नमामि गंगे योजना के कार्यों के बाद बदहाल पड़ीं सड़कें, मिर्जापुर जागीर और हनुमन्तपुरा के ग्रामीण परेशान

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अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

बरसात में कीचड़ और जलभराव से आवागमन प्रभावित, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में बढ़ रही मुश्किलें; ग्रामीणों ने प्रशासन से की मरम्मत की मांग

माधौगढ़, जालौन। जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत गांवों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन निर्माण कार्यों के बाद संबंधित स्थानों को पहले की स्थिति में बहाल नहीं किया जाना ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। जालौन जिले के रामपुरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत मिर्जापुर जागीर और हनुमन्तपुरा में नमामि

गंगे योजना के तहत पाइपलाइन संबंधी कार्यों के दौरान खोदी गई सीसी और इंटरलॉकिंग सड़कें मरम्मत के अभाव में बदहाल बताई जा रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि काम पूरा होने के बाद रास्तों को व्यवस्थित नहीं किया गया, जिसके कारण रोजाना आने-जाने वाले लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, सड़कें गांव के लोगों के दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन्हीं रास्तों से होकर बच्चे स्कूल जाते हैं, किसान अपने खेतों तक पहुंचते हैं और ग्रामीण आवश्यक कार्यों के लिए बाजार तथा स्वास्थ्य केंद्रों का रुख करते हैं। ऐसे में सड़कों की खराब स्थिति का असर केवल आवागमन पर ही नहीं, बल्कि गांव की सामान्य दिनचर्या पर भी पड़ रहा है।

खुदाई के बाद मरम्मत नहीं होने से बढ़ी परेशानी

ग्रामीणों का कहना है कि नमामि गंगे योजना के अंतर्गत कराए गए कार्यों के दौरान गांव की पक्की सड़कों को खोदा गया था। योजना से संबंधित कार्य पूरा होने के बाद भी क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत नहीं कराई गई। परिणामस्वरूप, सीसी और इंटरलॉकिंग मार्गों की स्थिति खराब बनी हुई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, लंबे समय से इस समस्या का सामना करने के बावजूद उन्हें अब तक स्थायी समाधान नहीं मिल सका है।

ग्रामीणों का सवाल है कि जब किसी विकास परियोजना के लिए पहले से बनी सड़क को खोदना आवश्यक हो, तो काम पूरा होने के बाद उसकी बहाली की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। सड़कें ठीक नहीं होने से विकास कार्यों का लाभ अधूरा रह जाता है और आम नागरिकों को अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ती है।

लोगों का कहना है कि संबंधित विभाग को निर्माण कार्यों की गुणवत्ता के साथ-साथ उसके बाद होने वाले बहाली कार्यों की भी निगरानी करनी चाहिए, ताकि ग्रामीणों को लंबे समय तक असुविधा का सामना न करना पड़े।

बारिश में कीचड़ और जलभराव से निकलना मुश्किल

बरसात के मौसम में क्षतिग्रस्त रास्तों की समस्या और गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों के मुताबिक, बारिश होने पर सड़कों के खराब हिस्सों में कीचड़ और पानी भरने से आवागमन कठिन हो जाता है। पैदल चलने वाले लोगों को संभलकर रास्ता पार करना पड़ता है, जबकि दोपहिया वाहन चालकों को भी दुर्घटना की आशंका के बीच सफर करना पड़ता है।

गांवों में पक्की सड़कों का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित और सुविधाजनक आवागमन उपलब्ध कराना होता है। लेकिन जब सड़क की खुदाई के बाद मरम्मत नहीं होती, तो सामान्य रास्ता भी परेशानी का कारण बन सकता है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और दैनिक मजदूरी के लिए बाहर जाने वाले लोगों को ऐसी परिस्थितियों में अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते खराब हिस्सों को ठीक नहीं कराया गया, तो बारिश के दौरान स्थिति और बिगड़ सकती है। इसलिए संबंधित विभाग को मामले का संज्ञान लेकर आवश्यक मरम्मत की व्यवस्था करनी चाहिए।

मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में हो सकती है देरी

खराब सड़कों का सबसे गंभीर प्रभाव आपातकालीन परिस्थितियों में सामने आ सकता है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव में किसी व्यक्ति की तबीयत अचानक बिगड़ने पर उसे अस्पताल पहुंचाना जरूरी होता है। ऐसी स्थिति में क्षतिग्रस्त और कीचड़युक्त रास्ते परेशानी बढ़ा सकते हैं। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि सड़क की खराब स्थिति के कारण एंबुलेंस को गांव तक पहुंचने में कठिनाई हो सकती है।

स्वास्थ्य सेवाओं तक समय पर पहुंचना प्रत्येक नागरिक की बुनियादी जरूरत है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए सुगम रास्तों का होना बेहद जरूरी है। यदि गांव से मुख्य सड़क तक पहुंचने में ही अधिक समय लग जाए, तो मरीज और उसके परिजनों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की मरम्मत को केवल निर्माण संबंधी काम मानकर नहीं देखा जाना चाहिए। यह लोगों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और दैनिक जरूरतों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। प्रशासन को इस समस्या को प्राथमिकता के आधार पर हल करने की जरूरत है।

विकास कार्यों के साथ जवाबदेही भी जरूरी

ग्रामीणों ने सड़क निर्माण और मरम्मत की व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि केंद्र और उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बावजूद बीहड़ क्षेत्र के गांवों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं। लोगों की अपेक्षा है कि सरकारी योजनाओं के माध्यम से कराए जाने वाले कार्यों का लाभ उन्हें व्यवस्थित और टिकाऊ सुविधाओं के रूप में मिलना चाहिए।

ग्रामीणों के मुताबिक, किसी योजना के अंतर्गत पाइपलाइन बिछाने या अन्य आवश्यक कार्यों के लिए सड़क खोदना तकनीकी जरूरत हो सकती है, लेकिन इसके बाद सड़क को दुरुस्त करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि खुदाई के बाद रास्ते को बहाल नहीं किया जाता, तो स्थानीय निवासियों को लंबे समय तक उसका खामियाजा भुगतना पड़ता है।

लोगों ने मांग की है कि संबंधित विभाग यह सुनिश्चित करे कि विकास परियोजनाओं के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की मरम्मत निर्धारित समय में पूरी हो। इसके साथ ही कार्य की गुणवत्ता की जांच और जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही तय करने की व्यवस्था भी होनी चाहिए।

जिला प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग

मिर्जापुर जागीर और हनुमन्तपुरा के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन तथा संबंधित विभाग से दोनों गांवों की क्षतिग्रस्त सड़कों का स्थलीय निरीक्षण कराने की मांग की है। ग्रामीण चाहते हैं कि अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का आकलन करे और मरम्मत के लिए आवश्यक कदम उठाए।

उनकी प्रमुख मांग है कि सीसी और इंटरलॉकिंग सड़कों के खराब हिस्सों को ठीक कराया जाए, जलभराव की समस्या दूर करने के लिए जरूरत के अनुसार व्यवस्था की जाए और आवागमन को पहले की तरह सुचारु बनाया जाए। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि मरम्मत का काम केवल अस्थायी तौर पर नहीं, बल्कि गुणवत्ता के साथ कराया जाना चाहिए, ताकि कुछ समय बाद वही समस्या दोबारा उत्पन्न न हो।

फिलहाल, ग्रामीणों की ओर से उठाई गई इस समस्या के समाधान के लिए संबंधित विभाग की कार्रवाई का इंतजार है। विभागीय निरीक्षण, मरम्मत की समयसीमा और कार्य की गुणवत्ता को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

ग्रामीणों की अपेक्षा है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र आवश्यक कदम उठाए, ताकि बरसात के दौरान आवागमन में हो रही परेशानी कम हो और जरूरत पड़ने पर मरीजों को समय से अस्पताल पहुंचाने में बाधा न आए।

