राष्ट्रीय डाक सप्ताह पर उरई में सजा पत्रोत्सव, दुर्लभ डाक टिकटों और ऐतिहासिक डाक सामग्री ने खींचा लोगों का ध्यान

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अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई में इंटैक अध्याय की पहल पर आयोजित प्रदर्शनी में दिखी भारतीय डाक इतिहास की झलक, स्कूली बच्चों ने पोस्टकार्ड पर लिखे पत्र और क्विज प्रतियोगिता में लिया हिस्सा

उरई (जालौन), 12 अक्टूबर 2026। राष्ट्रीय डाक सप्ताह के अवसर पर उरई के बड़े डाकघर स्थित सभागार में पत्रोत्सव का आयोजन किया गया। इंटैक उरई अध्याय की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में डाक विभाग की समृद्ध विरासत, पत्र लेखन की परंपरा और डाक टिकटों के ऐतिहासिक महत्व को प्रदर्शनी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। देश-विदेश के दुर्लभ डाक टिकटों, पुराने पोस्टकार्डों, लिफाफों और डाक विभाग से जुड़ी ऐतिहासिक वस्तुओं को देखने के लिए लोगों में विशेष उत्सुकता दिखाई दी। इस आयोजन ने नई पीढ़ी को उस दौर से परिचित कराने का प्रयास किया, जब पत्र संवाद का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम हुआ करते थे।

दीप प्रज्वलन के साथ हुआ पत्रोत्सव का शुभारंभ

कार्यक्रम का उद्घाटन झांसी मंडल के सीनियर सुप्रिन्टेंडेंट ऑफ पोस्ट ऑफिसेज वरुण मिश्रा ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर शंख ध्वनि के बीच कार्यक्रम की शुरुआत हुई। उद्घाटन के बाद उन्होंने प्रदर्शनी में रखी गई ऐतिहासिक डाक सामग्री का अवलोकन किया और आयोजन की सराहना की।

वरुण मिश्रा ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन डाक विभाग की ऐतिहासिक पहचान को सामने लाने के साथ ही लोगों को विभाग की सेवाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करने में भी उपयोगी हैं। उन्होंने पत्रोत्सव को एक सकारात्मक पहल बताते हुए भविष्य में इसे और व्यापक तथा बेहतर स्वरूप देने की दिशा में प्रयास किए जाने की बात कही। साथ ही डाक विभाग की विभिन्न जनोपयोगी योजनाओं की जानकारी भी साझा की।

दुनिया के शुरुआती डाक टिकटों का हुआ प्रदर्शन

पत्रोत्सव का प्रमुख आकर्षण दुनिया के शुरुआती डाक टिकटों में गिने जाने वाले ब्लैक पैनी, रेड पैनी और ब्लू पैनी की मूल प्रतियां रहीं। इन टिकटों के माध्यम से दर्शकों को डाक टिकट संग्रह की ऐतिहासिक परंपरा और संचार व्यवस्था के विकास को करीब से समझने का अवसर मिला। ब्लैक पैनी से जुड़ी स्मृति सामग्री के साथ भारतीय डाक विभाग की ओर से अलग-अलग समय पर जारी किए गए टिकट भी प्रदर्शनी में शामिल किए गए।

कार्यक्रम के सूत्रधार डॉ. हरीमोहन पुरवार ने उपस्थित लोगों को डाक टिकटों के इतिहास, उनकी उपयोगिता और संग्रह के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने समझाया कि पुराने टिकट केवल डाक शुल्क चुकाने का साधन नहीं हैं, बल्कि वे अपने समय की राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों की जानकारी देने वाले महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज भी हैं।

सिंध डाक और महारानी विक्टोरिया के टिकटों ने बढ़ाई प्रदर्शनी की शोभा

भारतीय डाक इतिहास से संबंधित दुर्लभ सामग्री ने भी दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। प्रदर्शनी में वर्ष 1852 में सिंध प्रांत में जारी सिंध डाक के टिकटों में शामिल दुर्लभ नीला टिकट प्रदर्शित किया गया। इसके साथ ही वर्ष 1854 में महारानी विक्टोरिया के चित्र वाला डाक टिकट भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा।

ब्रिटिश शासन के विभिन्न कालखंडों से संबंधित डाक सामग्री को भी व्यवस्थित रूप से प्रदर्शित किया गया। इसमें क्वीन विक्टोरिया, किंग एडवर्ड, किंग जॉर्ज पंचम और किंग जॉर्ज षष्ठम के समय के पोस्टकार्ड, साधारण लिफाफे, रजिस्ट्री लिफाफे और डाक टिकट शामिल थे। इन वस्तुओं ने दर्शकों को पुराने समय की डाक व्यवस्था, पत्र भेजने के तरीकों और संचार सुविधाओं में आए बदलावों की जानकारी दी।

