उत्तराखंड के जोशीमठ में हेलीकॉप्टर हादसे के बाद रेस्क्यू अभियान तेज, पायलट समेत छह लोगों की मौत, दुर्गम पहाड़ी से शवों को लाने में जुटीं टीमें
जोशीमठ (उत्तराखंड)। उत्तराखंड के चमोली जिले में जोशीमठ के पास हुए दर्दनाक हेलीकॉप्टर हादसे के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर को बदरीनाथ धाम से देहरादून लौट रहा एक निजी हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में पायलट समेत हेलीकॉप्टर में सवार सभी छह लोगों की मौत हो गई। शनिवार, 31 अक्टूबर को प्रशासन और बचाव दलों ने एक बार फिर अभियान शुरू करते हुए दुर्घटनास्थल से मृतकों के पार्थिव शरीर को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का काम तेज कर दिया।

इस दुर्घटना ने उत्तराखंड में हवाई यात्रा की सुरक्षा और दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में आपातकालीन बचाव व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और स्थानीय पुलिस की टीमें संयुक्त रूप से अभियान में जुटी हुई हैं।
बदरीनाथ से देहरादून लौट रहा था हेलीकॉप्टर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड का था। हेलीकॉप्टर का पंजीकरण नंबर VT-HCX बताया गया है। यह विमान शुक्रवार को बदरीनाथ हेलीपैड से देहरादून स्थित सहस्रधारा हेलीपैड के लिए रवाना हुआ था।
हेलीकॉप्टर में एक पायलट और पांच यात्री सवार थे। उड़ान के दौरान जोशीमठ घाटी के आसपास विमान का संपर्क और ट्रैकिंग सिग्नल बाधित हो गया। इसके बाद प्रशासन और संबंधित एजेंसियों को हेलीकॉप्टर के लापता होने की सूचना मिली।
कुछ समय बाद चमोली जिले के जोशीमठ क्षेत्र में छाई गांव के पास हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने की जानकारी सामने आई। घटनास्थल पहाड़ी और वन क्षेत्र में स्थित होने के कारण वहां तक पहुंचना बचाव दलों के लिए चुनौतीपूर्ण बन गया।
खराब मौसम के बीच हुआ हादसा
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, दुर्घटना के समय क्षेत्र में मौसम अनुकूल नहीं था। बारिश और कम दृश्यता के कारण हवाई मार्ग पर उड़ान की परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण बनी हुई थीं।
भारतीय मौसम विभाग की ओर से चमोली क्षेत्र में खराब मौसम को लेकर चेतावनी भी जारी की गई थी। क्षेत्र में गरज-चमक, बारिश और तेज हवाओं की आशंका जताई गई थी।
हालांकि, हेलीकॉप्टर दुर्घटना का वास्तविक कारण अभी आधिकारिक जांच का विषय है। मौसम संबंधी परिस्थितियों को संभावित कारणों में शामिल किया जा रहा है, लेकिन जांच पूरी होने से पहले किसी एक वजह को हादसे का जिम्मेदार मानना उचित नहीं होगा।
छह लोगों की गई जान, सभी के शव बरामद
इस दुर्घटना में हेलीकॉप्टर में सवार सभी छह लोगों की जान चली गई। मृतकों में विमान के पायलट कैप्टन हिमांशु सभरवाल और कर्नाटक के पांच यात्री शामिल थे।
रिपोर्टों के अनुसार, यात्रियों की पहचान प्रतापा, अरुण सालुंके, वीबी शंकर गौड़ा, सुधीर के. और एचएस नटराजा के रूप में हुई है।
हादसे के बाद सेना और अन्य बचाव एजेंसियों की टीमों ने घटनास्थल तक पहुंचकर तलाशी अभियान चलाया। सभी छह मृतकों के पार्थिव शरीर दुर्घटनास्थल पर मिल गए थे। इसके बाद उन्हें दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र से नीचे सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की गई।
सुबह पांच बजे दोबारा शुरू हुआ अभियान
शुक्रवार देर शाम अंधेरा बढ़ने और पहाड़ी क्षेत्र की कठिन परिस्थितियों के कारण शवों को नीचे लाने का अभियान रोकना पड़ा था। इसके बाद शनिवार सुबह करीब पांच बजे बचाव कार्य दोबारा शुरू किया गया।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती दुर्घटनास्थल से शवों को सुरक्षित तरीके से सड़क तक पहुंचाने की है। पहाड़ी रास्ते संकरे और कठिन होने के कारण बचाव दलों को बेहद सावधानी के साथ काम करना पड़ रहा है।
जोशीमठ के उपजिलाधिकारी शेखर वशिष्ठ के अनुसार, सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पुलिस की टीमें संयुक्त रूप से अभियान चला रही हैं। घटनास्थल से शवों को पांडुकेश्वर अथवा छाई गांव की ओर लाने के लिए सुरक्षित रास्ते का आकलन किया जा रहा है।
