मोहनी की गौशाला में अव्यवस्थाओं के आरोप, सरकारी बजट के बावजूद चारे-पानी की व्यवस्था पर उठे सवाल
रिपोर्ट: पंकज त्रिपाठी, तहसील संवाददाता
प्रकाशन: हिट एंड हॉट न्यूज़
स्थान: मऊ, जनपद चित्रकूट, उत्तर प्रदेश
दिनांक: 14 सितंबर 2026
मऊ, चित्रकूट। ग्राम पंचायत मोहनी की गौशाला में बड़ी संख्या में गोवंश के रखे जाने के बावजूद उनकी देखभाल और मूलभूत सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गौशाला के संचालन के लिए सरकारी स्तर से धनराशि उपलब्ध कराए जाने के बावजूद मौके पर पशुओं के लिए पर्याप्त चारा, पानी और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं दिखाई नहीं देतीं। ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच कराकर सरकारी धन के इस्तेमाल का हिसाब सार्वजनिक किए जाने की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत मोहनी में गौशाला का संचालन लंबे समय से किया जा रहा है। शासन की योजनाओं के तहत निराश्रित गोवंश को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने और उनके भोजन-पानी की व्यवस्था के लिए ग्राम पंचायतों को बजट दिया जाता है। इसका उद्देश्य यह है कि सड़कों और खेतों में घूमने वाले बेसहारा पशुओं को आश्रय मिल सके तथा उनकी नियमित देखभाल हो। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि मोहनी की गौशाला में इन व्यवस्थाओं को लेकर स्थिति संतोषजनक नहीं है।

चारा-पानी की व्यवस्था पर ग्रामीणों ने जताई नाराजगी
गांव के लोगों का कहना है कि गौशाला में मौजूद पशुओं की संख्या के अनुपात में चारे की व्यवस्था पर्याप्त नहीं दिखाई देती। पानी को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि गौशाला में पशुओं के लिए स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था नियमित रूप से नहीं हो रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि गोवंश की देखभाल केवल उन्हें गौशाला में पहुंचा देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। पशुओं के लिए पर्याप्त भूसा, हरा चारा, पानी, छाया, साफ-सफाई और बीमार पशुओं के उपचार जैसी सुविधाएं भी आवश्यक हैं। यदि इन व्यवस्थाओं में कमी है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को मौके पर निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का पता लगाना चाहिए।
बजट आने के बावजूद व्यवस्थाओं पर सवाल
ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत मोहनी में विकास कार्यों और विभिन्न योजनाओं के लिए सरकारी स्तर से धनराशि आती है। गौशाला के संचालन से संबंधित खर्च भी सरकारी व्यवस्था के तहत किया जाता है। ऐसे में लोगों का सवाल है कि यदि बजट उपलब्ध कराया जा रहा है तो उसका प्रभाव जमीन पर क्यों नहीं दिखाई दे रहा।
ग्रामीणों ने गौशाला से संबंधित आय-व्यय का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि पशुओं के चारे, पानी, रखरखाव और अन्य सुविधाओं पर धन खर्च किया गया है तो उसकी जानकारी ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड और संबंधित अभिलेखों में उपलब्ध होनी चाहिए। जांच के दौरान इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर यह स्पष्ट किया जा सकता है कि सरकारी धनराशि का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के अनुसार हुआ या नहीं।
पशुओं को लेकर भी सामने आए गंभीर आरोप
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि गौशाला में पशुओं की संख्या और उनके रखरखाव को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि गौशाला में पशुओं को रखने के बाद उनकी नियमित निगरानी और देखभाल नहीं की जाती। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासनिक अधिकारी अचानक गौशाला का निरीक्षण करें और मौके पर मौजूद पशुओं की संख्या का सत्यापन सरकारी रिकॉर्ड से करें। इसके साथ ही चारे की उपलब्धता, पानी की व्यवस्था, सफाई, पशुओं की स्वास्थ्य स्थिति और गौशाला के रखरखाव का भी परीक्षण कराया जाए।
ग्राम प्रधान पर मनमानी के आरोप
