प्रसव के बाद महिला की मौत: न्यू इंडिया हॉस्पिटल सील, स्वास्थ्य विभाग की जांच जारी
कमलेश कुमार बहराइच
हिट एंड हॉट न्यूज़ संवाददाता बहराइच
मिहींपुरवा/बहराइच। सुजौली थाना क्षेत्र के कैलाशपुरी निवासी एक महिला की प्रसव के बाद हुई मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए मिहींपुरवा स्थित न्यू इंडिया हॉस्पिटल को सील कर दिया है। महिला के परिजनों की ओर से दी गई तहरीर और प्रार्थना पत्र के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच शुरू की थी। जांच के बाद बुधवार को अस्पताल के खिलाफ यह कार्रवाई की गई।

मामला करिश्मा नाम की महिला की मौत से जुड़ा है। परिजनों के अनुसार, प्रसव पीड़ा होने के बाद करिश्मा को 16 सितंबर को मिहींपुरवा स्थित न्यू इंडिया हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में चिकित्सकीय जांच के दौरान उसका हीमोग्लोबिन लगभग 7.7 ग्राम बताया गया। इसके बाद प्रसव के लिए ऑपरेशन किया गया और महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया।
बच्ची के जन्म के बाद महिला की तबीयत बिगड़ने लगी। स्थिति गंभीर होने पर परिजनों ने उसे बेहतर उपचार के लिए पहले बहराइच और बाद में लखनऊ के अस्पताल में भर्ती कराया। वहां इलाज के दौरान मंगलवार सुबह महिला की मौत हो गई। महिला की मौत की खबर मिलने के बाद परिवार में कोहराम मच गया।
मौत के बाद अस्पताल पहुंचे परिजन
महिला की मौत के बाद परिजन शव लेकर न्यू इंडिया हॉस्पिटल पहुंचे। यहां उन्होंने इलाज और प्रसव के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए और अस्पताल परिसर में विरोध जताया। घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची।
पुलिस ने स्थिति को संभालने के साथ ही शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। परिजनों की ओर से अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही और ऑपरेशन से संबंधित कई गंभीर आरोप लगाए गए। परिवार ने मामले की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
हालांकि, महिला की मौत के वास्तविक कारणों और इलाज के दौरान किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही हुई या नहीं, इसका अंतिम निर्धारण जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही किया जा सकेगा।

शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच
परिजनों की शिकायत को स्वास्थ्य विभाग ने गंभीरता से लिया। तहरीर और प्रार्थना पत्र मिलने के बाद विभागीय स्तर पर मामले की जांच शुरू की गई। जांच के दौरान अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, प्रसव और ऑपरेशन से संबंधित व्यवस्थाओं तथा आवश्यक अनुमतियों सहित विभिन्न बिंदुओं को देखा गया।
स्वास्थ्य विभाग की जांच का उद्देश्य यह पता लगाना था कि अस्पताल में उपचार के दौरान निर्धारित चिकित्सा मानकों और नियमों का पालन किया गया था या नहीं। साथ ही अस्पताल के संचालन से संबंधित दस्तावेजों और अन्य आवश्यक पहलुओं की भी जांच की गई।
जांच पूरी होने के बाद विभाग ने बुधवार को अस्पताल को सील करने की कार्रवाई की। इस कार्रवाई के बाद अस्पताल में मरीजों के उपचार और अन्य गतिविधियों पर रोक लग गई है।
नोडल अधिकारी और सीएचसी अधीक्षक की मौजूदगी में कार्रवाई
न्यू इंडिया हॉस्पिटल को सील करने की कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में की गई। मौके पर नोडल अधिकारी डॉ. थानेदार तथा सीएचसी अधीक्षक महेश कुमार विश्वकर्मा मौजूद रहे।
अधिकारियों की मौजूदगी में अस्पताल को सील किया गया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से यह कार्रवाई प्रारंभिक जांच के बाद की गई है। अधिकारियों के अनुसार, महिला की मौत से संबंधित पूरा मामला अभी जांच के दायरे में है और आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर होगी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
महिला की मौत के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट मामले की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। रिपोर्ट से महिला की मौत के चिकित्सकीय कारणों के संबंध में जानकारी मिलने की उम्मीद है।
इसके साथ ही अस्पताल में हुए इलाज, ऑपरेशन से संबंधित दस्तावेजों और अन्य चिकित्सा रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है। यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को सील कर दिया है, लेकिन महिला की मौत के लिए किसी व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
निजी अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल
इस घटना के बाद क्षेत्र में संचालित निजी अस्पतालों की चिकित्सा व्यवस्थाओं को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। प्रसव और ऑपरेशन जैसे संवेदनशील मामलों में मरीजों की सुरक्षा, प्रशिक्षित चिकित्सकीय स्टाफ, आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की क्षमता को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के बाद स्थानीय स्तर पर यह उम्मीद भी जताई जा रही है कि निजी अस्पतालों की व्यवस्थाओं और उनके संचालन से जुड़े नियमों की नियमित जांच की जाए। खासकर प्रसूता महिलाओं के उपचार से जुड़े संस्थानों में आवश्यक सुविधाओं और चिकित्सकीय मानकों का पालन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
परिवार को जांच से न्याय की उम्मीद
करिश्मा की मौत के बाद परिवार ने मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है। परिजनों का कहना है कि महिला अस्पताल में प्रसव के लिए गई थी, लेकिन बच्ची को जन्म देने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और बाद में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
अब परिवार की नजर स्वास्थ्य विभाग की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर है। इन दोनों के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला की मौत के पीछे वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या था और उपचार के दौरान किसी प्रकार की अनियमितता हुई थी या नहीं।
स्वास्थ्य विभाग ने फिलहाल अस्पताल को सील कर दिया है और मामले की जांच आगे जारी रहने की बात कही है। ऐसे में जांच पूरी होने तथा संबंधित रिपोर्ट सामने आने के बाद ही इस प्रकरण में अगली कार्रवाई की तस्वीर स्पष्ट होगी।
महत्वपूर्ण बात: अस्पताल को सील किया जाना विभागीय जांच के तहत की गई कार्रवाई है। इसे अपने आप में चिकित्सकीय लापरवाही की अंतिम पुष्टि नहीं माना जा सकता। मामले में अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच, दस्तावेजों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही सामने आएगा।