IPS भानु प्रताप सिंह और पत्नी पूजा के बीच विवाद ने पकड़ा तूल, पत्नी ने लगाए गंभीर आरोप
नई दिल्ली, 14 सितंबर 2026। भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी भानु प्रताप सिंह और उनकी पत्नी पूजा के बीच चल रहा वैवाहिक विवाद अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और पूजा के बयानों के बाद इस मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। पूजा ने अपने पति और ससुराल पक्ष पर मानसिक प्रताड़ना, कथित शारीरिक दुर्व्यवहार तथा अपनी छह वर्षीय बेटी से मिलने से रोके जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार भानु प्रताप सिंह की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में मामले से जुड़े आरोपों और तथ्यों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

परिवार की इच्छा के खिलाफ हुई थी शादी
पूजा के अनुसार, उनकी और भानु प्रताप सिंह की शादी वर्ष 2016 में हुई थी। उस समय दोनों के परिवार इस विवाह के पक्ष में नहीं थे। पूजा का कहना है कि शादी के शुरुआती दौर में भानु प्रताप सिंह UPSC परीक्षा की तैयारी कर रहे थे और उस कठिन समय में उन्होंने अपने पति का साथ दिया।
पूजा द्वारा साझा किए गए विवरण के मुताबिक, शादी के बाद का दौर उनके परिवार के लिए संघर्षपूर्ण रहा। आर्थिक और करियर से जुड़ी चुनौतियों के बीच उन्होंने भानु का सहयोग किया। बाद में भानु प्रताप सिंह ने UPSC की परीक्षा में सफलता हासिल की और वर्ष 2021 में IPS अधिकारी बने।
पूजा का दावा है कि पति के संघर्ष के समय उन्होंने हर संभव तरीके से उनका साथ दिया। यही वजह है कि मौजूदा परिस्थितियों को लेकर वह भावनात्मक रूप से काफी परेशान दिखाई देती हैं।
IPS बनने के बाद बदले रिश्तों के हालात का दावा
पूजा ने अपने बयानों में आरोप लगाया है कि भानु प्रताप सिंह के IPS अधिकारी बनने के बाद उनके वैवाहिक रिश्ते में परिस्थितियां बदलने लगीं। उनका कहना है कि उन्हें मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा और कथित तौर पर उनके साथ दुर्व्यवहार भी हुआ।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये बातें पूजा द्वारा लगाए गए आरोप हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हुई है। दूसरी ओर, भानु प्रताप सिंह की तरफ से इन विशिष्ट आरोपों पर सार्वजनिक रूप से विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है।
मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि इसमें केवल पति-पत्नी के बीच का विवाद ही नहीं, बल्कि एक नाबालिग बच्ची से जुड़े पारिवारिक संबंधों का मुद्दा भी शामिल है।
छह साल की बेटी को लेकर भी विवाद
पूजा का आरोप है कि उन्हें अपनी छह वर्षीय बेटी से मिलने नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि बच्ची इस समय उनके पति के साथ है और इसी वजह से वह अपनी बेटी से मिलने के लिए कई प्रयास कर चुकी हैं।
पूजा के मुताबिक, उन्हें जब पता चला कि भानु प्रताप सिंह अपनी बेटी के साथ भरतपुर में हैं, तो वह वहां पहुंचीं। उनका कहना है कि उन्होंने पति और ससुराल पक्ष के घर के बाहर काफी समय तक इंतजार किया, लेकिन उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली।
बेटी से मिलने का अधिकार और उसकी देखभाल से जुड़े निर्णय कानूनी और पारिवारिक परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं। इसलिए इस मामले में अंतिम स्थिति संबंधित कानूनी प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकरण के निर्णय से ही स्पष्ट हो सकती है।
भरतपुर पहुंचकर पुलिस से मांगी मदद
पूजा के अनुसार, पति और बेटी के भरतपुर में होने की जानकारी मिलने के बाद वह वहां पहुंचीं। उन्होंने कथित तौर पर अपने पति के घर तथा ससुराल के आवास पर जाकर बेटी से मिलने का प्रयास किया।
