फ़रवरी 22, 2026

ट्रंप प्रशासन बनाम सुप्रीम कोर्ट: टैरिफ की जंग और संवैधानिक सीमाओं की पड़ताल

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अमेरिकी शासन व्यवस्था एक बार फिर उस मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है जहाँ कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच अधिकारों की सीमाओं को लेकर खुली बहस छिड़ गई है। 20 फरवरी 2026 को ने 6-3 के बहुमत से एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए राष्ट्रपति द्वारा लागू किए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ को असंवैधानिक ठहरा दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति को बिना स्पष्ट विधायी अनुमति के असीमित और एकतरफा ढंग से टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं दिया जा सकता।

विवाद की पृष्ठभूमि

ट्रंप प्रशासन ने पहले 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ लागू करने की घोषणा की थी। इसे अमेरिकी उद्योगों की रक्षा और व्यापार घाटे को कम करने की रणनीति के रूप में प्रस्तुत किया गया। हालांकि, कई व्यापारिक संगठनों, विपक्षी नेताओं और संवैधानिक विशेषज्ञों ने इसे कार्यपालिका द्वारा अधिकारों के अतिक्रमण के रूप में देखा। मामला अंततः सर्वोच्च अदालत तक पहुँचा, जहाँ इस पर व्यापक संवैधानिक समीक्षा हुई।

अदालत का तर्क

बहुमत का मत यह था कि व्यापार और कर नीति से जुड़े बड़े निर्णयों में कांग्रेस की भूमिका को दरकिनार नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह रेखांकित किया कि संविधान शक्तियों के संतुलन की व्यवस्था पर आधारित है, और किसी एक शाखा को असीमित विवेक नहीं दिया जा सकता। उल्लेखनीय यह भी रहा कि कुछ ऐसे न्यायाधीश, जिनकी नियुक्ति ट्रंप के कार्यकाल में हुई थी, उन्होंने भी प्रशासन के रुख का समर्थन नहीं किया।

ट्रंप की तीखी प्रतिक्रिया

फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से इसे “दोषपूर्ण” और “राष्ट्रहित के विपरीत” बताया। उन्होंने घोषणा की कि प्रशासन पहले प्रस्तावित 10 प्रतिशत टैरिफ को संशोधित कर 15 प्रतिशत तक बढ़ाने की दिशा में कदम उठाएगा। उनके अनुसार नया ढाँचा कानूनी रूप से अधिक मजबूत आधार पर तैयार किया जाएगा। यह रुख स्पष्ट करता है कि प्रशासन इस मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं है।

संभावित आर्थिक प्रभाव

  • महंगाई का दबाव: आयातित वस्तुओं पर अधिक शुल्क लगने से उनकी कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसका बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
  • उद्योग जगत की चुनौती: कई अमेरिकी कंपनियाँ वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं पर निर्भर हैं। बढ़े हुए टैरिफ से उत्पादन लागत में वृद्धि संभव है।
  • बाजार में अस्थिरता: निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ सकती है, जिससे शेयर बाजार और मुद्रा विनिमय दरों पर असर पड़ सकता है।

अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य

अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदार इस कदम को संरक्षणवादी नीति के रूप में देख सकते हैं। इससे प्रतिशोधात्मक टैरिफ या व्यापारिक प्रतिबंधों की संभावना बढ़ सकती है, जिससे वैश्विक व्यापार वातावरण में तनाव उत्पन्न हो सकता है।

राजनीतिक और संवैधानिक महत्व

यह निर्णय केवल व्यापार नीति तक सीमित नहीं है। यह अमेरिकी लोकतांत्रिक ढांचे में शक्तियों के संतुलन की पुनर्पुष्टि भी है। न्यायपालिका ने संकेत दिया है कि राष्ट्रपति की शक्तियाँ व्यापक हो सकती हैं, परंतु वे असीमित नहीं हैं। यह संदेश भविष्य की किसी भी प्रशासनिक नीति के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है।

आगे की राह

आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन नया टैरिफ ढाँचा किस प्रकार प्रस्तुत करता है और क्या वह न्यायिक कसौटी पर खरा उतर पाता है। साथ ही, कांग्रेस की भूमिका भी निर्णायक हो सकती है। यह टकराव अमेरिकी आर्थिक नीति, वैश्विक व्यापार संतुलन और ट्रंप की राजनीतिक विरासत—तीनों को प्रभावित कर सकता है।

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