उरई में आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी ने मनाया कांशीराम साहब का परिनिर्वाण दिवस, सामाजिक न्याय और बहुजन एकता का लिया संकल्प

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अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई (जालौन), 10 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के उरई में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) और भीम आर्मी के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने मान्यवर कांशीराम साहब के परिनिर्वाण दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। जालौन रोड पर आईटीआई बंबा के समीप स्थित जिला कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कांशीराम के सामाजिक विचारों, बहुजन समाज के अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी के लिए किए गए उनके प्रयासों को याद किया। कार्यक्रम में सामाजिक समानता, संगठन की मजबूती और वंचित वर्गों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के जिलाध्यक्ष नीरज गौतम ने की। इस अवसर पर पार्टी और भीम आर्मी से जुड़े पदाधिकारी, कार्यकर्ता तथा समर्थक मौजूद रहे। सभी ने कांशीराम साहब के विचारों को समाज के बीच पहुंचाने और उनके बताए रास्ते पर आगे बढ़ने की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।

कांशीराम के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि मान्यवर कांशीराम ने अपना जीवन सामाजिक असमानता को दूर करने, बहुजन समाज को संगठित करने और उसे राजनीतिक रूप से जागरूक बनाने के उद्देश्य से समर्पित किया। उन्होंने समाज के उन वर्गों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया, जो लंबे समय तक सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था में पर्याप्त प्रतिनिधित्व से वंचित रहे।

वक्ताओं के अनुसार, कांशीराम का मानना था कि समाज के कमजोर और वंचित तबकों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए। शिक्षा, संगठन और राजनीतिक भागीदारी के माध्यम से वे अपनी स्थिति में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। उनके विचारों ने बहुजन समाज के भीतर अपने अधिकारों, सम्मान और प्रतिनिधित्व को लेकर नई चेतना पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब सभी लोगों को समान अवसर मिलें और किसी व्यक्ति के साथ जाति, सामाजिक पृष्ठभूमि या आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव न किया जाए। वक्ताओं ने सामाजिक समरसता को मजबूत बनाने और संविधान में दिए गए समानता के मूल्यों को व्यवहार में अपनाने की अपील की।

बहुजन समाज की एकजुटता को बताया जरूरी

परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर आयोजित सभा में बहुजन समाज की एकजुटता का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आपसी सहयोग, संवाद और संगठन की भावना मजबूत होना आवश्यक है। जब लोग अपने साझा अधिकारों और जिम्मेदारियों को समझते हैं, तब सामाजिक समस्याओं के समाधान की दिशा में सामूहिक प्रयास किए जा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि कांशीराम साहब के विचार केवल किसी एक कार्यक्रम या विशेष दिन तक सीमित नहीं रहने चाहिए। उनके संदेश को दैनिक जीवन में अपनाना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए युवाओं को सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने, शिक्षा को महत्व देने तथा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के प्रति जागरूक रहने की जरूरत है।

सभा में मौजूद कार्यकर्ताओं से अपील की गई कि वे समाज में व्याप्त भेदभाव को समाप्त करने और समान अधिकारों की भावना को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं। वक्ताओं ने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए केवल विचार व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन विचारों के अनुरूप व्यवहार और प्रयास भी जरूरी हैं।

सामाजिक न्याय और समान अधिकारों पर चर्चा

कार्यक्रम के दौरान सामाजिक न्याय की अवधारणा पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक न्याय का उद्देश्य समाज के प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर उपलब्ध कराना है। इसके लिए शिक्षा, रोजगार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सार्वजनिक संस्थाओं में समान अवसरों की उपलब्धता महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है कि समाज के सभी वर्ग अपनी आवाज लोकतांत्रिक तरीके से उठाएं और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक रहें। कांशीराम साहब ने बहुजन समाज को संगठित करने के लिए जो प्रयास किए, उनसे आज भी सामाजिक और राजनीतिक चेतना के क्षेत्र में प्रेरणा ली जा सकती है।