उनका दावा है कि काफी देर तक इंतजार करने के बाद भी स्थिति का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने पुलिस स्टेशन पहुंचकर मदद लेने की कोशिश की। पूजा ने अपने वीडियो और बयानों में इस पूरे घटनाक्रम को भावनात्मक तरीके से साझा किया है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि पुलिस की ओर से इस मामले में आगे क्या कार्रवाई की गई है। इसलिए किसी भी पुलिस कार्रवाई या कानूनी निष्कर्ष के संबंध में आधिकारिक पुष्टि के बिना दावा करना उचित नहीं होगा।
तलाक की प्रक्रिया का भी दावा
पूजा ने यह भी कहा है कि उनके पति ने तलाक के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू की है। उनके अनुसार, इस वैवाहिक विवाद के बीच ससुराल पक्ष का व्यवहार भी उनके प्रति सहयोगात्मक नहीं रहा।
पूजा का आरोप है कि उन्हें अपने ससुराल में प्रवेश करने तक की अनुमति नहीं दी जा रही है। उन्होंने अपनी स्थिति को लेकर सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों तक अपनी बात पहुंचाई है।
वहीं, तलाक से संबंधित किसी भी कानूनी मामले की वास्तविक स्थिति अदालत में दायर दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड से ही सुनिश्चित की जा सकती है। सोशल मीडिया पर सामने आए दावों को अंतिम कानूनी तथ्य नहीं माना जा सकता।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो
मामले ने तब ज्यादा ध्यान खींचा जब पूजा की ओर से साझा किए गए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित होने लगे। वीडियो में वह अपने वैवाहिक जीवन, पति के साथ पुराने संघर्ष और वर्तमान परिस्थितियों के बारे में अपनी बात रखती नजर आती हैं।
उनके बयानों में भावनात्मक अपील भी दिखाई देती है। वह अपने संघर्ष के दौर को याद करते हुए बताती हैं कि किस प्रकार उन्होंने पति के करियर को आगे बढ़ाने के दौरान उनका साथ देने का दावा किया था।
सोशल मीडिया के जरिए किसी व्यक्तिगत विवाद का सार्वजनिक होना अक्सर मामले को और जटिल बना देता है। ऐसे मामलों में दोनों पक्षों की बात सामने आना और कानूनी प्रक्रिया के तथ्यों को प्राथमिकता देना जरूरी होता है।
भानु प्रताप सिंह का पक्ष अभी सामने आना बाकी
इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक यह है कि उपलब्ध वीडियो में लगाए गए आरोपों पर IPS भानु प्रताप सिंह की ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक जवाब सामने नहीं आया है।
किसी भी विवाद में एक पक्ष के आरोपों के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होता। पूजा ने जो बातें सार्वजनिक की हैं, वे उनके पक्ष का बयान हैं। दूसरी ओर, भानु प्रताप सिंह का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है।
यदि संबंधित पक्ष कानूनी प्रक्रिया में है, तो अदालत अथवा जांच एजेंसी के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेज और प्रमाण ही विवाद के वास्तविक तथ्यों को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
मामला अब निजी विवाद से सार्वजनिक चर्चा तक
भानु प्रताप सिंह और पूजा की कहानी कथित प्रेम विवाह और संघर्ष के दौर से शुरू होकर अब सार्वजनिक विवाद तक पहुंच गई है। पूजा जहां अपने वैवाहिक जीवन को लेकर गंभीर आरोप लगा रही हैं, वहीं उनके पति की ओर से इन आरोपों पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
इस मामले में घरेलू विवाद, तलाक, कथित प्रताड़ना और नाबालिग बच्ची से मिलने से जुड़े मुद्दे एक साथ जुड़े हुए हैं। इसलिए इसकी संवेदनशीलता काफी अधिक है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना ही कहा जा सकता है कि पूजा ने अपने पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं तथा पुलिस से मदद लेने की बात कही है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। वहीं, IPS भानु प्रताप सिंह का विस्तृत पक्ष सार्वजनिक होने के बाद ही विवाद से जुड़े कई सवालों पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
मामले का आगे का रुख कानूनी कार्रवाई, संबंधित पक्षों के बयानों और आधिकारिक रिकॉर्ड पर निर्भर करेगा। तब तक सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बजाय प्रमाणित जानकारी के आधार पर ही निष्कर्ष निकालना उचित रहेगा।