लखनऊ में 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों का प्रदर्शन, नियुक्ति की मांग तेज
लखनऊ, 12 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश में 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों का लंबे समय से चला आ रहा नियुक्ति विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। नियुक्ति की मांग को लेकर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने लखनऊ में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आवास के बाहर पहुंचे और सरकार से अपने मामले में न्यायपूर्ण निर्णय लेने की मांग की। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विवाद के कारण उनका भविष्य वर्षों से अधर में लटका हुआ है।
प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थियों ने दावा किया कि वे पिछले करीब आठ वर्षों से नियुक्ति के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका आरोप है कि मामले को लेकर अधिकारियों की ओर से उच्च स्तर पर सही जानकारी नहीं पहुंचाई गई, जिसके कारण उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। अभ्यर्थियों ने सरकार से मांग की कि पूरे मामले की दोबारा गंभीरता से समीक्षा की जाए और योग्य उम्मीदवारों को उनकी पात्रता के अनुसार नियुक्ति का रास्ता साफ किया जाए।

आठ साल से नियुक्ति का इंतजार
68,500 सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान चयन और नियुक्ति से संबंधित विभिन्न स्तरों पर विवाद सामने आए। इन विवादों के कारण कई उम्मीदवारों को लंबे समय तक नियुक्ति का इंतजार करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, उनका संघर्ष केवल नौकरी पाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे भर्ती प्रक्रिया में सामने आई कथित विसंगतियों और आरक्षण से जुड़े सवालों का भी समाधान चाहते हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि इतने लंबे समय तक सरकारी विभागों और अधिकारियों के चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें स्पष्ट समाधान नहीं मिला। उनका तर्क है कि यदि उनकी समस्याओं का समय रहते समाधान किया जाता तो उन्हें वर्षों तक आंदोलन और कानूनी प्रक्रिया का सहारा नहीं लेना पड़ता।
शिक्षा मंत्री के साथ बैठक का भी हवाला
प्रदर्शनकारियों ने हाल में हुई एक बैठक का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, 10 सितंबर को बेसिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी तथा संबंधित अधिकारियों के साथ बातचीत हुई थी। अभ्यर्थियों का दावा है कि बैठक में उनकी ओर से उठाए गए मुद्दों पर चर्चा हुई और कथित तौर पर कुछ स्तर पर हुई गलतियों को स्वीकार किए जाने की बात सामने आई।
हालांकि, अभ्यर्थियों के मुताबिक उन्हें यह भी बताया गया कि अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री स्तर से लिया जाना है। इसके बाद उम्मीदवारों में यह उम्मीद जगी कि सरकार उनके मामले पर जल्द कोई सकारात्मक फैसला कर सकती है। लेकिन जब तत्काल कोई निर्णय सामने नहीं आया तो उन्होंने फिर से प्रदर्शन का रास्ता अपनाया।
अभ्यर्थियों का कहना है कि वे सरकार से टकराव नहीं चाहते, बल्कि बातचीत के माध्यम से समाधान चाहते हैं। उनका कहना है कि यदि अधिकारियों और सरकार की ओर से स्पष्ट संवाद स्थापित किया जाए तो लंबे समय से चले आ रहे विवाद को समाप्त किया जा सकता है।
उपमुख्यमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन
अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के उद्देश्य से अभ्यर्थी उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आवास के बाहर एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने नियुक्ति से संबंधित अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई। उनका कहना था कि जब तक उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
प्रदर्शन के दौरान प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी भी रही। अभ्यर्थियों का आरोप है कि मौके पर उनसे पर्याप्त बातचीत नहीं की गई। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कथित तौर पर धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटा दिया।
अभ्यर्थियों ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने वाले उम्मीदवारों के साथ संवाद होना चाहिए था। उनका कहना है कि पुलिस कार्रवाई से उनकी समस्या खत्म नहीं होगी और वे नियुक्ति के मुद्दे को लेकर आगे भी अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
