श्रीलंका में पूर्व राष्ट्रपति के बेटे नमल राजपक्षे की गिरफ्तारी, एयरबस सौदे से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में 18 सितंबर तक रिमांड
कोलंबो, 5 सितंबर 2026: श्रीलंका की राजनीति में उस समय बड़ा घटनाक्रम सामने आया जब…
कोलंबो, 5 सितंबर 2026: श्रीलंका की राजनीति में उस समय बड़ा घटनाक्रम सामने आया जब पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के बेटे और विपक्षी सांसद नमल राजपक्षे को कथित भ्रष्टाचार के एक मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। मामला श्रीलंका की राष्ट्रीय विमानन कंपनी SriLankan Airlines के लिए एयरबस विमानों की खरीद से जुड़े पुराने लेनदेन की जांच से संबंधित है। गिरफ्तारी के बाद कोलंबो के मुख्य मजिस्ट्रेट ने नमल राजपक्षे को 18 सितंबर 2026 तक रिमांड पर भेजने का आदेश दिया।
नमल राजपक्षे ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया और वह कानूनी प्रक्रिया का सामना करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।

पांच घंटे से अधिक चली पूछताछ के बाद गिरफ्तारी
रिपोर्टों के अनुसार, नमल राजपक्षे को श्रीलंका की प्रमुख भ्रष्टाचार-रोधी संस्था Commission to Investigate Allegations of Bribery or Corruption (CIABOC) के सामने पूछताछ के लिए बुलाया गया था। वहां उनसे पांच घंटे से अधिक समय तक पूछताछ हुई। इसके बाद अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार किया और अदालत के समक्ष पेश किया।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब श्रीलंका में पुराने भ्रष्टाचार मामलों की जांच को लेकर सरकार और जांच एजेंसियों की गतिविधियां तेज हुई हैं। नमल राजपक्षे की गिरफ्तारी ने देश की राजनीति में भी व्यापक चर्चा पैदा कर दी है, क्योंकि वह पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के बेटे होने के साथ-साथ विपक्षी दल Sri Lanka Podujana Peramuna (SLPP) के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं।
अदालत द्वारा रिमांड की अवधि 18 सितंबर तक तय किए जाने के बाद अब जांच एजेंसियों के सामने मामले से जुड़े दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और अन्य सबूतों की जांच आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है।
क्या है एयरबस खरीद से जुड़ा मामला?
मामले की जड़ वर्ष 2013 में SriLankan Airlines के लिए एयरबस विमानों की खरीद से जुड़े एक बड़े सौदे में बताई जाती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एयरबस के विमान बिक्री से संबंधित भ्रष्टाचार के आरोपों की पहले भी जांच हो चुकी है। श्रीलंका में चल रही जांच इसी व्यापक प्रकरण से जुड़े कुछ कथित वित्तीय लेनदेन पर केंद्रित है।
श्रीलंका की भ्रष्टाचार-रोधी संस्था के अनुसार, जांच में कथित तौर पर करीब 100 मिलियन श्रीलंकाई रुपये की रिश्वत से संबंधित आरोपों की पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसी ने वित्तीय लेनदेन के संबंध में विदेशी बैंक खातों और कंपनियों से जुड़े दस्तावेजों का भी उल्लेख किया है।
स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, जांच में एक श्रीलंकाई कारोबारी के बयानों के साथ-साथ एयरबस से जुड़े अधिकारियों से मिली जानकारी और इलेक्ट्रॉनिक तथा अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों को भी शामिल किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम सत्यता अदालत में निर्धारित होना बाकी है।
कथित रकम और वित्तीय लेनदेन की जांच
CIABOC की जांच में एक कथित रिश्वत लेनदेन का उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, संबंधित मामले में लगभग 1.45 मिलियन यूरो की कथित रिश्वत राशि का उल्लेख है और इसमें 8 लाख अमेरिकी डॉलर के एक लेनदेन की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का आरोप है कि धनराशि पहले सिंगापुर स्थित एक खाते में पहुंची और बाद में उससे जुड़ी दूसरी कंपनी के खाते में स्थानांतरित की गई।
जांच एजेंसी का दावा है कि उपलब्ध सामग्री में संबंधित कारोबारी के बयान, फ्रांस में एयरबस अधिकारियों से प्राप्त जानकारी तथा अन्य दस्तावेज शामिल हैं। इन तथ्यों की स्वतंत्र न्यायिक जांच और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से पुष्टि होना अभी बाकी है। इसलिए आरोपों को इस समय सिद्ध अपराध के रूप में नहीं देखा जा सकता।
नमल राजपक्षे का क्या कहना है?