स्वतंत्र भारत की डाक व्यवस्था की भी मिली झलक

प्रदर्शनी में आजादी के बाद भारतीय डाक विभाग द्वारा इस्तेमाल की गई विभिन्न प्रकार की डाक सामग्री को भी स्थान दिया गया। स्वतंत्र भारत के पोस्टकार्ड, अंतर्देशीय पत्र, रजिस्टर्ड लिफाफे, विशेष गत्ते वाले लिफाफे, चित्र पोस्टकार्ड और मेघदूत पोस्टकार्ड प्रदर्शित किए गए।

महात्मा गांधी के चित्र वाले दुर्लभ पोस्टकार्ड और अंतर्देशीय पत्र भी प्रदर्शनी का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे। इनके अलावा मनीऑर्डर की रसीदें, एकनॉलेजमेंट यानी प्राप्ति की पुष्टि से संबंधित सामग्री, विभिन्न प्रकार के डाक बक्से और डाक टिकटों पर लगाई जाने वाली कैंसिलेशन मुहरें भी रखी गईं।

सेना के लिए इस्तेमाल होने वाली विशेष डाक सामग्री को भी प्रदर्शित किया गया। इस सामग्री ने यह समझने में मदद की कि अलग-अलग परिस्थितियों में डाक व्यवस्था किस प्रकार लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का काम करती रही है।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस और भारतीय नोटों से जुड़े टिकट बने आकर्षण

प्रदर्शनी में स्वतंत्रता संग्राम और देश के ऐतिहासिक व्यक्तित्वों से संबंधित डाक टिकटों को भी प्रमुखता दी गई। नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़े दुर्लभ टिकटों के साथ ‘दिल्ली चलो’ विषय पर आधारित टिकट प्रदर्शित किए गए। इन टिकटों के माध्यम से देश के इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी स्मृतियों को सामने लाने का प्रयास किया गया।

‘डाक टिकटों के रंग, भारतीय नोटों के संग’ विषय के अंतर्गत भारतीय मुद्रा पर अंकित चित्रों से संबंधित डाक टिकटों का प्रदर्शन भी किया गया। इस विशेष प्रस्तुति ने डाक टिकट संग्रह और भारतीय मुद्रा के बीच ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक संबंधों को समझने का अवसर प्रदान किया।

प्रदर्शनी में रखी गई सामग्री संध्या पुरवार और डॉ. हरीमोहन पुरवार के निजी संग्रह से लाई गई थी। उनके संग्रह में शामिल ऐतिहासिक वस्तुओं ने कार्यक्रम को विशेष पहचान दी और डाक इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों को दुर्लभ सामग्री देखने का अवसर उपलब्ध कराया।

बच्चों ने पोस्टकार्ड पर लिखे अपने स्वजनों को पत्र

पत्रोत्सव में केवल ऐतिहासिक वस्तुओं का प्रदर्शन ही नहीं हुआ, बल्कि बच्चों को पत्र लेखन की परंपरा से जोड़ने के लिए व्यावहारिक गतिविधियां भी आयोजित की गईं। मिलेनियम वर्ड पब्लिक स्कूल के लगभग 40 बच्चों ने पोस्टकार्ड पर अपने स्वजनों के नाम पत्र लिखे। प्रदर्शनी समाप्त होने के बाद इन पोस्टकार्डों को संबंधित पते पर भेजने की व्यवस्था की गई।

इस गतिविधि का उद्देश्य बच्चों को पत्र लिखने की प्रक्रिया से परिचित कराना और पारंपरिक संचार माध्यमों के महत्व को समझाना रहा। आज के डिजिटल दौर में मोबाइल फोन और इंटरनेट के माध्यम से संदेश भेजना आसान हो गया है, लेकिन हस्तलिखित पत्रों का भावनात्मक महत्व आज भी अलग स्थान रखता है। बच्चों की भागीदारी ने इस परंपरा को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।

क्विज प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने दिखाया उत्साह

कार्यक्रम के दौरान जीवन ज्योति चंद्र कमल अकादमी के लगभग 70 से 80 विद्यार्थियों ने क्विज प्रतियोगिता में भाग लिया। डॉ. हरीमोहन पुरवार ने प्रतियोगिता का संचालन किया। प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों की जानकारी, समझ और सीखने की रुचि को परखने का अवसर मिला।

