स्कूली वाहन चालकों के स्वास्थ्य परीक्षण में तीन मिले हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
उरई, 8 अक्टूबर 2026।
स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उरई में स्कूली वाहन चालकों और परिचालकों के लिए स्वास्थ्य एवं सड़क सुरक्षा जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। जिलाधिकारी के निर्देश पर कोंच रोड स्थित बुंदेलखंड विधि महाविद्यालय परिसर में लगाए गए इस शिविर में चालकों के स्वास्थ्य के साथ उनकी आंखों की रोशनी और रक्त शर्करा की भी जांच की गई। स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान तीन वाहन चालकों का रक्तचाप सामान्य से अधिक पाया गया। चिकित्सकों ने उन्हें स्वास्थ्य के प्रति सावधानी बरतने और आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श लेने की सलाह दी।

शिविर का आयोजन परिवहन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, यातायात पुलिस और बुंदेलखंड विधि महाविद्यालय के संयुक्त सहयोग से किया गया। अधिकारियों के अनुसार स्कूली वाहनों का संचालन करने वाले चालकों की जिम्मेदारी सामान्य वाहन चालकों की तुलना में अधिक होती है, क्योंकि उनके साथ बच्चों की सुरक्षा जुड़ी रहती है। ऐसे में चालक का शारीरिक रूप से स्वस्थ और मानसिक रूप से सजग रहना बेहद आवश्यक है।
कई स्कूलों के वाहन चालक और परिचालक पहुंचे
स्वास्थ्य परीक्षण कार्यक्रम में शहर के अलग-अलग विद्यालयों से जुड़े वाहन चालकों और परिचालकों ने भाग लिया। बुंदेलखंड विधि महाविद्यालय के अलावा गुड गेट कॉन्वेंट स्कूल, मैकेनिक नगर, एसएस इंटरनेशनल स्कूल तथा कोंच रोड स्थित सेक्रेड हार्ट सेनेटरी एकेडमी से संबंधित स्कूली वाहन चालक भी शिविर में पहुंचे।
चिकित्सकीय टीम ने प्रत्येक चालक की प्राथमिक स्वास्थ्य जांच की। इसमें रक्तचाप, ब्लड शुगर और सामान्य स्वास्थ्य से जुड़े परीक्षण किए गए। इसके अलावा आंखों की जांच भी की गई, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वाहन चलाने के लिए चालक की दृष्टि पर्याप्त रूप से ठीक है या नहीं।
जांच के दौरान तीन चालकों में रक्तचाप बढ़ा हुआ मिलने के बाद उन्हें चिकित्सकों ने स्वास्थ्य को नजरअंदाज न करने की सलाह दी। विशेषज्ञों ने बताया कि वाहन चलाते समय अचानक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी उत्पन्न होना चालक के साथ-साथ वाहन में बैठे बच्चों के लिए भी जोखिम पैदा कर सकता है। इसलिए चालकों को समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण कराते रहना चाहिए।
चालक की सेहत भी सड़क सुरक्षा का अहम हिस्सा
शिविर में मौजूद स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि सड़क सुरक्षा को केवल यातायात नियमों तक सीमित नहीं किया जा सकता। चालक की शारीरिक फिटनेस, आंखों की क्षमता और मानसिक एकाग्रता भी सुरक्षित ड्राइविंग का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
उच्च रक्तचाप, मधुमेह और आंखों से जुड़ी समस्याएं कई बार लंबे समय तक स्पष्ट लक्षण नहीं देतीं। ऐसे में नियमित जांच से स्वास्थ्य संबंधी समस्या का समय रहते पता लगाया जा सकता है। स्कूली वाहन चालकों के लिए यह और भी जरूरी है, क्योंकि उन्हें प्रतिदिन बड़ी संख्या में बच्चों को सुरक्षित रूप से स्कूल और घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभानी होती है।
हेलमेट और सीट बेल्ट के प्रति किया जागरूक
शिविर के दौरान यातायात प्रभारी बीर बहादुर सिंह ने उपस्थित लोगों को सड़क सुरक्षा नियमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सुरक्षित यातायात के लिए नियमों का पालन करना केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि सड़क का इस्तेमाल करने वाले प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।
उन्होंने दोपहिया वाहन चालकों से हेलमेट का अनिवार्य रूप से प्रयोग करने और चारपहिया वाहनों में सीट बेल्ट लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि दुर्घटना की स्थिति में सुरक्षा उपकरण चोट की गंभीरता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
