लो-वोल्टेज की समस्या को लेकर विद्युत विभाग के सामने अनिश्चितकालीन धरना, चौथे दिन भी नहीं निकला समाधान

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कमलेश कुमार बहराइच

रिपोर्टर हिट एंड हॉट न्यूज़

दिनांक 2 सितंबर 2026

मिहींपुरवा/बहराइच। मिहींपुरवा विकासखंड क्षेत्र में बिजली की खराब व्यवस्था और लंबे समय से बनी लो-वोल्टेज की समस्या को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। बिजली आपूर्ति में सुधार और लो-वोल्टेज की समस्या के स्थायी समाधान की मांग को लेकर क्षेत्र की करीब 85 ग्राम सभाओं से जुड़े ग्रामीण विद्युत विभाग के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं। बुधवार को आंदोलन का चौथा दिन रहा, लेकिन ग्रामीणों की प्रमुख मांगों पर अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।

धरने पर बैठे ग्रामीणों का कहना है कि मिहींपुरवा क्षेत्र में बिजली की समस्या कोई नई बात नहीं है। लंबे समय से कई गांवों में निर्धारित क्षमता के अनुरूप बिजली नहीं पहुंच पा रही है। वोल्टेज इतना कम रहता है कि पंखे, मोटर, घरेलू उपकरण और अन्य विद्युत उपकरण ठीक से काम नहीं कर पाते। गर्मी और उमस के मौसम में यह समस्या लोगों के लिए और अधिक परेशानी का कारण बन रही है।

बिजली संकट से रोजमर्रा का जीवन प्रभावित

ग्रामीणों के अनुसार लो-वोल्टेज की समस्या का असर केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं है। इसका सीधा प्रभाव खेती-किसानी पर भी पड़ रहा है। खेतों की सिंचाई के लिए विद्युत मोटरों का इस्तेमाल करने वाले किसानों को पर्याप्त वोल्टेज नहीं मिल पाने के कारण परेशानी उठानी पड़ रही है। कई बार मोटर चलाने में दिक्कत आती है, जिससे सिंचाई का काम प्रभावित होता है।

ग्रामीणों का कहना है कि बिजली की अनियमित आपूर्ति और लो-वोल्टेज के कारण बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। शाम और रात के समय पर्याप्त बिजली नहीं मिलने अथवा वोल्टेज कम रहने से विद्यार्थियों को पढ़ाई करने में कठिनाई होती है। वहीं, छोटे दुकानदारों और बिजली से जुड़े कारोबार करने वाले लोगों के काम पर भी इसका असर पड़ रहा है।

शिकायतों के बावजूद समाधान नहीं होने का आरोप

धरने में शामिल ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली की समस्या को लेकर विभागीय अधिकारियों तक कई बार शिकायत पहुंचाई गई। स्थानीय स्तर पर समस्या की जानकारी देने के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें लंबे समय से आश्वासन तो मिलते रहे, लेकिन बिजली व्यवस्था में स्थायी बदलाव दिखाई नहीं दिया।

ग्रामीणों के मुताबिक लगातार शिकायतों के बाद भी जब समस्या बनी रही तो सामूहिक रूप से आंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया गया। इसी क्रम में अलग-अलग ग्राम सभाओं के लोग एकजुट होकर विद्युत विभाग के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं।

करीब 85 ग्राम सभाओं के ग्रामीण आंदोलन में

इस आंदोलन की खास बात यह है कि इसमें बड़ी संख्या में गांवों के लोग अपनी समस्या को लेकर एक साथ सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि करीब 85 ग्राम सभाओं में बिजली की समस्या किसी न किसी रूप में लोगों को प्रभावित कर रही है। इसलिए उनका आंदोलन किसी एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र की बिजली व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर किया जा रहा है।

धरने में शामिल लोगों का कहना है कि क्षेत्र की आबादी की जरूरतों को देखते हुए बिजली व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है। केवल अस्थायी तौर पर लाइन या आपूर्ति में सुधार करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए विद्युत ढांचे की क्षमता बढ़ाने, आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा करने और लो-वोल्टेज की समस्या के मूल कारणों को दूर करने की जरूरत है।

