ऑपरेशन कन्विक्शन का असर: बिल्हौर के पुराने मामले में चार अभियुक्त दोषी, कोर्ट ने सुनाया सश्रम कारावास
अमरेश त्रिपाठी
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात
कानपुर नगर। उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा अपराधियों को न्यायालय से सजा दिलाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत कानपुर कमिश्नरेट पुलिस को एक पुराने आपराधिक मामले में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। पुलिस की गुणवत्तापूर्ण विवेचना, साक्ष्यों के व्यवस्थित संकलन और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप बिल्हौर थाना क्षेत्र से जुड़े वर्ष 2012 के एक मामले में चार अभियुक्तों को न्यायालय ने दोषी ठहराते हुए सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई पुलिस कमिश्नरेट कानपुर नगर के निर्देशन तथा पुलिस उपायुक्त पश्चिम श्री एस.एम. कासिम आबिदी के निकट पर्यवेक्षण में की गई प्रभावी पैरवी का परिणाम है। लंबे समय से लंबित इस मामले में पुलिस और अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष उपलब्ध साक्ष्यों एवं प्रकरण से संबंधित तथ्यों को मजबूती से प्रस्तुत किया।
वर्ष 2012 में दर्ज हुआ था मामला
यह प्रकरण थाना बिल्हौर में दर्ज मु0अ0सं0 278/2012 से संबंधित है। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 308, 323 और 504 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। अभियोजन के अनुसार विवाद के दौरान आरोपितों द्वारा गाली-गलौज और मारपीट किए जाने की बात सामने आई थी। घटना में डंडों से हमला कर चोट पहुंचाने का आरोप भी लगाया गया था।
मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने अपनी विवेचना आगे बढ़ाई और उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। इसके बाद प्रकरण न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ता रहा। लंबे समय बाद हुई सुनवाई में प्रभावी अभियोजन पैरवी के चलते न्यायालय ने चारों अभियुक्तों को संबंधित धाराओं में दोषी पाया।
चार अभियुक्तों को न्यायालय ने ठहराया दोषी
न्यायालय के समक्ष चली सुनवाई के बाद चार अभियुक्तों को दोषसिद्ध किया गया। पुलिस के मुताबिक दोषी पाए गए अभियुक्तों के नाम इस प्रकार हैं—
- दिनेश कुमार बउआ, पुत्र गोकरन लाल
- सुधीर कुमार, पुत्र गोकरन लाल
- राकेश कुमार, पुत्र छेदीलाल
- राहुल, पुत्र राकेश
चारों अभियुक्त ग्राम बिरिहना, थाना बिल्हौर, कानपुर नगर के निवासी बताए गए हैं।
अभियोजन पक्ष की ओर से मामले में रखे गए तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने अभियुक्तों को विभिन्न धाराओं में दोषी माना। इसके बाद प्रत्येक संबंधित धारा के तहत अलग-अलग सजा और अर्थदंड निर्धारित किया गया।
धारा 308 में चार वर्ष का सश्रम कारावास
न्यायालय द्वारा भारतीय दंड संहिता की धारा 308 के तहत चारों अभियुक्तों को चार-चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। इसके साथ ही प्रत्येक अभियुक्त पर 3,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
धारा 308 गंभीर परिस्थितियों में ऐसे कृत्य से संबंधित रही है, जिसमें किसी व्यक्ति की जान को खतरा पैदा होने की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इस मामले में न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि के बाद संबंधित प्रावधान के तहत कारावास की सजा निर्धारित की गई।
मारपीट और गाली-गलौज की धाराओं में भी सजा
न्यायालय ने धारा 323 के तहत भी चारों अभियुक्तों को दोषी ठहराया। इस धारा में प्रत्येक को एक-एक वर्ष के सश्रम कारावास तथा 1,000-1,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
इसी प्रकार धारा 504 के तहत भी प्रत्येक अभियुक्त को एक वर्ष के सश्रम कारावास और 1,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है।
इस तरह न्यायालय के आदेश में अलग-अलग धाराओं के तहत कारावास और अर्थदंड का प्रावधान किया गया है। पुलिस के अनुसार अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने की स्थिति में अभियुक्तों को अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
अर्थदंड नहीं देने पर अतिरिक्त सजा
न्यायालय के आदेश के मुताबिक यदि अभियुक्त निर्धारित अर्थदंड का भुगतान नहीं करते हैं तो उन्हें एक माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। इस प्रावधान का उद्देश्य न्यायालय द्वारा लगाए गए अर्थदंड की अनुपालना सुनिश्चित करना है।
