लखनऊ में 68,500 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का बड़ा प्रदर्शन, मंत्री आशीष पटेल के आवास का किया घेराव; नियुक्ति की मांग पर अड़े अभ्यर्थी
रिपोर्ट: लखनऊ ब्यूरो |हिट एंड हॉट न्यूज़

Lucknow News Today, 3 November 2026: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती का मामला एक बार फिर गरमा गया है। लंबे समय से नियुक्ति की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे अभ्यर्थियों ने मंगलवार को कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल के आवास के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए भर्ती प्रक्रिया में कथित आरक्षण अनियमितताओं को दूर करने और नियुक्ति का रास्ता साफ करने की मांग उठाई।
आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्ष 2018 में शुरू हुई इस भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के कारण हजारों योग्य उम्मीदवारों का भविष्य प्रभावित हुआ है। कई वर्षों से न्याय और नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे अभ्यर्थी अब सरकार से ठोस निर्णय चाहते हैं।
मंत्री आवास के बाहर अभ्यर्थियों का जोरदार प्रदर्शन
मंगलवार को बड़ी संख्या में शिक्षक भर्ती अभ्यर्थी लखनऊ में मंत्री आशीष पटेल के आवास पर पहुंच गए। यहां प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की और मंत्री से मुलाकात करने की मांग की। कुछ अभ्यर्थियों ने आवास के मुख्य दरवाजे की घंटी बजाकर अपनी बात सुनने की अपील की, जबकि कुछ प्रदर्शनकारी सड़क पर लेटकर विरोध जताते नजर आए।
प्रदर्शन के दौरान काफी देर तक माहौल गर्म रहा। मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। बाद में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाकर हिरासत में लिया और उन्हें ईको गार्डन भेज दिया।
68,500 शिक्षक भर्ती में आरक्षण नियमों के उल्लंघन का आरोप

अभ्यर्थियों का प्रमुख आरोप है कि 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण व्यवस्था को सही तरीके से लागू नहीं किया गया। उनका दावा है कि भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण संबंधी नियमों की अनदेखी हुई, जिसके चलते कई पात्र अभ्यर्थियों को चयन और नियुक्ति से वंचित रहना पड़ा।
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) की ओर से दिए गए निर्देशों का नियमानुसार पालन किया जाए। साथ ही भर्ती से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा कर पात्र अभ्यर्थियों को न्याय दिया जाए।
अभ्यर्थियों की तीन प्रमुख मांगें
आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने सरकार के सामने अपनी मांगें दोहराई हैं।
- भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण संबंधी कथित विसंगतियों को दूर करते हुए आयोग के निर्देशों का पालन किया जाए।
- निर्धारित परीक्षा उत्तीर्णांक में पांच प्रतिशत की छूट देने की मांग पर उचित निर्णय लिया जाए।
- नियमों के अनुसार संशोधित चयन सूची जारी कर पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जाए।
अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर स्पष्ट और लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
आठ साल से नियुक्ति की आस में बैठे अभ्यर्थी
इस भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों का संघर्ष अब करीब आठ साल पुराना हो चुका है। वर्ष 2018 में शुरू हुई 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़े कई उम्मीदवार आज भी नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इतने लंबे समय में उन्होंने अधिकारियों, विभागीय कार्यालयों और जनप्रतिनिधियों के चक्कर लगाए हैं, लेकिन उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। अभ्यर्थियों के मुताबिक, लगातार आंदोलन और कानूनी लड़ाई ने उनके आर्थिक और मानसिक जीवन को भी प्रभावित किया है।
सितंबर की बैठक के बाद भी नहीं निकला समाधान
अभ्यर्थियों के अनुसार, सितंबर 2026 में बेसिक शिक्षा मंत्री और माध्यमिक शिक्षा मंत्री के साथ हुई बैठक में भी भर्ती से संबंधित आरक्षण विसंगतियों का मुद्दा उठाया गया था। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि बैठक के दौरान अधिकारियों की ओर से भी कुछ अनियमितताओं पर चर्चा की गई थी।
हालांकि, अभ्यर्थियों का कहना है कि बैठक के बाद भी नियुक्ति को लेकर कोई स्पष्ट समयसीमा या आधिकारिक कार्यक्रम सामने नहीं आया। इसी वजह से उम्मीदवारों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
64 दिनों से अधिक समय से जारी है आंदोलन
अभ्यर्थियों का दावा है कि वे पिछले 64 दिनों से अधिक समय से लगातार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि कई बार अधिकारियों और सरकार के प्रतिनिधियों के सामने अपनी बात रखने के बावजूद उन्हें केवल आश्वासन मिले हैं।
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सरकार अब और देरी किए बिना भर्ती विवाद का समाधान करे और नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने के लिए आधिकारिक कार्यक्रम जारी करे।
अब सरकार के फैसले पर टिकी अभ्यर्थियों की निगाहें
लखनऊ में मंगलवार को हुए प्रदर्शन ने एक बार फिर 68,500 शिक्षक भर्ती विवाद को चर्चा में ला दिया है। अभ्यर्थी चाहते हैं कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करे और आरक्षण संबंधी शिकायतों का नियमों के तहत निस्तारण करे।
फिलहाल अभ्यर्थियों को नियुक्ति के संबंध में किसी नए आधिकारिक आदेश या निश्चित समयसीमा का इंतजार है। अब देखना होगा कि सरकार इस लंबे समय से चल रहे विवाद पर क्या कदम उठाती है और हजारों अभ्यर्थियों को राहत देने के लिए कब तक कोई ठोस निर्णय सामने आता है।
नोट: भर्ती में आरक्षण संबंधी अनियमितताओं, आयोगों के निर्देशों और अधिकारियों की बैठक में कथित स्वीकारोक्ति से जुड़े दावे प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के बयानों पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