प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्रदान किए गए। इस गतिविधि ने कार्यक्रम को शैक्षिक स्वरूप दिया और बच्चों को इतिहास तथा सामान्य ज्ञान से जुड़े विषयों में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया।

डाक विभाग के अधिकारियों और गणमान्य लोगों की रही मौजूदगी

पत्रोत्सव में डाक विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों सहित अनेक गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में पोस्टमास्टर कैलाश बाबू, कार्यक्रम प्रभारी संजीव अग्निहोत्री, सहायक अधीक्षक डाकघर वीके शुक्ला, एलके अवस्थी और बाबर अली सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

इसके अलावा डॉ. रचना श्रीवास्तव, मंजू रावत, डॉ. अनिल श्रीवास्तव, शिव शंकर रावत, रेखा रावत, मंजू विजय, डॉ. माया सिंह, विकास आनंद, विजय कुमार सोनी, मुकेश पुरवार, सिमरन, इंजीनियर आकर्श मिश्रा, संगीता, पुष्पा श्रीवास्तव, राकेश गुप्ता, रिया पाटकार, भूपेंद्र टोनी, नवनीत श्रीवास्तव और प्रियंका अग्रवाल समेत बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति रही।

नई पीढ़ी को डाक विरासत से जोड़ने की पहल

उरई में आयोजित यह पत्रोत्सव ऐतिहासिक डाक सामग्री के प्रदर्शन के साथ-साथ पुरानी पत्र लेखन संस्कृति को याद करने का अवसर भी बना। दुर्लभ टिकटों, पुराने लिफाफों, मनीऑर्डर रसीदों और ऐतिहासिक पोस्टकार्डों के माध्यम से लोगों को डाक विभाग की लंबी यात्रा समझने का मौका मिला।

वहीं, स्कूली बच्चों की ओर से पोस्टकार्ड लिखने और क्विज प्रतियोगिता में हिस्सा लेने जैसी गतिविधियों ने आयोजन को ज्ञानवर्धक बनाया। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण, डाक टिकट संग्रह के प्रति रुचि और पारंपरिक संचार माध्यमों की जानकारी को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। राष्ट्रीय डाक सप्ताह के अवसर पर आयोजित इस पहल ने संदेश दिया कि तकनीक के तेजी से बदलते दौर में भी पत्रों, डाक टिकटों और उनसे जुड़ी यादों का अपना विशेष महत्व बना हुआ है।

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राष्ट्रीय डाक सप्ताह पर उरई में सजा पत्रोत्सव, दुर्लभ डाक टिकटों और ऐतिहासिक डाक सामग्री ने खींचा लोगों का ध्यान

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 13, 2026

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई में इंटैक अध्याय की पहल पर आयोजित प्रदर्शनी में दिखी भारतीय डाक इतिहास की झलक, स्कूली बच्चों ने पोस्टकार्ड पर लिखे पत्र और क्विज प्रतियोगिता में लिया हिस्सा

उरई (जालौन), 12 अक्टूबर 2026। राष्ट्रीय डाक सप्ताह के अवसर पर उरई के बड़े डाकघर स्थित सभागार में पत्रोत्सव का आयोजन किया गया। इंटैक उरई अध्याय की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में डाक विभाग की समृद्ध विरासत, पत्र लेखन की परंपरा और डाक टिकटों के ऐतिहासिक महत्व को प्रदर्शनी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। देश-विदेश के दुर्लभ डाक टिकटों, पुराने पोस्टकार्डों, लिफाफों और डाक विभाग से जुड़ी ऐतिहासिक वस्तुओं को देखने के लिए लोगों में विशेष उत्सुकता दिखाई दी। इस आयोजन ने नई पीढ़ी को उस दौर से परिचित कराने का प्रयास किया, जब पत्र संवाद का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम हुआ करते थे।

दीप प्रज्वलन के साथ हुआ पत्रोत्सव का शुभारंभ

कार्यक्रम का उद्घाटन झांसी मंडल के सीनियर सुप्रिन्टेंडेंट ऑफ पोस्ट ऑफिसेज वरुण मिश्रा ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर शंख ध्वनि के बीच कार्यक्रम की शुरुआत हुई। उद्घाटन के बाद उन्होंने प्रदर्शनी में रखी गई ऐतिहासिक डाक सामग्री का अवलोकन किया और आयोजन की सराहना की।

वरुण मिश्रा ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन डाक विभाग की ऐतिहासिक पहचान को सामने लाने के साथ ही लोगों को विभाग की सेवाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करने में भी उपयोगी हैं। उन्होंने पत्रोत्सव को एक सकारात्मक पहल बताते हुए भविष्य में इसे और व्यापक तथा बेहतर स्वरूप देने की दिशा में प्रयास किए जाने की बात कही। साथ ही डाक विभाग की विभिन्न जनोपयोगी योजनाओं की जानकारी भी साझा की।