विद्युत उपकेंद्र की मांग भी उठी

ग्रामीणों द्वारा क्षेत्र में बिजली व्यवस्था सुधारने के साथ-साथ विद्युत उपकेंद्र की मांग भी उठाई जा रही है। ग्रामीणों का तर्क है कि क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और बड़ी आबादी को देखते हुए बेहतर विद्युत आपूर्ति के लिए स्थानीय स्तर पर आवश्यक बुनियादी ढांचे का विकास किया जाना चाहिए।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि क्षेत्र में पर्याप्त क्षमता वाला विद्युत उपकेंद्र और मजबूत वितरण व्यवस्था उपलब्ध हो तो लो-वोल्टेज और आपूर्ति से जुड़ी कई समस्याओं को कम किया जा सकता है। इसके अलावा बिजली के लोड, ट्रांसफार्मरों की क्षमता और वितरण लाइनों की स्थिति की भी समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है।

चौथे दिन भी धरना जारी

बुधवार को आंदोलन का चौथा दिन होने के बावजूद ग्रामीण धरने से हटने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं और विभाग से समस्या के स्थायी समाधान की अपेक्षा रखते हैं।

ग्रामीणों के बीच इस बात को लेकर नाराजगी है कि कई दिनों तक धरना जारी रहने के बाद भी अभी तक ऐसा कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है, जिससे उन्हें यह भरोसा हो सके कि क्षेत्र की बिजली समस्या का जल्द समाधान होगा। आंदोलनकारियों का कहना है कि केवल आश्वासन देने के बजाय विभाग को स्पष्ट कार्ययोजना बनाकर जमीन पर काम शुरू करना चाहिए।

किसानों और आम उपभोक्ताओं की बढ़ी परेशानी

मिहींपुरवा क्षेत्र में बिजली की समस्या का प्रभाव अलग-अलग वर्गों पर अलग तरीके से दिखाई दे रहा है। किसानों के लिए जहां सिंचाई बड़ी चुनौती बनी हुई है, वहीं घरेलू उपभोक्ताओं को पंखे और अन्य उपकरण चलाने में परेशानी होती है। छोटे व्यवसायियों के सामने भी बिजली की अनियमितता के कारण काम प्रभावित होने की समस्या है।

ग्रामीणों का कहना है कि बिजली आज केवल घरेलू सुविधा नहीं, बल्कि शिक्षा, कृषि, व्यापार और रोजमर्रा के जीवन की बुनियादी आवश्यकता बन चुकी है। ऐसे में लगातार लो-वोल्टेज की स्थिति को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

प्रशासन और विभाग से हस्तक्षेप की उम्मीद

चौथे दिन भी धरना जारी रहने के बाद अब ग्रामीणों की नजर विद्युत विभाग के अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन पर है। ग्रामीण चाहते हैं कि संबंधित अधिकारी मौके की स्थिति को समझें और समस्या के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाएं।

आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर स्पष्ट और ठोस कार्रवाई होती है तो वे आंदोलन समाप्त करने पर विचार कर सकते हैं। लेकिन जब तक बिजली व्यवस्था में सुधार की दिशा में वास्तविक पहल नहीं होती, तब तक अनिश्चितकालीन धरना जारी रखने की बात कही जा रही है।

स्थायी समाधान की मांग पर अड़े ग्रामीण

ग्रामीणों की मुख्य मांग तत्काल राहत के साथ-साथ बिजली समस्या का स्थायी समाधान है। उनका कहना है कि बार-बार अस्थायी सुधार करने से समस्या दोबारा उत्पन्न हो जाती है। इसलिए विभाग को क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था का तकनीकी निरीक्षण कराकर आवश्यक क्षमता के अनुसार ट्रांसफार्मर, लाइन और अन्य संसाधनों को दुरुस्त करना चाहिए।

फिलहाल मिहींपुरवा में जारी यह धरना क्षेत्र की बिजली व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों की गंभीर नाराजगी को सामने ला रहा है। आंदोलन का चौथा दिन पूरा होने के बाद भी समाधान नहीं निकलने से स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है। अब देखना होगा कि विद्युत विभाग और प्रशासन ग्रामीणों की मांगों पर क्या कदम उठाते हैं और लंबे समय से चली आ रही लो-वोल्टेज की समस्या को दूर करने के लिए कब तक प्रभावी कार्रवाई शुरू होती है।

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य बिजली व्यवस्था को बेहतर बनवाना है और जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय कायम रहेगा।

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