गाजा में इजरायली नियंत्रण को लेकर नेतन्याहू का बड़ा दावा, बोले- ‘हमें अभी और काम पूरा करना है’
नई दिल्ली। गाजा पट्टी में जारी संघर्ष के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बार फिर अपने सरकार के सैन्य और सुरक्षा लक्ष्य को लेकर कड़ा रुख सामने रखा है। गाजा की यात्रा के दौरान दिए गए अपने बयान में नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल उन इलाकों पर नियंत्रण बनाए हुए है, जहां उसकी सेनाएं तैनात हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य हमास को हथियारों से मुक्त करना और गाजा को सैन्य रूप से निष्क्रिय करना है।
नेतन्याहू ने अपने बयान में इजरायल के पूर्व रक्षा मंत्री और प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बेनी गैंट्ज का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गैंट्ज की ओर से गाजा से बाहर निकलने की सलाह को स्वीकार नहीं करना सही फैसला साबित हुआ। नेतन्याहू के मुताबिक, आज इजरायली सेना उन क्षेत्रों में अपनी स्थिति बनाए हुए है, जहां उसने नियंत्रण स्थापित किया है।

गाजा से पीछे हटने के सवाल पर नेतन्याहू का जवाब
नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है जब गाजा में इजरायल की सैन्य मौजूदगी, भविष्य की रणनीति और युद्ध के अंतिम लक्ष्य को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चा हो रही है। इजरायली प्रधानमंत्री ने अपने बयान में यह संदेश देने की कोशिश की कि उनकी सरकार फिलहाल सैन्य दबाव कम करने या अपने कब्जे वाले क्षेत्रों से पीछे हटने के पक्ष में नहीं है।
उन्होंने कहा कि अगर इजरायल पहले पीछे हट जाता, तो मौजूदा स्थिति पैदा नहीं होती। नेतन्याहू ने अपने राजनीतिक विरोधियों की उस सोच को भी चुनौती दी, जिसमें सैन्य अभियान को सीमित करने या गाजा से इजरायली सैनिकों की वापसी पर जोर दिया गया है।
उनका कहना है कि मौजूदा सैन्य स्थिति इजरायल को अपने घोषित उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में मदद कर रही है। हालांकि, इन दावों के साथ-साथ गाजा में मानवीय स्थिति और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता भी बनी हुई है।
‘अभी और काम पूरा करना बाकी’
नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि इजरायल का अभियान उनके अनुसार अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि अभी और काम पूरा किया जाना बाकी है और इसे तब तक जारी रखा जाएगा, जब तक हमास को निरस्त्र करने तथा गाजा को सैन्य रूप से निष्क्रिय करने के लक्ष्य को हासिल नहीं कर लिया जाता।
इजरायली सरकार लंबे समय से हमास की सैन्य क्षमता को खत्म करने को अपने प्रमुख युद्ध उद्देश्यों में शामिल करती रही है। नेतन्याहू ने इसी नीति को दोहराते हुए कहा कि उनका अंतिम उद्देश्य ऐसा गाजा सुनिश्चित करना है, जिससे इजरायल की सुरक्षा को भविष्य में सैन्य खतरा न रहे।
उनके बयान से यह भी संकेत मिलता है कि इजरायल वर्तमान सैन्य स्थिति को केवल अस्थायी उपलब्धि के रूप में नहीं देख रहा, बल्कि इसे आगे की रणनीति के लिए महत्वपूर्ण आधार मान रहा है।
गाजा के बड़े हिस्से पर नियंत्रण का दावा
नेतन्याहू ने इससे पहले भी गाजा के बड़े हिस्से पर इजरायली नियंत्रण का दावा किया है। हालिया रिपोर्टों में उनके हवाले से कहा गया है कि इजरायल लगभग 60 प्रतिशत गाजा क्षेत्र पर नियंत्रण रखता है और सेना अपनी मौजूदा स्थिति बनाए रखने की योजना पर काम कर रही है।
यह दावा संघर्ष के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण है, क्योंकि गाजा के क्षेत्रीय नियंत्रण का मुद्दा किसी भी संभावित राजनीतिक समझौते में केंद्रीय भूमिका निभा सकता है। इजरायल की ओर से सैन्य नियंत्रण बनाए रखने की नीति और फिलिस्तीनी पक्ष की राजनीतिक तथा क्षेत्रीय मांगों के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।
ऐसे में सैन्य अभियान के साथ-साथ कूटनीतिक बातचीत का रास्ता भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
बेनी गैंट्ज के साथ राजनीतिक मतभेद
नेतन्याहू द्वारा बेनी गैंट्ज का नाम लेना इजरायल की घरेलू राजनीति के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गैंट्ज इजरायल के प्रमुख विपक्षी नेताओं में शामिल रहे हैं और युद्ध के दौरान राष्ट्रीय एकता सरकार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।
