भारतीय नौसेना को मिली नई ताकत: एंटी-सबमरीन शैलो वाटरक्राफ्ट ‘मछलीपट्टनम’ (BY 529) का हुआ जलावतरण
### **Expert Take**
**‘मछलीपट्टनम’ (BY 529) का जलावतरण केवल एक नए युद्धपोत का शामिल होना नहीं, बल्कि भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति और स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता की निरंतर प्रगति का संकेत है। एंटी-सबमरीन शैलो वाटरक्राफ्ट (ASW SWC) जैसे पोत तटीय और उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी अभियानों को अधिक प्रभावी बनाएंगे। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा इन जहाजों का स्वदेशी निर्माण ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूती देता है। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती सामरिक चुनौतियों के बीच ऐसे आधुनिक युद्धपोत भारतीय नौसेना की निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया और समुद्री प्रतिरोधक क्षमता (Maritime Deterrence) को और सशक्त करेंगे।**

भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। 29 जुलाई 2026 को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (Cochin Shipyard Limited – CSL) में एंटी-सबमरीन शैलो वाटरक्राफ्ट (ASW SWC) परियोजना के तहत निर्मित सातवें युद्धपोत ‘मछलीपट्टनम’ (BY 529) का सफलतापूर्वक जलावतरण (Launch) किया गया। इस अवसर पर गुलरुख आनंद ने पारंपरिक नौसैनिक रीति-रिवाजों के अनुसार जहाज का जलावतरण किया। समारोह में वाइस एडमिरल अतुल आनंद, अतिरिक्त सचिव, सैन्य मामलों का विभाग (Department of Military Affairs) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इस अवसर पर भारतीय नौसेना, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड तथा रक्षा क्षेत्र से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी और विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे। यह युद्धपोत भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता और आत्मनिर्भर भारत अभियान की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
क्या है एंटी-सबमरीन शैलो वाटरक्राफ्ट (ASW SWC) परियोजना?
एंटी-सबमरीन शैलो वाटरक्राफ्ट (ASW SWC) भारतीय नौसेना की एक विशेष परियोजना है, जिसका उद्देश्य उथले समुद्री क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना, उनका पीछा करना और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें निष्क्रिय करना है।
भारतीय समुद्री सीमाओं की सुरक्षा केवल बड़े युद्धपोतों से संभव नहीं है। कई बार तटीय क्षेत्रों और कम गहराई वाले समुद्री इलाकों में छोटी एवं अत्याधुनिक पनडुब्बियां सक्रिय हो सकती हैं। इन्हीं खतरों से निपटने के लिए ASW SWC श्रेणी के युद्धपोत विकसित किए गए हैं।
‘मछलीपट्टनम’ (BY 529) क्यों है खास?
‘मछलीपट्टनम’ इस परियोजना के तहत निर्मित आठ युद्धपोतों में सातवां पोत है। इसका निर्माण पूरी तरह भारत में किया गया है, जो देश की रक्षा उत्पादन क्षमता में बढ़ती आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।
यह पोत अत्याधुनिक सेंसर, सोनार प्रणाली और पनडुब्बी रोधी हथियारों से लैस होगा। इसकी सहायता से भारतीय नौसेना समुद्री सीमाओं की बेहतर निगरानी कर सकेगी तथा संभावित खतरों का समय रहते जवाब देने में सक्षम होगी।
समुद्री सुरक्षा को मिलेगा नया आयाम
हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती सामरिक गतिविधियों और समुद्री चुनौतियों को देखते हुए भारतीय नौसेना लगातार अपनी युद्ध क्षमता का आधुनिकीकरण कर रही है। आधुनिक युद्ध में पनडुब्बियां सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक मानी जाती हैं क्योंकि वे लंबे समय तक पानी के भीतर रहकर गुप्त अभियान चला सकती हैं।
ऐसे में ASW SWC जैसे युद्धपोत नौसेना को तटीय क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी, गश्त और पनडुब्बी रोधी अभियानों में महत्वपूर्ण बढ़त प्रदान करेंगे।
आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती
‘मछलीपट्टनम’ का निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा किया गया है, जो भारत के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के शिपबिल्डिंग संस्थानों में शामिल है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया है। युद्धपोत, मिसाइल, हेलीकॉप्टर, विमान और अन्य रक्षा उपकरणों के निर्माण में देश तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। इससे न केवल विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी बल्कि घरेलू उद्योग, तकनीकी विकास और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा।
भारतीय नौसेना का लगातार हो रहा आधुनिकीकरण
भारतीय नौसेना वर्तमान समय में कई आधुनिक परियोजनाओं पर कार्य कर रही है। इनमें स्वदेशी विमानवाहक पोत, विध्वंसक, फ्रिगेट, पनडुब्बियां और विभिन्न प्रकार के विशेष युद्धपोत शामिल हैं।
ASW SWC परियोजना भी इसी व्यापक आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है। इन युद्धपोतों के शामिल होने से भारतीय नौसेना की तटीय सुरक्षा, समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी अभियान पहले की तुलना में अधिक प्रभावी बनेंगे।
रणनीतिक महत्व
भारत का लगभग 7,500 किलोमीटर लंबा समुद्री तट और विशाल विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) है। इसके अलावा हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक भूमिका लगातार बढ़ रही है।
ऐसे में छोटे लेकिन अत्याधुनिक एंटी-सबमरीन युद्धपोत समुद्री सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ये जहाज बंदरगाहों, नौसैनिक अड्डों और संवेदनशील समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी उपयोगी साबित होंगे।
रक्षा निर्माण उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत
‘मछलीपट्टनम’ का जलावतरण केवल एक नए युद्धपोत का लॉन्च नहीं है, बल्कि यह भारत के रक्षा विनिर्माण उद्योग की बढ़ती तकनीकी क्षमता का भी प्रमाण है।
इस प्रकार की परियोजनाएं देश में आधुनिक जहाज निर्माण तकनीक, उच्च कौशल वाले मानव संसाधन और रक्षा क्षेत्र में निजी एवं सार्वजनिक उद्योगों के सहयोग को भी प्रोत्साहित करती हैं।
निष्कर्ष
एंटी-सबमरीन शैलो वाटरक्राफ्ट ‘मछलीपट्टनम’ (BY 529) का जलावतरण भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण और समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह स्वदेशी तकनीक, आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन और समुद्री रणनीतिक क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण है। आने वाले समय में इस श्रेणी के सभी युद्धपोत भारतीय नौसेना में शामिल होने के बाद देश की तटीय सुरक्षा और पनडुब्बी रोधी अभियानों को नई मजबूती प्रदान करेंगे तथा हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक स्थिति को और सशक्त बनाएंगे।