर्ष

₹23,731 करोड़ की राष्ट्रीय चक्रीय जैव ऊर्जा योजना ‘गोबरधन’ केवल एक सरकारी परियोजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत, किसानों, स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ने वाली परिवर्तनकारी पहल है। गोबर, कृषि अवशेष और जैविक कचरे को उपयोगी संसाधनों में बदलने की यह योजना किसानों की आय बढ़ाने, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने, आयातित ईंधन पर निर्भरता घटाने और ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की सोच को वास्तविकता में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। यदि इसका प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो आने वाले वर्षों में यह योजना भारत के हरित और आत्मनिर्भर भविष्य की मजबूत नींव बनेगी।

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