युद्ध की रणनीति, बंधकों की वापसी और गाजा के युद्धोत्तर प्रशासन को लेकर इजरायल के राजनीतिक नेतृत्व में अलग-अलग विचार सामने आते रहे हैं। गैंट्ज ने अतीत में युद्ध के उद्देश्यों और आगे की राजनीतिक योजना को लेकर नेतन्याहू सरकार पर दबाव बनाया था। दूसरी ओर, नेतन्याहू सैन्य अभियान को निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति तक जारी रखने की नीति पर जोर देते रहे हैं।
इसी राजनीतिक मतभेद की पृष्ठभूमि में नेतन्याहू का ताजा बयान घरेलू राजनीति में भी चर्चा का विषय बन सकता है।
‘गाजा अब इजरायल के लिए खतरा नहीं बनेगा’
नेतन्याहू ने अपने बयान में कहा कि इजरायल का प्रयास हमास की हथियार क्षमता को समाप्त करने और गाजा को सैन्य रूप से निष्क्रिय बनाने का है। उनका दावा है कि इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद गाजा से इजरायल को सुरक्षा संबंधी खतरा नहीं रहेगा।
यह इजरायल की सुरक्षा नीति का एक प्रमुख हिस्सा है। हालांकि, इस लक्ष्य को किस प्रकार हासिल किया जाएगा और उसके बाद गाजा का प्रशासन कौन संभालेगा, यह सवाल अभी भी बेहद महत्वपूर्ण है।
युद्ध के बाद गाजा के शासन, पुनर्निर्माण, सुरक्षा व्यवस्था और फिलिस्तीनी राजनीतिक भविष्य को लेकर अलग-अलग प्रस्ताव सामने आते रहे हैं। इन मुद्दों पर इजरायल, फिलिस्तीनी नेतृत्व, अमेरिका तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय पक्षों के विचार पूरी तरह एक जैसे नहीं हैं।
युद्ध के साथ मानवीय चिंता भी गंभीर
गाजा में सैन्य संघर्ष के बीच आम नागरिकों की स्थिति भी अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बनी हुई है। संघर्ष के लंबे समय तक जारी रहने से विस्थापन, खाद्य संकट, स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी समस्याओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं चिंता जताती रही हैं।
इसलिए इजरायल की सैन्य रणनीति और उसके सुरक्षा लक्ष्यों पर चर्चा के साथ नागरिकों की सुरक्षा का सवाल भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। किसी भी दीर्घकालिक समाधान के लिए केवल सैन्य स्थिति ही नहीं, बल्कि मानवीय सहायता, पुनर्निर्माण और राजनीतिक व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी निर्णय लेना होगा।
युद्ध के भविष्य पर बढ़ी निगाहें
नेतन्याहू के ताजा बयान से यह स्पष्ट है कि इजरायली सरकार फिलहाल हमास के निरस्त्रीकरण और गाजा के सैन्यीकरण को समाप्त करने के लक्ष्य पर जोर दे रही है। प्रधानमंत्री ने यह संकेत दिया है कि मौजूदा सैन्य स्थिति को बनाए रखते हुए आगे की कार्रवाई जारी रखने की उनकी नीति है।
हालांकि, लंबे समय तक सैन्य नियंत्रण बनाए रखने की रणनीति के राजनीतिक और कूटनीतिक प्रभाव भी सामने आ सकते हैं। अमेरिका तथा अन्य देशों के साथ इजरायल के संबंध, गाजा के भविष्य को लेकर बातचीत और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे इस नीति से प्रभावित हो सकते हैं।
आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि सैन्य कार्रवाई, राजनीतिक बातचीत और मानवीय प्रयास किस दिशा में आगे बढ़ते हैं। गाजा में स्थायी शांति और सुरक्षा के लिए केवल युद्ध के मैदान पर नियंत्रण पर्याप्त होगा या नहीं, यह आने वाले समय का सबसे बड़ा प्रश्न बना हुआ है।
निष्कर्ष
बेंजामिन नेतन्याहू का गाजा से दिया गया ताजा संदेश इजरायल की मौजूदा रणनीति की दृढ़ता को दर्शाता है। उन्होंने अपने आलोचकों और राजनीतिक विरोधियों की वापसी संबंधी सोच को खारिज करते हुए कहा है कि इजरायल अपने निर्धारित उद्देश्यों को पूरा करने तक पीछे नहीं हटेगा।
उनका मुख्य जोर हमास को निरस्त्र करने, गाजा को सैन्य रूप से निष्क्रिय करने और इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है। वहीं, गाजा की मानवीय स्थिति, युद्ध के बाद की राजनीतिक व्यवस्था और क्षेत्र में स्थायी शांति की संभावना ऐसे प्रश्न हैं जिनका समाधान सैन्य रणनीति से आगे जाकर राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर तलाशना होगा।
इसलिए नेतन्याहू का यह बयान केवल एक सैन्य दावे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गाजा के भविष्य, इजरायल की सुरक्षा नीति और पूरे पश्चिम एशिया की राजनीतिक दिशा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण संदेश भी माना जा रहा है।