दुनिया के शुरुआती डाक टिकटों का हुआ प्रदर्शन

पत्रोत्सव का प्रमुख आकर्षण दुनिया के शुरुआती डाक टिकटों में गिने जाने वाले ब्लैक पैनी, रेड पैनी और ब्लू पैनी की मूल प्रतियां रहीं। इन टिकटों के माध्यम से दर्शकों को डाक टिकट संग्रह की ऐतिहासिक परंपरा और संचार व्यवस्था के विकास को करीब से समझने का अवसर मिला। ब्लैक पैनी से जुड़ी स्मृति सामग्री के साथ भारतीय डाक विभाग की ओर से अलग-अलग समय पर जारी किए गए टिकट भी प्रदर्शनी में शामिल किए गए।

कार्यक्रम के सूत्रधार डॉ. हरीमोहन पुरवार ने उपस्थित लोगों को डाक टिकटों के इतिहास, उनकी उपयोगिता और संग्रह के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने समझाया कि पुराने टिकट केवल डाक शुल्क चुकाने का साधन नहीं हैं, बल्कि वे अपने समय की राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों की जानकारी देने वाले महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज भी हैं।

सिंध डाक और महारानी विक्टोरिया के टिकटों ने बढ़ाई प्रदर्शनी की शोभा

भारतीय डाक इतिहास से संबंधित दुर्लभ सामग्री ने भी दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। प्रदर्शनी में वर्ष 1852 में सिंध प्रांत में जारी सिंध डाक के टिकटों में शामिल दुर्लभ नीला टिकट प्रदर्शित किया गया। इसके साथ ही वर्ष 1854 में महारानी विक्टोरिया के चित्र वाला डाक टिकट भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा।

ब्रिटिश शासन के विभिन्न कालखंडों से संबंधित डाक सामग्री को भी व्यवस्थित रूप से प्रदर्शित किया गया। इसमें क्वीन विक्टोरिया, किंग एडवर्ड, किंग जॉर्ज पंचम और किंग जॉर्ज षष्ठम के समय के पोस्टकार्ड, साधारण लिफाफे, रजिस्ट्री लिफाफे और डाक टिकट शामिल थे। इन वस्तुओं ने दर्शकों को पुराने समय की डाक व्यवस्था, पत्र भेजने के तरीकों और संचार सुविधाओं में आए बदलावों की जानकारी दी।

स्वतंत्र भारत की डाक व्यवस्था की भी मिली झलक

प्रदर्शनी में आजादी के बाद भारतीय डाक विभाग द्वारा इस्तेमाल की गई विभिन्न प्रकार की डाक सामग्री को भी स्थान दिया गया। स्वतंत्र भारत के पोस्टकार्ड, अंतर्देशीय पत्र, रजिस्टर्ड लिफाफे, विशेष गत्ते वाले लिफाफे, चित्र पोस्टकार्ड और मेघदूत पोस्टकार्ड प्रदर्शित किए गए।

महात्मा गांधी के चित्र वाले दुर्लभ पोस्टकार्ड और अंतर्देशीय पत्र भी प्रदर्शनी का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे। इनके अलावा मनीऑर्डर की रसीदें, एकनॉलेजमेंट यानी प्राप्ति की पुष्टि से संबंधित सामग्री, विभिन्न प्रकार के डाक बक्से और डाक टिकटों पर लगाई जाने वाली कैंसिलेशन मुहरें भी रखी गईं।

सेना के लिए इस्तेमाल होने वाली विशेष डाक सामग्री को भी प्रदर्शित किया गया। इस सामग्री ने यह समझने में मदद की कि अलग-अलग परिस्थितियों में डाक व्यवस्था किस प्रकार लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का काम करती रही है।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस और भारतीय नोटों से जुड़े टिकट बने आकर्षण

प्रदर्शनी में स्वतंत्रता संग्राम और देश के ऐतिहासिक व्यक्तित्वों से संबंधित डाक टिकटों को भी प्रमुखता दी गई। नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़े दुर्लभ टिकटों के साथ ‘दिल्ली चलो’ विषय पर आधारित टिकट प्रदर्शित किए गए। इन टिकटों के माध्यम से देश के इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी स्मृतियों को सामने लाने का प्रयास किया गया।

‘डाक टिकटों के रंग, भारतीय नोटों के संग’ विषय के अंतर्गत भारतीय मुद्रा पर अंकित चित्रों से संबंधित डाक टिकटों का प्रदर्शन भी किया गया। इस विशेष प्रस्तुति ने डाक टिकट संग्रह और भारतीय मुद्रा के बीच ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक संबंधों को समझने का अवसर प्रदान किया।