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नमामि गंगे योजना के कार्यों के बाद बदहाल पड़ीं सड़कें, मिर्जापुर जागीर और हनुमन्तपुरा के ग्रामीण परेशान

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 10, 2026

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

बरसात में कीचड़ और जलभराव से आवागमन प्रभावित, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में बढ़ रही मुश्किलें; ग्रामीणों ने प्रशासन से की मरम्मत की मांग

माधौगढ़, जालौन। जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत गांवों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन निर्माण कार्यों के बाद संबंधित स्थानों को पहले की स्थिति में बहाल नहीं किया जाना ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। जालौन जिले के रामपुरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत मिर्जापुर जागीर और हनुमन्तपुरा में नमामि

गंगे योजना के तहत पाइपलाइन संबंधी कार्यों के दौरान खोदी गई सीसी और इंटरलॉकिंग सड़कें मरम्मत के अभाव में बदहाल बताई जा रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि काम पूरा होने के बाद रास्तों को व्यवस्थित नहीं किया गया, जिसके कारण रोजाना आने-जाने वाले लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, सड़कें गांव के लोगों के दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन्हीं रास्तों से होकर बच्चे स्कूल जाते हैं, किसान अपने खेतों तक पहुंचते हैं और ग्रामीण आवश्यक कार्यों के लिए बाजार तथा स्वास्थ्य केंद्रों का रुख करते हैं। ऐसे में सड़कों की खराब स्थिति का असर केवल आवागमन पर ही नहीं, बल्कि गांव की सामान्य दिनचर्या पर भी पड़ रहा है।

खुदाई के बाद मरम्मत नहीं होने से बढ़ी परेशानी

ग्रामीणों का कहना है कि नमामि गंगे योजना के अंतर्गत कराए गए कार्यों के दौरान गांव की पक्की सड़कों को खोदा गया था। योजना से संबंधित कार्य पूरा होने के बाद भी क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत नहीं कराई गई। परिणामस्वरूप, सीसी और इंटरलॉकिंग मार्गों की स्थिति खराब बनी हुई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, लंबे समय से इस समस्या का सामना करने के बावजूद उन्हें अब तक स्थायी समाधान नहीं मिल सका है।

ग्रामीणों का सवाल है कि जब किसी विकास परियोजना के लिए पहले से बनी सड़क को खोदना आवश्यक हो, तो काम पूरा होने के बाद उसकी बहाली की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। सड़कें ठीक नहीं होने से विकास कार्यों का लाभ अधूरा रह जाता है और आम नागरिकों को अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ती है।

लोगों का कहना है कि संबंधित विभाग को निर्माण कार्यों की गुणवत्ता के साथ-साथ उसके बाद होने वाले बहाली कार्यों की भी निगरानी करनी चाहिए, ताकि ग्रामीणों को लंबे समय तक असुविधा का सामना न करना पड़े।

बारिश में कीचड़ और जलभराव से निकलना मुश्किल

बरसात के मौसम में क्षतिग्रस्त रास्तों की समस्या और गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों के मुताबिक, बारिश होने पर सड़कों के खराब हिस्सों में कीचड़ और पानी भरने से आवागमन कठिन हो जाता है। पैदल चलने वाले लोगों को संभलकर रास्ता पार करना पड़ता है, जबकि दोपहिया वाहन चालकों को भी दुर्घटना की आशंका के बीच सफर करना पड़ता है।

गांवों में पक्की सड़कों का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित और सुविधाजनक आवागमन उपलब्ध कराना होता है। लेकिन जब सड़क की खुदाई के बाद मरम्मत नहीं होती, तो सामान्य रास्ता भी परेशानी का कारण बन सकता है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और दैनिक मजदूरी के लिए बाहर जाने वाले लोगों को ऐसी परिस्थितियों में अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते खराब हिस्सों को ठीक नहीं कराया गया, तो बारिश के दौरान स्थिति और बिगड़ सकती है। इसलिए संबंधित विभाग को मामले का संज्ञान लेकर आवश्यक मरम्मत की व्यवस्था करनी चाहिए।

मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में हो सकती है देरी

खराब सड़कों का सबसे गंभीर प्रभाव आपातकालीन परिस्थितियों में सामने आ सकता है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव में किसी व्यक्ति की तबीयत अचानक बिगड़ने पर उसे अस्पताल पहुंचाना जरूरी होता है। ऐसी स्थिति में क्षतिग्रस्त और कीचड़युक्त रास्ते परेशानी बढ़ा सकते हैं। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि सड़क की खराब स्थिति के कारण एंबुलेंस को गांव तक पहुंचने में कठिनाई हो सकती है।

स्वास्थ्य सेवाओं तक समय पर पहुंचना प्रत्येक नागरिक की बुनियादी जरूरत है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए सुगम रास्तों का होना बेहद जरूरी है। यदि गांव से मुख्य सड़क तक पहुंचने में ही अधिक समय लग जाए, तो मरीज और उसके परिजनों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की मरम्मत को केवल निर्माण संबंधी काम मानकर नहीं देखा जाना चाहिए। यह लोगों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और दैनिक जरूरतों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। प्रशासन को इस समस्या को प्राथमिकता के आधार पर हल करने की जरूरत है।

विकास कार्यों के साथ जवाबदेही भी जरूरी

ग्रामीणों ने सड़क निर्माण और मरम्मत की व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि केंद्र और उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बावजूद बीहड़ क्षेत्र के गांवों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं। लोगों की अपेक्षा है कि सरकारी योजनाओं के माध्यम से कराए जाने वाले कार्यों का लाभ उन्हें व्यवस्थित और टिकाऊ सुविधाओं के रूप में मिलना चाहिए।

ग्रामीणों के मुताबिक, किसी योजना के अंतर्गत पाइपलाइन बिछाने या अन्य आवश्यक कार्यों के लिए सड़क खोदना तकनीकी जरूरत हो सकती है, लेकिन इसके बाद सड़क को दुरुस्त करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि खुदाई के बाद रास्ते को बहाल नहीं किया जाता, तो स्थानीय निवासियों को लंबे समय तक उसका खामियाजा भुगतना पड़ता है।

लोगों ने मांग की है कि संबंधित विभाग यह सुनिश्चित करे कि विकास परियोजनाओं के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की मरम्मत निर्धारित समय में पूरी हो। इसके साथ ही कार्य की गुणवत्ता की जांच और जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही तय करने की व्यवस्था भी होनी चाहिए।

जिला प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग

मिर्जापुर जागीर और हनुमन्तपुरा के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन तथा संबंधित विभाग से दोनों गांवों की क्षतिग्रस्त सड़कों का स्थलीय निरीक्षण कराने की मांग की है। ग्रामीण चाहते हैं कि अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का आकलन करे और मरम्मत के लिए आवश्यक कदम उठाए।

उनकी प्रमुख मांग है कि सीसी और इंटरलॉकिंग सड़कों के खराब हिस्सों को ठीक कराया जाए, जलभराव की समस्या दूर करने के लिए जरूरत के अनुसार व्यवस्था की जाए और आवागमन को पहले की तरह सुचारु बनाया जाए। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि मरम्मत का काम केवल अस्थायी तौर पर नहीं, बल्कि गुणवत्ता के साथ कराया जाना चाहिए, ताकि कुछ समय बाद वही समस्या दोबारा उत्पन्न न हो।

फिलहाल, ग्रामीणों की ओर से उठाई गई इस समस्या के समाधान के लिए संबंधित विभाग की कार्रवाई का इंतजार है। विभागीय निरीक्षण, मरम्मत की समयसीमा और कार्य की गुणवत्ता को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

ग्रामीणों की अपेक्षा है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र आवश्यक कदम उठाए, ताकि बरसात के दौरान आवागमन में हो रही परेशानी कम हो और जरूरत पड़ने पर मरीजों को समय से अस्पताल पहुंचाने में बाधा न आए।