आरक्षण में कथित गड़बड़ी का आरोप
प्रदर्शनकारियों ने भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण से संबंधित कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि राज्य आयोग की 7 जुलाई की ओर से जारी किए गए आदेश का हवाला देते हुए वे भर्ती प्रक्रिया में कथित बड़े स्तर की गड़बड़ी की जांच और समाधान की मांग कर रहे हैं।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि आरक्षण व्यवस्था से जुड़े सवालों का उचित तरीके से समाधान नहीं होने के कारण कई उम्मीदवार प्रभावित हुए। वे चाहते हैं कि संबंधित रिकॉर्ड और चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन उम्मीदवारों को नियुक्ति का अधिकार बनता है।
हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम स्थिति संबंधित सरकारी विभागों और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट होगी। अभ्यर्थियों की ओर से लगाए गए आरोपों को उनके दावे के रूप में देखा जाना चाहिए।
खाली पद होने का दावा
प्रदर्शन कर रहे उम्मीदवारों का एक प्रमुख दावा यह भी है कि विभाग में अब भी कुछ पद खाली हैं। उनका कहना है कि यदि रिक्त पद उपलब्ध हैं तो योग्य अभ्यर्थियों की नियुक्ति के लिए सरकार को सकारात्मक कदम उठाना चाहिए।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि उन्हें लगातार अलग-अलग स्तरों पर आश्वासन या जानकारी दी जाती रही, लेकिन ठोस निर्णय सामने नहीं आया। उनका कहना है कि उपलब्ध रिक्तियों और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े नियमों का अध्ययन करके सरकार को ऐसा रास्ता निकालना चाहिए जिससे पात्र उम्मीदवारों के हितों की रक्षा हो सके।
उम्मीदवारों का यह भी कहना है कि वर्षों तक इंतजार करने के बाद उनकी उम्र, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक परिस्थितियों पर भी असर पड़ा है। उनके अनुसार, सरकारी नौकरी की उम्मीद में उन्होंने लंबे समय तक संघर्ष किया और अब वे मामले का स्पष्ट तथा अंतिम समाधान चाहते हैं।
सरकार के सामने चुनौती
68,500 सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़ा विवाद सरकार के लिए भी संवेदनशील मुद्दा है। एक ओर अभ्यर्थी वर्षों पुराने मामले का समाधान चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर नियुक्ति प्रक्रिया को नियमों, आरक्षण व्यवस्था, न्यायिक आदेशों और उपलब्ध पदों के आधार पर आगे बढ़ाना होगा।
ऐसे में अभ्यर्थियों की मांगों पर फैसला लेते समय सभी संबंधित रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण होगी। सरकार के सामने यह चुनौती है कि यदि किसी स्तर पर वास्तविक त्रुटि हुई है तो उसका समाधान किया जाए और साथ ही नियुक्ति प्रक्रिया कानूनी तथा प्रशासनिक नियमों के अनुरूप रहे।
अभ्यर्थियों को फैसले का इंतजार
लखनऊ में हुए प्रदर्शन के बाद एक बार फिर 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती का मामला सुर्खियों में है। अभ्यर्थियों की मांग है कि मुख्यमंत्री स्तर पर पूरे मामले की समीक्षा कर स्पष्ट निर्णय लिया जाए। वे चाहते हैं कि वर्षों से चल रहे विवाद को अब और लंबा न खींचा जाए।
प्रदर्शनकारी उम्मीदवारों का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक धैर्य रखा है और अब उन्हें अपने भविष्य को लेकर स्पष्ट जवाब चाहिए। उनका जोर इस बात पर है कि यदि रिक्त पद मौजूद हैं और नियमों के तहत नियुक्ति का रास्ता संभव है, तो पात्र उम्मीदवारों को न्याय मिलना चाहिए।
फिलहाल अभ्यर्थियों की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में इस मामले पर कोई आधिकारिक निर्णय या नई वार्ता होती है या नहीं, यह महत्वपूर्ण होगा। यदि सरकार और अभ्यर्थियों के बीच प्रभावी संवाद स्थापित होता है तो वर्षों पुराने इस विवाद के समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद बन सकती है।
निष्कर्ष: 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों का लखनऊ प्रदर्शन एक लंबे समय से चले आ रहे नियुक्ति विवाद की ओर ध्यान खींचता है। अभ्यर्थी आरक्षण से जुड़ी कथित अनियमितताओं, रिक्त पदों और प्रशासनिक स्तर पर हुई कथित गलतियों की समीक्षा की मांग कर रहे हैं। अब उनकी उम्मीद सरकार के स्तर पर होने वाले निर्णय से जुड़ी है। लंबे संघर्ष के बाद उम्मीदवार चाहते हैं कि उन्हें स्पष्ट जवाब मिले और यदि वे नियमों के तहत नियुक्ति के पात्र हैं, तो उनके लिए नियुक्ति का रास्ता निकाला जाए।