पूर्व विधायक नीलम करवरिया का लिवर सिरोसिस से निधन, बीमारी और उनकी याद में समर्थकों का उमड़ा सैलाब

अनूप सिंह [ रिपोर्टर चित्रकूट ]
प्रयागराज के मेजा क्षेत्र की पूर्व विधायक नीलम करवरिया का गुरुवार देर रात लिवर सिरोसिस के कारण निधन हो गया। जनपद राजापुर में जन्मी नीलम करवरिया लंबे समय से इस घातक बीमारी से जूझ रही थीं। उनका इलाज हैदराबाद के एक निजी अस्पताल में चल रहा था, जहां उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। बावजूद इसके, उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हो पाया और उन्होंने अस्पताल में ही अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई, और बड़ी संख्या में समर्थक शोक व्यक्त करने के लिए उनके निवास पर उमड़ पड़े।
क्या है लिवर सिरोसिस?
लिवर सिरोसिस एक गंभीर और जटिल बीमारी है, जिसमें लिवर के ऊतकों को अपूरणीय क्षति पहुंचती है। इस बीमारी में लिवर के स्वस्थ ऊतकों की जगह फाइब्रोटिक (दागदार) ऊतक ले लेते हैं, जिससे लिवर की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। इसके परिणामस्वरूप लिवर अपनी सामान्य प्रक्रिया जैसे शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने, पाचन में सहायता करने और रक्त को शुद्ध करने में असमर्थ हो जाता है। यह बीमारी शराब के अत्यधिक सेवन, हेपेटाइटिस संक्रमण, और मोटापे जैसी विभिन्न वजहों से हो सकती है।
लिवर सिरोसिस के लक्षण
लिवर सिरोसिस के प्रारंभिक चरण में इसके लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते, लेकिन जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, व्यक्ति को निम्नलिखित लक्षण महसूस हो सकते हैं:
थकान और कमजोरी
भूख में कमी और वजन का घटना
पेट में सूजन और दर्द
त्वचा और आंखों में पीलापन (पीलिया)
पैरों और टखनों में सूजन
त्वचा पर खुजली और रैशेज
इलाज और रोकथाम
लिवर सिरोसिस का इलाज मुश्किल होता है क्योंकि यह बीमारी एक बार उन्नत होने के बाद उल्टी नहीं की जा सकती। हालांकि, इसके बढ़ने को रोका जा सकता है और लिवर की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत के लिए उपचार किया जा सकता है। शराब का सेवन पूरी तरह से रोकना, स्वस्थ आहार, और नियमित रूप से डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है।
नीलम करवरिया के निधन से परिवार और समर्थकों में शोक की लहर है। उनके पीछे दो बेटियां, समृद्धि और साक्षी करवरिया, तथा एक बेटा सक्षम करवरिया हैं। उनके राजनीतिक और सामाजिक योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।
