पृथ्वी की कक्षा: क्या है, कैसे काम करती है और इसका महत्व

0

पृथ्वी सौरमंडल का एक महत्वपूर्ण ग्रह है और सूर्य के चारों ओर लगातार गतिशील रहती है। पृथ्वी जिस निश्चित पथ पर सूर्य की परिक्रमा करती है, उसे पृथ्वी की कक्षा कहा जाता है। सामान्य रूप से कक्षा को एक गोलाकार मार्ग समझा जाता है, लेकिन वास्तव में पृथ्वी की कक्षा पूरी तरह गोल नहीं बल्कि थोड़ी अंडाकार यानी दीर्घवृत्ताकार होती है। पृथ्वी की यह गति सूर्य के गुरुत्वाकर्षण और पृथ्वी की अपनी गति के बीच संतुलन का परिणाम है।

पृथ्वी की कक्षा को समझना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे हमें दिन-रात, ऋतुओं, वर्ष की अवधि, सूर्य से पृथ्वी की दूरी में होने वाले बदलाव और सौरमंडल की गतिशीलता को समझने में मदद मिलती है।

पृथ्वी की कक्षा क्या होती है?

किसी खगोलीय पिंड द्वारा दूसरे पिंड के चारों ओर गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में तय किए जाने वाले मार्ग को उसकी कक्षा कहा जाता है। पृथ्वी सूर्य के चारों ओर लगभग 15 करोड़ किलोमीटर की औसत दूरी पर घूमती है। पृथ्वी और सूर्य के बीच की औसत दूरी को लगभग 1 खगोलीय इकाई (Astronomical Unit या AU) माना जाता है।

पृथ्वी की कक्षा का आकार दीर्घवृत्ताकार है। इस दीर्घवृत्त के दो केंद्रों में से एक पर सूर्य स्थित होता है। इसी कारण सूर्य से पृथ्वी की दूरी पूरे वर्ष बिल्कुल समान नहीं रहती।

पृथ्वी अपनी कक्षा में सूर्य की परिक्रमा पश्चिम से पूर्व दिशा में करती है। सौरमंडल के अधिकांश ग्रह भी सूर्य की परिक्रमा इसी सामान्य दिशा में करते हैं।

पृथ्वी की कक्षा का आकार

पृथ्वी की कक्षा बहुत कम अंडाकार है। इसलिए देखने में यह लगभग गोल दिखाई देती है। पृथ्वी और सूर्य के बीच दूरी में वर्ष के दौरान थोड़ा बदलाव आता है।

जब पृथ्वी सूर्य के सबसे निकट होती है, उस स्थिति को उपसौर (Perihelion) कहा जाता है। इसके विपरीत, जब पृथ्वी सूर्य से सबसे अधिक दूर होती है, तो उस स्थिति को अपसौर (Aphelion) कहा जाता है।

उपसौर और अपसौर की स्थिति के कारण सूर्य से पृथ्वी की दूरी में कुछ अंतर आता है। हालांकि यह अंतर ऋतुओं का मुख्य कारण नहीं है। पृथ्वी पर ऋतुओं का प्रमुख कारण पृथ्वी की धुरी का लगभग 23.5 डिग्री झुका होना है।

पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा कितने समय में करती है?

पृथ्वी को सूर्य की एक पूरी परिक्रमा करने में लगभग 365 दिन और लगभग 6 घंटे लगते हैं। इसी अतिरिक्त समय के कारण हर चार वर्ष के आसपास एक अतिरिक्त दिन कैलेंडर में जोड़ा जाता है। इस वर्ष को अधिवर्ष या लीप वर्ष कहा जाता है और इसमें फरवरी के महीने में 29 दिन होते हैं।

पृथ्वी की कक्षा में सूर्य के चारों ओर घूमने की औसत गति लगभग 29.8 किलोमीटर प्रति सेकंड है। यानी पृथ्वी अंतरिक्ष में बहुत तेज गति से आगे बढ़ रही है, फिर भी हमें इसका एहसास नहीं होता क्योंकि हम भी पृथ्वी के साथ उसी गति से गतिमान हैं।