वक्ताओं ने युवाओं से विशेष रूप से आग्रह किया कि वे अपने इतिहास, सामाजिक आंदोलनों और संविधान के मूल सिद्धांतों को समझें। जागरूक युवा समाज में व्याप्त असमानताओं को पहचानने और उनके समाधान के लिए रचनात्मक भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आपसी सम्मान, भाईचारा और सहयोग किसी भी मजबूत समाज की आधारशिला होते हैं।

कांशीराम साहब के संघर्ष को किया याद

मान्यवर कांशीराम भारतीय राजनीति और सामाजिक आंदोलनों के प्रमुख व्यक्तित्वों में शामिल रहे। उन्होंने बहुजन समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक अधिकारों के मुद्दों को व्यापक स्तर पर उठाया। उनका प्रयास रहा कि वंचित समुदाय अपने अधिकारों को समझें, संगठित हों और लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करें।

उरई में आयोजित कार्यक्रम में उनके इसी योगदान को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक बदलाव की प्रक्रिया निरंतर चलने वाली यात्रा है। इसके लिए जागरूकता, संगठन और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कांशीराम के विचारों को समझना और उन्हें वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों से जोड़कर देखना आज भी प्रासंगिक है।

कार्यकर्ताओं ने सामाजिक समानता, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक रूप से प्रयास जारी रखने की बात कही। कार्यक्रम का उद्देश्य कांशीराम साहब के योगदान को याद करने के साथ-साथ उनके विचारों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी रहा।

बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता रहे मौजूद

कार्यक्रम में भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष उपेंद्र सिंह, जिला मीडिया प्रभारी एडवोकेट आकाश गौतम, झांसी मंडल प्रभारी सदस्यता रविंद्र चौधरी, अखंड प्रताप सिंह, कुलदीप कुलकर्णी, सुरजीत सिंह कुशवाहा, ब्रजेन्द्र सिंह जाटव, मोहम्मद जाबिर मंसूरी, कृष्णानंद मकरंदपुरा, दीपक चौधरी और सुनील कुशवाहा बरहा उपस्थित रहे।

इसके अलावा डॉ. सुनील कुमार श्रीवास, आलोक बंटी, किरन चौधरी, मलखान सिंह, हनुमत सिंह गुर्जर, जागेश्वर दयाल बाथम, रामबरन गौतम, रज्जो दीदी, नरेंद्र कुमार सिंह, समरथ सिंह, लोकेन्द्र सिंह पाल, अनिल चौधरी, अभिषेक राठौर, रविशंकर आजाद, सोनू चौधरी, कौशलेन्द्र भारती, सुनील हुकूमपुरा और भीम प्रकाश गौतम सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।

उपस्थित लोगों ने कांशीराम साहब के सामाजिक योगदान को याद करते हुए बहुजन समाज में जागरूकता, एकता और समान अधिकारों की भावना को मजबूत करने पर बल दिया।

विचारों को व्यवहार में उतारने का संदेश

उरई में आयोजित परिनिर्वाण दिवस कार्यक्रम के माध्यम से सामाजिक समानता, बहुजन एकजुटता और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि महापुरुषों को सच्ची श्रद्धांजलि उनके विचारों को समझने और समाजहित में उन्हें अपनाने से मिलती है।

कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि जातिगत भेदभाव से मुक्त, समान अवसरों वाला और न्यायपूर्ण समाज बनाने के लिए प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। कांशीराम साहब के विचारों को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा, संगठन, लोकतांत्रिक भागीदारी और आपसी भाईचारे को मजबूत करना जरूरी है।

इस प्रकार उरई में आयोजित यह कार्यक्रम कांशीराम साहब के संघर्ष और सामाजिक योगदान को याद करने के साथ बहुजन समाज की एकजुटता तथा सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त करने का अवसर बना।