इसके बाद पार्थिव शरीरों को जोशीमठ लाकर आवश्यक कानूनी और चिकित्सकीय औपचारिकताएं पूरी की जानी हैं।
वन्यजीवों की मौजूदगी से भी बढ़ी चुनौती
दुर्घटनास्थल के आसपास घना जंगल और कठिन पहाड़ी इलाका है। ऐसे में बचाव दलों को प्राकृतिक परिस्थितियों के साथ-साथ वन्यजीवों की मौजूदगी को लेकर भी सतर्क रहना पड़ रहा है।
जानकारी के मुताबिक, घटनास्थल के आसपास हिमालयी भालुओं की गतिविधियों को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। इससे अभियान में लगे जवानों और कर्मचारियों को अतिरिक्त सतर्कता के साथ आगे बढ़ना पड़ रहा है।
बचाव दलों का मुख्य उद्देश्य सभी पार्थिव शरीरों को सुरक्षित तरीके से सड़क संपर्क वाले स्थान तक पहुंचाना और फिर उन्हें प्रशासन के माध्यम से आगे की प्रक्रिया के लिए भेजना है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिए जांच के निर्देश
हेलीकॉप्टर दुर्घटना की जानकारी मिलने के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर दुख व्यक्त किया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने हादसे के कारणों की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से मौसम, तकनीकी परिस्थितियों और उड़ान से संबंधित सभी पहलुओं की जांच करने को कहा है।
राज्य सरकार की ओर से राहत एवं बचाव अभियान की निगरानी की जा रही है। साथ ही संबंधित विभागों को मृतकों के परिजनों के साथ समन्वय बनाकर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
नागरिक उड्डयन विभाग ने शुरू की जांच प्रक्रिया
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित किया जा रहा था। घटना की प्रारंभिक और नियामकीय जांच के लिए नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) की टीम को देहरादून भेजा गया है।
जांच में विमान की तकनीकी स्थिति, उड़ान से संबंधित रिकॉर्ड, मौसम की परिस्थितियों और अन्य जरूरी पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। हादसे के कारणों का स्पष्ट पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा।
एहतियात के तौर पर संबंधित कंपनी के हेलीकॉप्टर बेड़े को भी अस्थायी रूप से उड़ान से रोकने की जानकारी सामने आई है।
कर्नाटक के यात्रियों के परिजनों तक पहुंचाई जा रही जानकारी
हेलीकॉप्टर में सवार पांच यात्री कर्नाटक के रहने वाले थे। हादसे की खबर मिलने के बाद उनके परिवारों और परिचितों में शोक का माहौल है।
कर्नाटक सरकार भी उत्तराखंड प्रशासन के संपर्क में है। मृतकों के पार्थिव शरीर को उनके गृह राज्य तक पहुंचाने और परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए दोनों राज्यों के अधिकारी समन्वय कर रहे हैं।
इस दुखद घटना ने उन परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है, जिनके सदस्य धार्मिक यात्रा के बाद अपने घर लौट रहे थे।
पहाड़ी क्षेत्रों में हवाई सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर सेवाएं श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए महत्वपूर्ण परिवहन साधन हैं। केदारनाथ, बदरीनाथ और अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में कठिन सड़क मार्ग के कारण हवाई सेवाओं का उपयोग किया जाता है।
लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदलता है। बादल, बारिश, तेज हवाएं और कम दृश्यता उड़ान संचालन को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में विमानन कंपनियों और संबंधित एजेंसियों के लिए मौसम संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है।
जोशीमठ के पास हुई यह दुर्घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि पर्वतीय क्षेत्रों में हवाई सेवाओं का संचालन सुरक्षा मानकों और मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता दुर्घटनास्थल से सभी छह मृतकों के पार्थिव शरीरों को सुरक्षित तरीके से नीचे लाना, परिजनों को सहायता उपलब्ध कराना और हादसे की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है। दुर्घटना के वास्तविक कारणों का खुलासा जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।