ग्राम पंचायत मोहनी की वर्तमान ग्राम प्रधान चुन्नी देवी, पति छक्की लाल, के कार्यकाल को लेकर भी ग्रामीणों ने कई सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत कार्य तो कराए गए, लेकिन उनके क्रियान्वयन और धनराशि के उपयोग को लेकर पारदर्शिता का अभाव है।
कुछ ग्रामीणों का दावा है कि पंचायत स्तर पर विकास कार्यों से संबंधित निर्णयों में उनकी आपत्तियों और सुझावों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायत के विकास बजट का इस्तेमाल ग्रामीणों की प्राथमिक आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं हो रहा है। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता का निर्धारण संबंधित सरकारी अभिलेखों, कार्यस्थल निरीक्षण और अधिकारियों की जांच के बाद ही किया जा सकता है।
विकास योजनाओं के बावजूद जमीनी तस्वीर पर सवाल
ग्राम पंचायतों को ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए अलग-अलग योजनाओं के तहत धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, पंचायत भवन, पशु आश्रय स्थल और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं पर खर्च किया जाना इसका हिस्सा हो सकता है।
मोहनी के ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी माना जाएगा जब उसका असर गांव के आम लोगों और पशुओं की स्थिति में दिखाई दे। केवल कागजों में कार्य पूर्ण होना पर्याप्त नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार विकास कार्यों की गुणवत्ता और उपयोगिता की जांच मौके पर जाकर की जानी चाहिए।
अभिलेखों की जांच से सामने आ सकती है सच्चाई
पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू पंचायत के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच का है। गौशाला में पशुओं की संख्या, चारे और पानी पर खर्च, मजदूरों या देखभाल करने वालों का भुगतान, दवाओं और अन्य सामग्री की खरीद तथा निर्माण या मरम्मत से संबंधित खर्च के दस्तावेजों का परीक्षण किया जा सकता है।
यदि शिकायतों में तथ्य पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि आरोप सही नहीं पाए जाते हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। इससे ग्रामीणों के बीच बनी शंकाओं को भी दूर किया जा सकेगा।
ग्रामीणों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की
मोहनी के ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गौशाला की स्थिति का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए। उनका कहना है कि निरीक्षण के दौरान केवल दस्तावेजों पर निर्भर रहने के बजाय मौके पर पशुओं की वास्तविक संख्या, चारा-पानी की उपलब्धता और साफ-सफाई की स्थिति देखी जाए।
ग्रामीणों ने पंचायत के विकास कार्यों की भी जांच कराने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि जिन योजनाओं के नाम पर धनराशि खर्च की गई है, उन सभी कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए। इससे यह पता चल सकेगा कि स्वीकृत धनराशि के मुकाबले वास्तविक कार्य कितना हुआ है और उसकी गुणवत्ता कैसी है।
निष्कर्ष
मोहनी ग्राम पंचायत की गौशाला और विकास कार्यों से जुड़े आरोप फिलहाल जांच का विषय हैं। बिना आधिकारिक जांच के सरकारी धन के दुरुपयोग या किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी को अंतिम रूप से तय नहीं किया जा सकता। लेकिन ग्रामीणों द्वारा उठाए गए सवालों को देखते हुए पारदर्शी जांच आवश्यक नजर आती है।
प्रशासन यदि गौशाला का निरीक्षण कर रिकॉर्ड की जांच करता है और विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन कराता है, तो पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है। साथ ही इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि गोवंश के लिए निर्धारित सुविधाएं उन्हें मिल रही हैं और ग्राम पंचायत के विकास के लिए उपलब्ध कराई गई सरकारी धनराशि का उपयोग नियमों के अनुरूप हो रहा है।
ग्रामीणों की मुख्य मांग यही है कि गौशाला में पशुओं को पर्याप्त भोजन और पानी मिले, साफ-सफाई की व्यवस्था बेहतर हो तथा पंचायत के विकास कार्यों में पूरी पारदर्शिता बरती जाए। अब देखना होगा कि संबंधित प्रशासनिक अधिकारी इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई करते हैं।