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उरई में आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी ने मनाया कांशीराम साहब का परिनिर्वाण दिवस, सामाजिक न्याय और बहुजन एकता का लिया संकल्प

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 10, 2026

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई (जालौन), 10 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के उरई में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) और भीम आर्मी के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने मान्यवर कांशीराम साहब के परिनिर्वाण दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। जालौन रोड पर आईटीआई बंबा के समीप स्थित जिला कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कांशीराम के सामाजिक विचारों, बहुजन समाज के अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी के लिए किए गए उनके प्रयासों को याद किया। कार्यक्रम में सामाजिक समानता, संगठन की मजबूती और वंचित वर्गों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के जिलाध्यक्ष नीरज गौतम ने की। इस अवसर पर पार्टी और भीम आर्मी से जुड़े पदाधिकारी, कार्यकर्ता तथा समर्थक मौजूद रहे। सभी ने कांशीराम साहब के विचारों को समाज के बीच पहुंचाने और उनके बताए रास्ते पर आगे बढ़ने की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।

कांशीराम के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि मान्यवर कांशीराम ने अपना जीवन सामाजिक असमानता को दूर करने, बहुजन समाज को संगठित करने और उसे राजनीतिक रूप से जागरूक बनाने के उद्देश्य से समर्पित किया। उन्होंने समाज के उन वर्गों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया, जो लंबे समय तक सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था में पर्याप्त प्रतिनिधित्व से वंचित रहे।

वक्ताओं के अनुसार, कांशीराम का मानना था कि समाज के कमजोर और वंचित तबकों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए। शिक्षा, संगठन और राजनीतिक भागीदारी के माध्यम से वे अपनी स्थिति में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। उनके विचारों ने बहुजन समाज के भीतर अपने अधिकारों, सम्मान और प्रतिनिधित्व को लेकर नई चेतना पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब सभी लोगों को समान अवसर मिलें और किसी व्यक्ति के साथ जाति, सामाजिक पृष्ठभूमि या आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव न किया जाए। वक्ताओं ने सामाजिक समरसता को मजबूत बनाने और संविधान में दिए गए समानता के मूल्यों को व्यवहार में अपनाने की अपील की।

बहुजन समाज की एकजुटता को बताया जरूरी

परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर आयोजित सभा में बहुजन समाज की एकजुटता का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आपसी सहयोग, संवाद और संगठन की भावना मजबूत होना आवश्यक है। जब लोग अपने साझा अधिकारों और जिम्मेदारियों को समझते हैं, तब सामाजिक समस्याओं के समाधान की दिशा में सामूहिक प्रयास किए जा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि कांशीराम साहब के विचार केवल किसी एक कार्यक्रम या विशेष दिन तक सीमित नहीं रहने चाहिए। उनके संदेश को दैनिक जीवन में अपनाना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए युवाओं को सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने, शिक्षा को महत्व देने तथा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के प्रति जागरूक रहने की जरूरत है।

सभा में मौजूद कार्यकर्ताओं से अपील की गई कि वे समाज में व्याप्त भेदभाव को समाप्त करने और समान अधिकारों की भावना को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं। वक्ताओं ने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए केवल विचार व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन विचारों के अनुरूप व्यवहार और प्रयास भी जरूरी हैं।

सामाजिक न्याय और समान अधिकारों पर चर्चा

कार्यक्रम के दौरान सामाजिक न्याय की अवधारणा पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक न्याय का उद्देश्य समाज के प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर उपलब्ध कराना है। इसके लिए शिक्षा, रोजगार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सार्वजनिक संस्थाओं में समान अवसरों की उपलब्धता महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है कि समाज के सभी वर्ग अपनी आवाज लोकतांत्रिक तरीके से उठाएं और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक रहें। कांशीराम साहब ने बहुजन समाज को संगठित करने के लिए जो प्रयास किए, उनसे आज भी सामाजिक और राजनीतिक चेतना के क्षेत्र में प्रेरणा ली जा सकती है।