प्रदर्शनी में रखी गई सामग्री संध्या पुरवार और डॉ. हरीमोहन पुरवार के निजी संग्रह से लाई गई थी। उनके संग्रह में शामिल ऐतिहासिक वस्तुओं ने कार्यक्रम को विशेष पहचान दी और डाक इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों को दुर्लभ सामग्री देखने का अवसर उपलब्ध कराया।

बच्चों ने पोस्टकार्ड पर लिखे अपने स्वजनों को पत्र

पत्रोत्सव में केवल ऐतिहासिक वस्तुओं का प्रदर्शन ही नहीं हुआ, बल्कि बच्चों को पत्र लेखन की परंपरा से जोड़ने के लिए व्यावहारिक गतिविधियां भी आयोजित की गईं। मिलेनियम वर्ड पब्लिक स्कूल के लगभग 40 बच्चों ने पोस्टकार्ड पर अपने स्वजनों के नाम पत्र लिखे। प्रदर्शनी समाप्त होने के बाद इन पोस्टकार्डों को संबंधित पते पर भेजने की व्यवस्था की गई।

इस गतिविधि का उद्देश्य बच्चों को पत्र लिखने की प्रक्रिया से परिचित कराना और पारंपरिक संचार माध्यमों के महत्व को समझाना रहा। आज के डिजिटल दौर में मोबाइल फोन और इंटरनेट के माध्यम से संदेश भेजना आसान हो गया है, लेकिन हस्तलिखित पत्रों का भावनात्मक महत्व आज भी अलग स्थान रखता है। बच्चों की भागीदारी ने इस परंपरा को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।

क्विज प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने दिखाया उत्साह

कार्यक्रम के दौरान जीवन ज्योति चंद्र कमल अकादमी के लगभग 70 से 80 विद्यार्थियों ने क्विज प्रतियोगिता में भाग लिया। डॉ. हरीमोहन पुरवार ने प्रतियोगिता का संचालन किया। प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों की जानकारी, समझ और सीखने की रुचि को परखने का अवसर मिला।

प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्रदान किए गए। इस गतिविधि ने कार्यक्रम को शैक्षिक स्वरूप दिया और बच्चों को इतिहास तथा सामान्य ज्ञान से जुड़े विषयों में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया।

डाक विभाग के अधिकारियों और गणमान्य लोगों की रही मौजूदगी

पत्रोत्सव में डाक विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों सहित अनेक गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में पोस्टमास्टर कैलाश बाबू, कार्यक्रम प्रभारी संजीव अग्निहोत्री, सहायक अधीक्षक डाकघर वीके शुक्ला, एलके अवस्थी और बाबर अली सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

इसके अलावा डॉ. रचना श्रीवास्तव, मंजू रावत, डॉ. अनिल श्रीवास्तव, शिव शंकर रावत, रेखा रावत, मंजू विजय, डॉ. माया सिंह, विकास आनंद, विजय कुमार सोनी, मुकेश पुरवार, सिमरन, इंजीनियर आकर्श मिश्रा, संगीता, पुष्पा श्रीवास्तव, राकेश गुप्ता, रिया पाटकार, भूपेंद्र टोनी, नवनीत श्रीवास्तव और प्रियंका अग्रवाल समेत बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति रही।

नई पीढ़ी को डाक विरासत से जोड़ने की पहल

उरई में आयोजित यह पत्रोत्सव ऐतिहासिक डाक सामग्री के प्रदर्शन के साथ-साथ पुरानी पत्र लेखन संस्कृति को याद करने का अवसर भी बना। दुर्लभ टिकटों, पुराने लिफाफों, मनीऑर्डर रसीदों और ऐतिहासिक पोस्टकार्डों के माध्यम से लोगों को डाक विभाग की लंबी यात्रा समझने का मौका मिला।

वहीं, स्कूली बच्चों की ओर से पोस्टकार्ड लिखने और क्विज प्रतियोगिता में हिस्सा लेने जैसी गतिविधियों ने आयोजन को ज्ञानवर्धक बनाया। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण, डाक टिकट संग्रह के प्रति रुचि और पारंपरिक संचार माध्यमों की जानकारी को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। राष्ट्रीय डाक सप्ताह के अवसर पर आयोजित इस पहल ने संदेश दिया कि तकनीक के तेजी से बदलते दौर में भी पत्रों, डाक टिकटों और उनसे जुड़ी यादों का अपना विशेष महत्व बना हुआ है।