पुलिस ने बताया कि मामले में न्यायालय की प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष ने प्रकरण से जुड़े तथ्यों को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया। इसी के चलते पुराने मामले में दोषसिद्धि संभव हो सकी।
ऑपरेशन कन्विक्शन का उद्देश्य
उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन का मुख्य उद्देश्य ऐसे आपराधिक मामलों में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करना है, जिनमें पुलिस द्वारा विवेचना पूरी कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया जा चुका है। इस अभियान के अंतर्गत पुलिस और अभियोजन के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया जाता है, ताकि मुकदमों की सुनवाई के दौरान आवश्यक दस्तावेज, साक्ष्य और अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों को व्यवस्थित रूप से न्यायालय के समक्ष रखा जा सके।
कानपुर पुलिस द्वारा भी इस अभियान के तहत विभिन्न मामलों की समीक्षा और न्यायालयों में लंबित प्रकरणों में प्रभावी पैरवी पर जोर दिया जा रहा है। पुलिस का उद्देश्य दोष सिद्ध होने योग्य मामलों में कानून के अनुसार अपराधियों को दंड दिलाने की प्रक्रिया को मजबूत करना है।
पैरवी टीम की रही अहम भूमिका
इस मामले में अभियोजन और पुलिस की ओर से पैरवी से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। पुलिस द्वारा उपलब्ध जानकारी के अनुसार मामले की पैरवी में एडीजीसी श्री संतोष कुमार, कोर्ट मोहर्रिर हेड कांस्टेबल गोविन्द तथा पैरोकार कांस्टेबल सुनील कुमार शामिल रहे।
इनके द्वारा न्यायालयीन प्रक्रिया के दौरान प्रकरण से संबंधित आवश्यक कार्रवाई और पैरवी को आगे बढ़ाया गया। पुलिस के अनुसार प्रभावी समन्वय और निरंतर पैरवी के चलते मामले में न्यायालय से दोषसिद्धि हासिल हुई।
पुराने मामलों में सजा दिलाने पर जोर
पुलिस विभाग की ओर से लगातार इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि गंभीर एवं लंबित आपराधिक मामलों में अभियोजन की प्रक्रिया कमजोर न पड़े। कई मामलों में घटना के बाद जांच पूरी होने के बावजूद न्यायालयीन प्रक्रिया लंबी चलती है। ऐसे मामलों में साक्ष्यों और दस्तावेजों को समय पर प्रस्तुत करना तथा अभियोजन पक्ष के साथ बेहतर तालमेल रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।
बिल्हौर से संबंधित यह मामला भी वर्ष 2012 का है। लगभग लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद चार अभियुक्तों को दोषी ठहराया गया है। इससे यह संदेश जाता है कि पुराने मामलों में भी कानूनी प्रक्रिया के तहत दोष सिद्ध होने पर सजा का रास्ता खुला रहता है।
पुलिस ने जताया अभियान की सफलता का संकेत
कानपुर पुलिस के अनुसार ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत की जा रही प्रभावी पैरवी का उद्देश्य न्यायालय में विचाराधीन मामलों के परिणाम को मजबूत करना है। इस मामले में चार अभियुक्तों को मिली सजा को पुलिस ने अभियान के तहत प्रभावी पैरवी का परिणाम बताया है।
पुलिस का कहना है कि गुणवत्तापूर्ण विवेचना के साथ-साथ अभियोजन पक्ष के साथ बेहतर समन्वय अपराध से जुड़े मामलों में न्यायिक परिणाम हासिल करने के लिए आवश्यक है। ऐसे मामलों में पुलिस की भूमिका केवल जांच तक सीमित नहीं रहती, बल्कि न्यायालय में चलने वाली प्रक्रिया के दौरान भी संबंधित दस्तावेजों और साक्ष्यों की उपलब्धता तथा पैरवी से जुड़े कार्यों पर ध्यान दिया जाता है।
कानून के अनुसार कार्रवाई का संदेश
बिल्हौर के इस पुराने मामले में न्यायालय द्वारा सुनाई गई सजा कानून के तहत न्यायिक प्रक्रिया के पूर्ण होने का परिणाम है। चारों अभियुक्तों को संबंधित धाराओं में दोषी पाए जाने के बाद कारावास और अर्थदंड की सजा दी गई है।
कानपुर पुलिस द्वारा इस कार्रवाई को ऑपरेशन कन्विक्शन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। पुलिस की ओर से संकेत दिया गया है कि ऐसे मामलों में प्रभावी पैरवी और न्यायालयीन प्रक्रिया में आवश्यक सहयोग आगे भी जारी रखा जाएगा, ताकि दोष सिद्ध होने वाले मामलों में कानून के अनुरूप दंड सुनिश्चित किया जा सके।
निष्कर्ष: बिल्हौर थाने से जुड़े वर्ष 2012 के इस मामले में चार अभियुक्तों को दोषी ठहराए जाने और सश्रम कारावास की सजा मिलने से यह स्पष्ट होता है कि पुराने आपराधिक मामलों में भी न्यायिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई आगे बढ़ सकती है। ऑपरेशन कन्विक्शन के अंतर्गत पुलिस की गुणवत्तापूर्ण विवेचना और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी ने इस मामले को अंतिम न्यायिक परिणाम तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।