प्रयागराज के 27 वर्षीय फोटोग्राफर आलोक गुप्ता की हत्या का खुलासा, दोस्तों पर लगा साजिश रचने का आरोप

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प्रयागराज/रीवा। प्रयागराज के रहने वाले 27 वर्षीय फोटोग्राफर आलोक गुप्ता की हत्या के मामले में पुलिस ने कथित तौर पर चौंकाने वाला खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, इस वारदात में आलोक के ही तीन दोस्तों की भूमिका सामने आई है। मृतक का शव मध्य प्रदेश के रीवा क्षेत्र में बरामद होने के बाद मामला बेहद गंभीर हो गया था। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने कथित आरोपियों तक पहुंच बनाई और हत्या के पीछे की वजह तथा वारदात के बाद किए गए कथित प्रयासों का पता लगाया।

पुलिस के मुताबिक, इस मामले में शुब्हम तिवारी, शुब्हम यादव और अंकुश यादव को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि आरोपियों ने हत्या के बाद सबूतों को छिपाने और पुलिस को भ्रमित करने की कोशिश की। मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार, मृतक के मोबाइल फोन का इस्तेमाल भी लंबे समय तक किया गया, ताकि उसके परिचितों को यह लगे कि आलोक अभी जीवित है।

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रीवा में मिला था आलोक का शव

आलोक गुप्ता प्रयागराज में फोटोग्राफी का काम करते थे। उनकी उम्र महज 27 वर्ष थी। बताया गया है कि उनकी हत्या के बाद शव को प्रयागराज से बाहर ले जाया गया और मध्य प्रदेश के रीवा में ठिकाने लगाने की कोशिश की गई। शव मिलने के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना था कि आलोक की हत्या किसने और किस वजह से की।

शुरुआत में मामला एक ब्लाइंड मर्डर की तरह था, क्योंकि घटनास्थल और शव मिलने की जगह के बीच दूरी होने के कारण जांचकर्ताओं के सामने कई सवाल थे। पुलिस ने मृतक के संपर्कों, गतिविधियों और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से जांच को आगे बढ़ाया।

तीन दोस्तों पर हत्या का आरोप

पुलिस जांच में कथित तौर पर आलोक के तीन दोस्तों के नाम सामने आए। इनमें शुब्हम तिवारी, शुब्हम यादव और अंकुश यादव शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि तीनों ने मिलकर वारदात को अंजाम दिया।

जांच में मुख्य आरोपी के तौर पर बताए जा रहे शुब्हम तिवारी को लेकर पुलिस ने आर्थिक विवाद और व्यक्तिगत रंजिश की बात कही है। पुलिस के अनुसार, आलोक के सफल फोटोग्राफी करियर और बेहतर जीवनशैली को लेकर शुब्हम के मन में कथित रूप से ईर्ष्या थी। इसके अलावा पैसों के लेन-देन और कथित तौर पर उधार की रकम को लेकर भी दोनों के बीच विवाद था।

पुलिस के मुताबिक, आर्थिक परेशानियों को लेकर होने वाली कथित बहस और तानों ने विवाद को और बढ़ा दिया। हालांकि, इन आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।

कथित ईर्ष्या और आर्थिक विवाद बना वजह

पुलिस के अनुसार, हत्या के पीछे केवल एक कारण नहीं बल्कि कई विवाद जुड़े हुए थे। मुख्य आरोपी और आलोक के बीच पैसों को लेकर मतभेद होने की बात जांच में सामने आई। इसके साथ ही आलोक की फोटोग्राफी के क्षेत्र में सफलता और उनकी जीवनशैली भी कथित तौर पर आरोपी को परेशान करती थी।

पुलिस का दावा है कि आर्थिक स्थिति को लेकर होने वाली बातचीत और कथित तानों के कारण दोनों के बीच तनाव बढ़ता गया। इसी विवाद ने बाद में गंभीर रूप ले लिया। जांचकर्ताओं ने इन पहलुओं को हत्या के संभावित मकसद से जोड़कर देखा है।

हत्या के बाद 20 दिनों तक फोन का कथित इस्तेमाल

इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू हत्या के बाद मोबाइल फोन के इस्तेमाल से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने आलोक के आईफोन का इस्तेमाल किया और करीब 20 दिनों तक उसकी गर्लफ्रेंड से बातचीत की।

जांच एजेंसियों का दावा है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि उसके करीबियों को यह महसूस होता रहे कि आलोक सामान्य रूप से बातचीत कर रहा है और जीवित है। इस कथित रणनीति के जरिए आरोपियों ने हत्या की जानकारी सामने आने में देरी करने की कोशिश की।