पृथ्वी की कक्षा और गुरुत्वाकर्षण

पृथ्वी की कक्षा को बनाए रखने में सूर्य के गुरुत्वाकर्षण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सूर्य का द्रव्यमान पृथ्वी की तुलना में बहुत अधिक है, इसलिए उसका गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी को अपनी ओर आकर्षित करता है।

दूसरी ओर, पृथ्वी में सूर्य की ओर सीधे गिरने के बजाय आगे बढ़ने की गति भी होती है। इन दोनों प्रभावों के कारण पृथ्वी सूर्य के चारों ओर कक्षा में बनी रहती है।

इसे सरल उदाहरण से समझा जा सकता है। यदि पृथ्वी के पास सूर्य का गुरुत्वाकर्षण न होता, तो पृथ्वी अपनी गति के कारण सीधी दिशा में अंतरिक्ष में आगे बढ़ती रहती। वहीं यदि पृथ्वी की आगे की गति न होती, तो वह सूर्य की ओर गिरने लगती। गुरुत्वाकर्षण और गति का संतुलन पृथ्वी को उसकी कक्षा में बनाए रखता है।

पृथ्वी की कक्षा और ऋतुएं

पृथ्वी की कक्षा का ऋतुओं से संबंध है, लेकिन ऋतुओं का वास्तविक मुख्य कारण पृथ्वी की धुरी का झुकाव है। पृथ्वी की धुरी अपनी कक्षीय सतह के लंबवत लगभग 23.5 डिग्री झुकी हुई है।

जब पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है, तो वर्ष के अलग-अलग समय पर पृथ्वी के उत्तरी और दक्षिणी गोलार्धों को सूर्य की किरणें अलग-अलग कोणों पर प्राप्त होती हैं। इसी कारण तापमान और दिन-रात की अवधि में परिवर्तन होता है और ऋतुओं का निर्माण होता है।

जब उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर झुका होता है, तब वहां गर्मी का मौसम होता है, जबकि उसी समय दक्षिणी गोलार्ध में सर्दी होती है। लगभग छह महीने बाद स्थिति इसके विपरीत हो जाती है।

इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि गर्मी इसलिए आती है क्योंकि पृथ्वी सूर्य के ज्यादा पास चली जाती है। ऋतुओं का मुख्य कारण पृथ्वी की धुरी का झुकाव और सूर्य के चारों ओर उसकी परिक्रमा है।

पृथ्वी की कक्षा और दिन-रात

पृथ्वी की कक्षा और पृथ्वी का घूर्णन दो अलग-अलग गतियां हैं। पृथ्वी अपनी धुरी पर लगभग 24 घंटे में एक चक्कर पूरा करती है। इस गति को घूर्णन कहा जाता है। इसी के कारण दिन और रात होते हैं।

दूसरी ओर, पृथ्वी सूर्य के चारों ओर लगभग एक वर्ष में एक चक्कर लगाती है। इसे परिक्रमण कहा जाता है।

इस प्रकार पृथ्वी की दो प्रमुख गतियां हैं—अपनी धुरी पर घूर्णन और सूर्य के चारों ओर परिक्रमण। इन दोनों गतियों का पृथ्वी पर जीवन और प्राकृतिक परिस्थितियों पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

पृथ्वी की कक्षा में गति समान नहीं होती

पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करते समय पूरे वर्ष बिल्कुल एक समान गति से नहीं चलती। इसका संबंध पृथ्वी की अंडाकार कक्षा से है। सूर्य के अपेक्षाकृत पास होने पर पृथ्वी की कक्षीय गति कुछ अधिक होती है और सूर्य से दूर होने पर यह कुछ कम हो जाती है।

इस घटना को ग्रहों की गति के नियमों से समझाया जाता है। पृथ्वी सूर्य के गुरुत्वाकर्षण के कारण अपनी कक्षा में लगातार गतिशील रहती है और उसकी गति तथा दूरी में होने वाले बदलाव एक निश्चित भौतिक नियम का पालन करते हैं।

