आईसीएआर की नई कृषि कार्ययोजनाएं: सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में टिकाऊ खेती को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली, 5 अगस्त 2026। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने देश के कृषि क्षेत्र को अधिक वैज्ञानिक, टिकाऊ और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। परिषद द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार असम, गोवा, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के लिए नई कृषि कार्ययोजनाएं (Agricultural Work Plans) तैयार कर लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
इन कार्ययोजनाओं को संबंधित राज्य सरकारों, कृषि विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, किसानों, कृषि विश्वविद्यालयों और अन्य हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य प्रत्येक राज्य की भौगोलिक, जलवायु और कृषि संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप विकास का रोडमैप तैयार करना है।
क्या है आईसीएआर?
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (Indian Council of Agricultural Research-ICAR) देश की सर्वोच्च कृषि अनुसंधान संस्था है। यह कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और कृषि शिक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देती है।
आईसीएआर देशभर में अनेक अनुसंधान संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों तक नई तकनीक और वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने का कार्य करता है।
कृषि कार्ययोजना का उद्देश्य
नई कृषि कार्ययोजनाओं का मुख्य उद्देश्य राज्यों की स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप खेती को अधिक लाभदायक और टिकाऊ बनाना है। हर राज्य की जलवायु, मिट्टी, वर्षा, उपलब्ध जल संसाधन और प्रमुख फसलों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग रणनीति तैयार की गई है।
इन योजनाओं में फसल विविधीकरण, आधुनिक कृषि तकनीक, जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य सुधार, जैविक खेती, डिजिटल कृषि और किसानों की आय बढ़ाने जैसे विषयों को प्राथमिकता दी गई है।
राज्यों की जरूरत के अनुसार रणनीति
भारत की कृषि विविधताओं से भरी हुई है। असम में चाय और धान प्रमुख हैं, महाराष्ट्र में कपास, गन्ना और बागवानी महत्वपूर्ण हैं, जबकि उत्तराखंड में पर्वतीय कृषि की अपनी अलग चुनौतियां हैं। तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश सिंचाई आधारित खेती के लिए जाने जाते हैं, वहीं अंडमान एवं निकोबार में द्वीपीय कृषि की विशेष परिस्थितियां हैं।
इसी विविधता को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक राज्य के लिए अलग कार्ययोजना तैयार की गई है ताकि स्थानीय समस्याओं का प्रभावी समाधान किया जा सके।
किसानों को होगा सीधा लाभ
यदि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो किसानों को उन्नत बीज, वैज्ञानिक खेती, आधुनिक सिंचाई तकनीक, बेहतर बाजार व्यवस्था और कृषि सलाह जैसी सुविधाएं अधिक प्रभावी ढंग से मिल सकती हैं।
साथ ही कृषि लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने के उपाय भी इन योजनाओं का हिस्सा हो सकते हैं, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
जलवायु परिवर्तन से निपटने की तैयारी
आज भारतीय कृषि के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक जलवायु परिवर्तन है। अनियमित वर्षा, सूखा, बाढ़, चक्रवात और बढ़ता तापमान खेती को प्रभावित कर रहे हैं।
नई कृषि कार्ययोजनाओं में जलवायु-अनुकूल खेती, कम पानी वाली फसलें, सूखा एवं बाढ़ सहनशील किस्में तथा प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग पर विशेष जोर दिया गया है।
तकनीक आधारित खेती
डिजिटल तकनीक तेजी से कृषि क्षेत्र को बदल रही है। ड्रोन, सैटेलाइट डेटा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मौसम पूर्वानुमान, मोबाइल ऐप और स्मार्ट सिंचाई जैसी तकनीकों का उपयोग किसानों को बेहतर निर्णय लेने में मदद कर सकता है।
आईसीएआर की कार्ययोजनाओं में वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक तकनीकों के उपयोग को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
कृषि अनुसंधान की भूमिका
नई फसल किस्मों का विकास, रोग प्रतिरोधी बीज, बेहतर उत्पादन तकनीक और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण कृषि अनुसंधान की प्रमुख उपलब्धियां हैं। आईसीएआर का प्रयास है कि प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीक सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचे।
इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्रों और राज्य कृषि विभागों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी।
टिकाऊ कृषि पर जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की कृषि केवल अधिक उत्पादन तक सीमित नहीं रह सकती। मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना, जल संरक्षण, रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग, जैविक खेती और पर्यावरण संरक्षण भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
नई कार्ययोजनाएं टिकाऊ कृषि प्रणाली विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।
राज्यों और केंद्र के बीच समन्वय
इन योजनाओं की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इन्हें राज्यों के साथ व्यापक चर्चा के बाद तैयार किया गया है। इससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं के सफल क्रियान्वयन की संभावना बढ़ सकती है।
केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, कृषि विश्वविद्यालय, वैज्ञानिक संस्थान और किसान संगठनों के बीच बेहतर समन्वय कृषि विकास की गति को तेज कर सकता है।
निष्कर्ष
आईसीएआर द्वारा असम, गोवा, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के लिए तैयार की गई नई कृषि कार्ययोजनाएं भारतीय कृषि को अधिक वैज्ञानिक, टिकाऊ और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हैं।
यदि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, किसानों की सक्रिय भागीदारी, आधुनिक तकनीकों का उपयोग और राज्यों के साथ मजबूत समन्वय सुनिश्चित किया जाता है, तो इससे कृषि उत्पादन, किसानों की आय, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल सकती है। बदलते जलवायु परिदृश्य में ऐसी राज्य-विशिष्ट कृषि रणनीतियां भविष्य की भारतीय कृषि के लिए एक महत्वपूर्ण आधार साबित हो सकती हैं।