मोबाइल फोन से जुड़ी गतिविधियों ने पुलिस की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डिजिटल गतिविधियों और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को जोड़ते हुए जांचकर्ताओं ने मामले की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया।

सीसीटीवी फुटेज से मिली अहम सुराग

पुलिस के सामने मामले को सुलझाने में सीसीटीवी फुटेज बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई। जांच के दौरान संदिग्धों की गतिविधियों को कैमरों की रिकॉर्डिंग के जरिए खंगाला गया। पुलिस के अनुसार, आरोपियों को एक भारी नीले रंग के बैग के साथ देखा गया था।

इस फुटेज ने जांचकर्ताओं को संदिग्धों की आवाजाही का रास्ता समझने में मदद की। अलग-अलग स्थानों से मिले सीसीटीवी फुटेज और अन्य जानकारी को आपस में जोड़कर पुलिस ने संदिग्धों की पहचान और उनकी गतिविधियों की पड़ताल की।

ब्लाइंड मर्डर की जांच में इस तरह के दृश्य साक्ष्य महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि इनसे संदिग्धों की आवाजाही और घटना के बाद की गतिविधियों के बारे में जानकारी मिल सकती है।

सुबेदारगंज फ्लाईओवर के पास गिरफ्तारी

पुलिस के मुताबिक, जांच आगे बढ़ने के बाद आरोपियों को प्रयागराज में सुबेदारगंज फ्लाईओवर के आसपास से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने कथित तौर पर वारदात से जुड़े कई सामान बरामद किए।

जांच एजेंसियों के अनुसार, बरामद वस्तुओं में कथित हत्या में इस्तेमाल किया गया हथियार, कार और अन्य सामान शामिल हैं। इन वस्तुओं को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वारदात की पूरी योजना कैसे बनाई गई और उसमें किसकी क्या भूमिका थी।

पुलिस टीम को मिला ₹25 हजार का इनाम

मामले को तेजी से सुलझाने के लिए पुलिस टीम की कार्रवाई की भी सराहना की गई। जानकारी के अनुसार, इस ब्लाइंड मर्डर की जांच में शामिल पुलिसकर्मियों को उनकी त्वरित कार्रवाई और मामले का खुलासा करने के लिए ₹25,000 की नकद राशि से सम्मानित किया गया।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी जांच और संदिग्धों की गतिविधियों को जोड़ने से जांच को दिशा मिली। इसके बाद आरोपियों तक पहुंचने में सफलता मिली।

जांच में अभी भी कई सवाल अहम

हालांकि पुलिस ने मामले के कथित आरोपियों को गिरफ्तार कर हत्या की गुत्थी सुलझाने का दावा किया है, लेकिन ऐसी घटनाओं में अदालत की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है। पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों, बरामदगी और डिजिटल रिकॉर्ड की कानूनी जांच के बाद ही आरोपों की पुष्टि होगी।

आलोक गुप्ता की हत्या ने परिवार और परिचितों को गहरा सदमा पहुंचाया है। जिस व्यक्ति के साथ सामान्य दोस्ती और पेशेवर जीवन जुड़ा हुआ था, उसी पर हत्या का आरोप सामने आना इस मामले को और गंभीर बनाता है।

फिलहाल पुलिस की जांच का केंद्र हत्या की पूरी परिस्थितियों, आरोपियों की कथित भूमिका, मोबाइल फोन के इस्तेमाल, शव को रीवा ले जाने और वारदात से जुड़े अन्य साक्ष्यों पर है। मामले की आगे की तस्वीर न्यायिक जांच और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों के बाद और स्पष्ट होगी।

निष्कर्ष

प्रयागराज के युवा फोटोग्राफर आलोक गुप्ता की हत्या का मामला कई स्तरों पर चौंकाने वाला है। पुलिस के अनुसार, दोस्ती, आर्थिक विवाद और कथित ईर्ष्या ने इस घटना की पृष्ठभूमि तैयार की। हत्या के बाद मोबाइल फोन के कथित इस्तेमाल और सीसीटीवी फुटेज के जरिए जांच को आगे बढ़ाने की कहानी ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर कथित हथियार, वाहन और अन्य सामान बरामद करने की जानकारी दी है। अब आगे की कानूनी प्रक्रिया में यह तय होगा कि जांच में सामने आए आरोप और साक्ष्य अदालत के समक्ष किस रूप में साबित होते हैं। आलोक के परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद है और इस मामले की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण बनी हुई है।

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