पृथ्वी की कक्षा का वैज्ञानिक महत्व

पृथ्वी की कक्षा का अध्ययन खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष विज्ञान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। वैज्ञानिक पृथ्वी की कक्षा को समझकर ग्रहों की गति, अंतरिक्ष यान की यात्रा, उपग्रहों की स्थिति और सौरमंडल की संरचना का अध्ययन करते हैं।

अंतरिक्ष अभियानों में किसी यान को एक ग्रह से दूसरे ग्रह तक भेजने के लिए कक्षाओं की गणना बहुत सावधानी से की जाती है। पृथ्वी की कक्षा की सही जानकारी के बिना उपग्रहों और अंतरिक्ष यानों की दिशा तथा समय का निर्धारण करना कठिन होगा।

पृथ्वी की कक्षा से संबंधित अध्ययन मौसम विज्ञान और जलवायु विज्ञान में भी उपयोगी हैं। सूर्य से मिलने वाली ऊर्जा में होने वाले बदलाव तथा पृथ्वी की स्थिति को समझने से वैज्ञानिक पृथ्वी की जलवायु और दीर्घकालिक प्राकृतिक प्रक्रियाओं का अध्ययन कर सकते हैं।

पृथ्वी की कक्षा और उपग्रह

पृथ्वी के चारों ओर अनेक कृत्रिम उपग्रह अलग-अलग कक्षाओं में घूमते हैं। मौसम की जानकारी, संचार, नेविगेशन, पृथ्वी का निरीक्षण और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे कार्यों के लिए इन उपग्रहों का उपयोग किया जाता है।

पृथ्वी की अपनी सूर्य-कक्षा और कृत्रिम उपग्रहों की पृथ्वी-कक्षाएं अलग-अलग होती हैं। उपग्रहों की कक्षा का चुनाव उनके उद्देश्य के अनुसार किया जाता है।

क्या पृथ्वी की कक्षा हमेशा ऐसी ही रहेगी?

पृथ्वी की कक्षा वर्तमान में स्थिर दिखाई देती है, लेकिन खगोलीय स्तर पर इसमें बहुत छोटे बदलाव समय के साथ होते रहते हैं। सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव पृथ्वी की गति और कक्षीय स्थिति को लंबे समय में थोड़ा प्रभावित कर सकते हैं।

हालांकि ये परिवर्तन मानव जीवन की सामान्य समय-सीमा में बहुत छोटे होते हैं। इसलिए पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर परिक्रमा लंबे समय तक जारी रहने वाली एक स्थिर खगोलीय प्रक्रिया है।

निष्कर्ष

पृथ्वी की कक्षा हमारे ग्रह की सबसे महत्वपूर्ण खगोलीय विशेषताओं में से एक है। पृथ्वी सूर्य के चारों ओर एक थोड़ी अंडाकार कक्षा में लगभग 365 दिन और कुछ अतिरिक्त घंटों में एक परिक्रमा पूरी करती है। सूर्य का गुरुत्वाकर्षण और पृथ्वी की गति मिलकर उसे इस कक्षा में बनाए रखते हैं।

पृथ्वी की कक्षा को समझने से हमें ऋतुओं, वर्ष की अवधि, सूर्य-पृथ्वी की दूरी, ग्रहों की गति और अंतरिक्ष अभियानों जैसी अनेक वैज्ञानिक घटनाओं को समझने में सहायता मिलती है। पृथ्वी का घूर्णन जहां दिन और रात का कारण बनता है, वहीं सूर्य के चारों ओर उसका परिक्रमण वर्ष और ऋतु चक्र को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इस प्रकार पृथ्वी की कक्षा केवल अंतरिक्ष में एक मार्ग नहीं है, बल्कि यह पृथ्वी पर जीवन की परिस्थितियों और सौरमंडल की गतिशील व्यवस्था को समझने की एक महत्वपूर्ण कुंजी है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

इन्हे भी देखें