वक्ताओं ने युवाओं से विशेष रूप से आग्रह किया कि वे अपने इतिहास, सामाजिक आंदोलनों और संविधान के मूल सिद्धांतों को समझें। जागरूक युवा समाज में व्याप्त असमानताओं को पहचानने और उनके समाधान के लिए रचनात्मक भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आपसी सम्मान, भाईचारा और सहयोग किसी भी मजबूत समाज की आधारशिला होते हैं।

कांशीराम साहब के संघर्ष को किया याद

मान्यवर कांशीराम भारतीय राजनीति और सामाजिक आंदोलनों के प्रमुख व्यक्तित्वों में शामिल रहे। उन्होंने बहुजन समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक अधिकारों के मुद्दों को व्यापक स्तर पर उठाया। उनका प्रयास रहा कि वंचित समुदाय अपने अधिकारों को समझें, संगठित हों और लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करें।

उरई में आयोजित कार्यक्रम में उनके इसी योगदान को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक बदलाव की प्रक्रिया निरंतर चलने वाली यात्रा है। इसके लिए जागरूकता, संगठन और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कांशीराम के विचारों को समझना और उन्हें वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों से जोड़कर देखना आज भी प्रासंगिक है।

कार्यकर्ताओं ने सामाजिक समानता, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक रूप से प्रयास जारी रखने की बात कही। कार्यक्रम का उद्देश्य कांशीराम साहब के योगदान को याद करने के साथ-साथ उनके विचारों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी रहा।

बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता रहे मौजूद

कार्यक्रम में भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष उपेंद्र सिंह, जिला मीडिया प्रभारी एडवोकेट आकाश गौतम, झांसी मंडल प्रभारी सदस्यता रविंद्र चौधरी, अखंड प्रताप सिंह, कुलदीप कुलकर्णी, सुरजीत सिंह कुशवाहा, ब्रजेन्द्र सिंह जाटव, मोहम्मद जाबिर मंसूरी, कृष्णानंद मकरंदपुरा, दीपक चौधरी और सुनील कुशवाहा बरहा उपस्थित रहे।

इसके अलावा डॉ. सुनील कुमार श्रीवास, आलोक बंटी, किरन चौधरी, मलखान सिंह, हनुमत सिंह गुर्जर, जागेश्वर दयाल बाथम, रामबरन गौतम, रज्जो दीदी, नरेंद्र कुमार सिंह, समरथ सिंह, लोकेन्द्र सिंह पाल, अनिल चौधरी, अभिषेक राठौर, रविशंकर आजाद, सोनू चौधरी, कौशलेन्द्र भारती, सुनील हुकूमपुरा और भीम प्रकाश गौतम सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।

उपस्थित लोगों ने कांशीराम साहब के सामाजिक योगदान को याद करते हुए बहुजन समाज में जागरूकता, एकता और समान अधिकारों की भावना को मजबूत करने पर बल दिया।

विचारों को व्यवहार में उतारने का संदेश

उरई में आयोजित परिनिर्वाण दिवस कार्यक्रम के माध्यम से सामाजिक समानता, बहुजन एकजुटता और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि महापुरुषों को सच्ची श्रद्धांजलि उनके विचारों को समझने और समाजहित में उन्हें अपनाने से मिलती है।

कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि जातिगत भेदभाव से मुक्त, समान अवसरों वाला और न्यायपूर्ण समाज बनाने के लिए प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। कांशीराम साहब के विचारों को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा, संगठन, लोकतांत्रिक भागीदारी और आपसी भाईचारे को मजबूत करना जरूरी है।

इस प्रकार उरई में आयोजित यह कार्यक्रम कांशीराम साहब के संघर्ष और सामाजिक योगदान को याद करने के साथ बहुजन समाज की एकजुटता तथा सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त करने का अवसर बना।