फ़रवरी 19, 2026

सुजौली–हरखापुर मार्ग की दुर्दशा: विकास के दावों के बीच ग्रामीणों की बढ़ती मुश्किलें

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कमलेश कुमार बहराइच

रिपोर्टर हिट एंड हॉट न्यूज़

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों की स्थिति अक्सर विकास की असली तस्वीर बयान करती है। सुजौली–हरखापुर मार्ग, जो मुख्य मार्ग को जोड़ते हुए गूढ़ जाने वाले हाइवे से संपर्क स्थापित करता है, आज गंभीर बदहाली का शिकार है। कभी यह मार्ग क्षेत्र की जीवनरेखा माना जाता था, लेकिन वर्तमान में इसकी स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि पैदल चलना भी जोखिम भरा हो गया है।

कभी चहल-पहल वाला मार्ग, आज वीरान रास्ता

करीब 10–15 वर्ष पहले इस सड़क पर प्रतिदिन चार से पांच बसें चला करती थीं। स्थानीय लोग बाजार, स्कूल, अस्पताल और तहसील मुख्यालय तक आसानी से पहुंचते थे। लेकिन आज हालात यह हैं कि सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। जगह-जगह टूटी पुलिया, उखड़ी डामर और जलभराव ने इसे लगभग अनुपयोगी बना दिया है।

सड़क बंद होने से बढ़ी दूरी और खतरा

इस मार्ग के खराब होने से लोगों को लगभग 50 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाकर जंगल के रास्तों से गुजरना पड़ता है। इन रास्तों पर न तो पर्याप्त रोशनी है और न ही मोबाइल नेटवर्क की सुविधा। आपात स्थिति में संपर्क न हो पाना लोगों की जान पर बन आता है। खासकर मरीजों, गर्भवती महिलाओं और विद्यार्थियों के लिए यह समस्या और गंभीर हो जाती है।

मिहींपुरवा तहसील तक आसान पहुंच की मांग

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि यह सड़क दोबारा बन जाए तो मिहींपुरवा तहसील तक पहुंचने में लगभग 20 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी। साथ ही, मुख्य मार्ग से जुड़ाव होने के कारण नेटवर्क और परिवहन सुविधा भी बेहतर रहेगी। इससे व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान हो सकती है।

विकास के दावों पर सवाल

राज्य और केंद्र दोनों स्तर पर सरकार विकास और आधारभूत संरचना सुधार के बड़े दावे करती रही हैं। “डबल इंजन” सरकार की अवधारणा के तहत तेज विकास का वादा किया गया था। लेकिन सुजौली–हरखापुर मार्ग की हालत इन दावों पर प्रश्नचिह्न लगाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क जैसी बुनियादी सुविधा की अनदेखी लोगों में असंतोष पैदा कर रही है।

स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

सड़क की बदहाली का सीधा असर स्थानीय व्यापार और कृषि पर पड़ रहा है। किसान समय पर अपनी उपज मंडी तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। छोटे दुकानदारों की बिक्री प्रभावित हो रही है, और परिवहन लागत बढ़ने से रोजमर्रा के सामान महंगे हो रहे हैं। रोजगार के अवसर भी सीमित होते जा रहे हैं।

प्रशासन से उम्मीदें

ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने संबंधित अधिकारियों से बार-बार सड़क के पुनर्निर्माण की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस मार्ग का मरम्मत और चौड़ीकरण कार्य शुरू कर दिया जाए, तो क्षेत्र के हजारों लोगों को राहत मिल सकती है।

निष्कर्ष

सुजौली–हरखापुर मार्ग केवल एक सड़क नहीं, बल्कि हजारों ग्रामीणों की दैनिक जरूरतों और सुरक्षित आवागमन का आधार है। इसकी बदहाली न केवल प्रशासनिक लापरवाही का संकेत देती है, बल्कि ग्रामीण विकास की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाती है। अब आवश्यक है कि संबंधित विभाग इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र समाधान सुनिश्चित करे, ताकि क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित, सुगम और सम्मानजनक यातायात सुविधा मिल सके।

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