जुलाई 21, 2026

कतरनियाघाट में दिखीं गंगा डॉल्फिन की अठखेलियां, कैमरे में कैद हुआ मनमोहक दृश्य

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अमृत पाल बहराइच

संवाददाता हिट एंड हॉट न्यूज़

बहराइच। उत्तर प्रदेश के कतरनियाघाट वन्यजीव अभयारण्य से प्रकृति प्रेमियों के लिए एक सुखद खबर सामने आई है। कैलाशपुरी स्थित घाघरा बैराज के पास नदी में गंगा डॉल्फिन का मनमोहक नज़ारा देखने को मिला। यह दुर्लभ पल उस समय कैमरे में कैद हो गया, जब स्थानीय रिपोर्टर अमृत पाल सिंह अपने साथियों के साथ क्षेत्र का भ्रमण कर रहे थे।

नदी की लहरों में डॉल्फिन की अठखेलियां

घाघरा नदी के तेज बहाव के बीच अचानक गंगा डॉल्फिन पानी की सतह पर उभरती और फिर लहरों में ओझल होती दिखाई दी। कई बार उसकी छलांगों ने वहां मौजूद लोगों को रोमांचित कर दिया। इस खूबसूरत दृश्य को अमृत पाल सिंह ने अपने कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग इसे खूब पसंद कर रहे हैं और कतरनियाघाट की प्राकृतिक समृद्धि की सराहना कर रहे हैं।

स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत

विशेषज्ञों के अनुसार गंगा डॉल्फिन केवल अपेक्षाकृत स्वच्छ और पर्याप्त जल प्रवाह वाली नदियों में ही पाई जाती है। ऐसे में घाघरा नदी में इसकी मौजूदगी इस क्षेत्र के बेहतर पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता का सकारात्मक संकेत मानी जाती है। गंगा डॉल्फिन भारत की राष्ट्रीय जलीय जीव है और इसे स्थानीय भाषा में “सूसु” भी कहा जाता है।

कतरनियाघाट की प्राकृतिक पहचान

कतरनियाघाट वन्यजीव अभयारण्य अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए देशभर में जाना जाता है। यहां घड़ियाल, मगरमच्छ, अनेक प्रवासी पक्षी और कई दुर्लभ वन्यजीवों के साथ गंगा डॉल्फिन भी प्राकृतिक आवास में देखी जा सकती है। यही कारण है कि यह क्षेत्र वन्यजीव प्रेमियों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

संरक्षण प्रयासों को मिल रहा सकारात्मक परिणाम

स्थानीय लोगों का मानना है कि नदी और वन क्षेत्र के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का असर अब स्पष्ट दिखाई देने लगा है। डॉल्फिन का लगातार दिखाई देना इस बात का संकेत है कि प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने की दिशा में किए जा रहे प्रयास सफल हो रहे हैं। पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि नदियों को प्रदूषण, अवैध शिकार और अतिक्रमण से बचाया जाए तो गंगा डॉल्फिन जैसी दुर्लभ प्रजातियों का भविष्य और अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है।

प्रकृति संरक्षण का प्रेरक संदेश

कतरनियाघाट में गंगा डॉल्फिन का यह मनोहारी दृश्य केवल एक सुंदर प्राकृतिक घटना नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश भी देता है। स्वच्छ नदियां, सुरक्षित वन क्षेत्र और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र ही ऐसे दुर्लभ जीवों के अस्तित्व की सबसे बड़ी गारंटी हैं। यह दृश्य हमें याद दिलाता है कि प्रकृति की रक्षा करना केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की साझा जिम्मेदारी है।

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