स्कूली वाहन चालकों को विशेष रूप से निर्देशित किया गया कि वे बच्चों को लेकर वाहन चलाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें। जल्दबाजी में वाहन चलाने, अनावश्यक ओवरटेकिंग करने और यातायात नियमों की अनदेखी से बचने की सलाह दी गई। अधिकारियों ने कहा कि बच्चों को समय पर स्कूल पहुंचाने की जल्दबाजी से अधिक महत्वपूर्ण उनकी सुरक्षित यात्रा है।
सड़क हादसे में घायलों की मदद करने की अपील
कार्यक्रम में गुड सेमेरिटन पुरस्कार से सम्मानित समाजसेवी अब्दुल अलीम खान ने सड़क दुर्घटनाओं के बाद घायलों की सहायता करने की जरूरत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हादसे के बाद घायल व्यक्ति को जितनी जल्दी संभव हो सके चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण होता है।
उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि दुर्घटना देखने के बाद केवल भीड़ का हिस्सा बनने के बजाय मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करें। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा का उद्देश्य तभी सार्थक होगा, जब नियमों का पालन करने के साथ समाज में एक-दूसरे की मदद करने की भावना भी मजबूत होगी।
मोबाइल फोन और नशे में ड्राइविंग से बचने की हिदायत
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन राजेश कुमार ने वाहन चालकों और स्कूली छात्रों को सुरक्षित यातायात से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल चालक का ध्यान सड़क से हटा सकता है। कुछ क्षणों की असावधानी भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।
उन्होंने चालकों को शराब अथवा किसी अन्य नशीले पदार्थ का सेवन करने के बाद वाहन नहीं चलाने की स्पष्ट हिदायत दी। साथ ही निर्धारित गति सीमा का पालन करने, वाहन में स्वीकृत संख्या से अधिक यात्रियों को न बैठाने और निर्धारित सीमा से ज्यादा भार नहीं लादने पर भी जोर दिया।
लेन अनुशासन और बच्चों की सुरक्षा पर जोर
एआरटीओ ने कहा कि सुरक्षित यातायात व्यवस्था के लिए लेन अनुशासन का पालन करना जरूरी है। चालकों को अपनी लेन में सावधानीपूर्वक वाहन चलाने और आवश्यकता के अनुसार ही लेन बदलने की सलाह दी गई।
स्कूली वाहनों के मामले में बच्चों के चढ़ने और उतरने के दौरान विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया। चालक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चा सुरक्षित स्थान पर उतरने या चढ़ने के बाद ही वाहन आगे बढ़े। इसके साथ ही वाहन की नियमित जांच, ब्रेक, टायर, लाइट और अन्य आवश्यक उपकरणों की स्थिति पर भी ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई।
जागरूकता से ही मजबूत होगी सड़क सुरक्षा
शिविर में अधिकारियों ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल एक दिन चलने वाला अभियान नहीं बल्कि निरंतर अपनाई जाने वाली जिम्मेदारी है। वाहन चालक यदि नियमों का पालन करें और अपने स्वास्थ्य को लेकर सजग रहें तो दुर्घटनाओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
कार्यक्रम के माध्यम से स्कूली वाहन चालकों को यह संदेश दिया गया कि बच्चों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाना उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसके लिए स्वस्थ रहना, यातायात नियमों का पालन करना, नशे और मोबाइल से दूरी बनाए रखना तथा वाहन की तकनीकी स्थिति पर नजर रखना जरूरी है।
स्वास्थ्य परीक्षण शिविर ने यह भी स्पष्ट किया कि नियमित जांच के माध्यम से ऐसी स्वास्थ्य समस्याओं का समय रहते पता लगाया जा सकता है, जो वाहन चलाते समय परेशानी का कारण बन सकती हैं। तीन चालकों में बढ़ा हुआ रक्तचाप मिलना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना गया। अधिकारियों ने भविष्य में भी इस प्रकार के जागरूकता और स्वास्थ्य परीक्षण कार्यक्रमों को उपयोगी बताया।