नमल राजपक्षे ने लगातार किसी भी गलत काम से इनकार किया है। गिरफ्तारी से पहले उन्होंने जांच एजेंसी के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया। मीडिया से बातचीत के दौरान भी उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है और वह किसी भी स्वतंत्र जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं।
गिरफ्तारी के बाद जारी अपने बयान में राजपक्षे ने कहा कि यदि उनके खिलाफ कोई सबूत है तो निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अदालत किसी तरह की गलती या अपराध साबित करती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने जांच में राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होने और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का सम्मान किए जाने की बात कही।
उनके बयान से स्पष्ट है कि वह कानूनी प्रक्रिया को चुनौती देने के साथ-साथ अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों का राजनीतिक और कानूनी स्तर पर मुकाबला करने की तैयारी में हैं।
महिंदा राजपक्षे परिवार पर फिर उठे सवाल
नमल राजपक्षे की गिरफ्तारी ने श्रीलंका के राजपक्षे परिवार को एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी बहस के केंद्र में ला दिया है। महिंदा राजपक्षे वर्ष 2005 से 2015 तक श्रीलंका के राष्ट्रपति रहे थे। उनके कार्यकाल के दौरान देश में बड़े बुनियादी ढांचा और आर्थिक प्रोजेक्ट शुरू हुए, लेकिन उनके परिवार और सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगते रहे हैं।
नमल राजपक्षे इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते रहे हैं। वर्तमान घटनाक्रम में भी उनकी ओर से निष्पक्ष जांच और कानून के शासन पर जोर दिया गया है। दूसरी ओर, जांच एजेंसियां यह स्पष्ट करने की कोशिश कर रही हैं कि विमान खरीद से जुड़े वित्तीय लेनदेन में किसी तरह की अवैध राशि का भुगतान हुआ था या नहीं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एयरबस सौदे की पृष्ठभूमि
इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि एयरबस की वैश्विक विमान बिक्री से संबंधित भ्रष्टाचार आरोपों की जांच पहले अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने भी की थी। वर्ष 2020 में एयरबस ने फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका के अधिकारियों के साथ एक समझौता किया था। तीन देशों की जांच के बाद कंपनी ने भ्रष्टाचार और रिश्वत संबंधी आरोपों के निपटारे के लिए लगभग 4 अरब डॉलर का भुगतान करने पर सहमति जताई थी।
श्रीलंका में चल रही जांच इसी व्यापक अंतरराष्ट्रीय पृष्ठभूमि के बीच आगे बढ़ रही है। अगस्त 2026 में एयरबस का एक प्रतिनिधिमंडल जांच में सहयोग करने के लिए कोलंबो भी गया था।
हालांकि, किसी कंपनी या व्यक्ति के खिलाफ किसी एक मामले में आरोप या जांच का होना अपने आप में अपराध सिद्ध नहीं करता। श्रीलंका की मौजूदा जांच का उद्देश्य कथित लेनदेन और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका के बारे में तथ्य स्थापित करना है।
SriLankan Airlines की आर्थिक स्थिति भी चर्चा में
यह मामला श्रीलंका की राष्ट्रीय विमानन कंपनी SriLankan Airlines की लंबे समय से चली आ रही वित्तीय चुनौतियों के बीच सामने आया है। कंपनी पर भारी वित्तीय दबाव रहा है और इसे निजीकरण या पुनर्गठन के प्रयासों का भी सामना करना पड़ा है।
ऐसे में पुराने विमान खरीद सौदों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार की जांच का महत्व और बढ़ जाता है। विमान खरीद जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय सौदों में सार्वजनिक धन और राष्ट्रीय संपत्तियों का इस्तेमाल होता है। इसलिए किसी भी कथित अनियमितता की निष्पक्ष जांच जनता के विश्वास और सरकारी संस्थाओं की जवाबदेही के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
आगे क्या होगा?
नमल राजपक्षे को 18 सितंबर तक रिमांड पर भेजे जाने के बाद जांच आगे बढ़ने की संभावना है। इस दौरान अधिकारी वित्तीय दस्तावेजों, बैंक लेनदेन, संबंधित कंपनियों और गवाहों के बयानों की पड़ताल कर सकते हैं। इसके बाद अदालत के सामने मामले की आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जांच अभी जारी है और नमल राजपक्षे पर लगाए गए आरोप अदालत में अंतिम रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं। उन्हें अपना पक्ष रखने और कानूनी प्रक्रिया के तहत बचाव करने का अधिकार है।
निष्कर्ष
श्रीलंका में नमल राजपक्षे की गिरफ्तारी ने देश की राजनीति, भ्रष्टाचार-रोधी व्यवस्था और SriLankan Airlines से जुड़े पुराने विमान खरीद सौदों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। 2013 के एयरबस सौदे से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन की जांच अब एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है।
नमल राजपक्षे ने सभी गलत कामों से इनकार किया है और निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, CIABOC का कहना है कि उसके पास जांच को आगे बढ़ाने के लिए बयान, दस्तावेज और अन्य साक्ष्य मौजूद हैं। अब आने वाले दिनों में अदालत और जांच एजेंसियों की कार्रवाई यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।
फिलहाल 18 सितंबर की तारीख महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसी समय तक नमल राजपक्षे की रिमांड तय की गई है। इस मामले का आगे का घटनाक्रम न केवल राजपक्षे परिवार की राजनीतिक स्थिति बल्कि श्रीलंका में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।