बीआरओ की परियोजना ब्रह्मांक ने मनाया 16वां स्थापना दिवस, अरुणाचल प्रदेश में रणनीतिक संपर्क और सीमाई विकास के 15 वर्ष पूरे

राणाघाट (अरुणाचल प्रदेश), 29 जून 2026। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की परियोजना ब्रह्मांक (Project Brahmank) ने 29 जून 2026 को अरुणाचल प्रदेश के राणाघाट में अपना 16वां स्थापना दिवस उत्साह और गरिमा के साथ मनाया। यह अवसर पूर्वोत्तर भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक सड़क अवसंरचना के विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में परियोजना द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण योगदान का प्रतीक रहा।
पंद्रह वर्षों की उल्लेखनीय सेवा
स्थापना दिवस समारोह के दौरान परियोजना ब्रह्मांक की पिछले 15 वर्षों की उपलब्धियों को याद किया गया। इस अवधि में परियोजना ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों और चुनौतीपूर्ण मौसम के बावजूद सड़क निर्माण, पुलों के विकास और संपर्क सुविधाओं को मजबूत करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।
बीआरओ के अधिकारियों ने कहा कि परियोजना ब्रह्मांक ने सीमावर्ती क्षेत्रों में आधुनिक सड़क नेटवर्क तैयार कर न केवल सेना की परिचालन क्षमता को सुदृढ़ किया है, बल्कि स्थानीय नागरिकों के जीवन को भी आसान बनाया है।
किन क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभालती है परियोजना ब्रह्मांक
परियोजना ब्रह्मांक अरुणाचल प्रदेश के कई संवेदनशील और रणनीतिक जिलों में सड़क अवसंरचना के निर्माण, उन्नयन और रखरखाव की जिम्मेदारी निभाती है। इसके अंतर्गत प्रमुख रूप से निम्नलिखित क्षेत्र आते हैं—
- सियांग जिला
- पूर्वी सियांग जिला
- पश्चिमी सियांग जिला
- ऊपरी सियांग जिला
- शि-योमी जिला
- असम के धेमाजी जिले के कुछ हिस्से
इन क्षेत्रों में सड़क संपर्क बनाए रखना राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण
अरुणाचल प्रदेश भारत के सबसे संवेदनशील सीमावर्ती राज्यों में शामिल है। यहां विकसित की जा रही सड़कें भारतीय सशस्त्र बलों की त्वरित आवाजाही, आपूर्ति व्यवस्था और सीमाई सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
बीआरओ द्वारा विकसित सड़क नेटवर्क से सीमा क्षेत्रों तक पहुंच पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हुई है, जिससे रक्षा तैयारियों के साथ-साथ आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों में भी तेजी आई है।
स्थानीय विकास को भी मिला बढ़ावा
परियोजना ब्रह्मांक का योगदान केवल सामरिक दृष्टि तक सीमित नहीं है। बेहतर सड़क संपर्क से दूरस्थ गांवों के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान हुई है।
सड़क अवसंरचना के विकास से—
- स्थानीय कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंच मिली।
- पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिला।
- रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हुए।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली।
- आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता बेहतर हुई।
कठिन परिस्थितियों में उत्कृष्ट कार्य
बीआरओ के इंजीनियर, तकनीकी विशेषज्ञ और कर्मचारी अत्यधिक वर्षा, भूस्खलन, ऊंचे पर्वतीय इलाकों तथा चुनौतीपूर्ण मौसम के बीच लगातार कार्य करते हैं। इन कठिन परिस्थितियों में सड़क निर्माण और रखरखाव का कार्य अत्यंत चुनौतीपूर्ण माना जाता है, फिर भी परियोजना ब्रह्मांक ने लगातार अपने दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया है।
स्थापना दिवस समारोह
16वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में परियोजना के अधिकारियों, कर्मचारियों तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। इस दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित भी किया गया। समारोह में परियोजना की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए भविष्य में सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और बेहतर संपर्क व्यवस्था के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प दोहराया गया।
राष्ट्रीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका
सीमा सड़क संगठन भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे के निर्माण की अग्रणी संस्था है। परियोजना ब्रह्मांक इसके महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक है, जिसने पिछले डेढ़ दशक में पूर्वोत्तर भारत में रणनीतिक सड़क नेटवर्क को मजबूत बनाने में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
निष्कर्ष
परियोजना ब्रह्मांक का 16वां स्थापना दिवस केवल एक संगठनात्मक उपलब्धि नहीं, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और बेहतर संपर्क व्यवस्था के प्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। पिछले 15 वर्षों में परियोजना ने अरुणाचल प्रदेश और असम के दुर्गम इलाकों में आधुनिक सड़क अवसंरचना विकसित कर न केवल सामरिक तैयारियों को मजबूती दी है, बल्कि स्थानीय लोगों के सामाजिक और आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आने वाले वर्षों में भी परियोजना ब्रह्मांक से सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा को और अधिक सशक्त बनाने की अपेक्षा की जा रही है।
