मोदी–पिचाई भेंट: भारत में एआई भागीदारी की नई करवट

नई दिल्ली, 18 फरवरी 2026 – राजधानी के भव्य सम्मेलन केंद्र में आयोजित ‘AI Impact Summit 2026’ के दौरान भारत के प्रधानमंत्री और गूगल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की बैठक ने तकनीकी जगत में नई चर्चा छेड़ दी। यह मुलाक़ात भारत की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में बढ़ती सक्रियता और वैश्विक साझेदारी की संभावनाओं का स्पष्ट संकेत है।
मुलाक़ात क्यों रही महत्वपूर्ण?
प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत को सकारात्मक और उपयोगी बताया। उनका कहना था कि भारत तेज़ी से एआई नवाचार का केंद्र बन रहा है और देश के युवा, शोधकर्ता व स्टार्टअप इस क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे सकते हैं।
दूसरी ओर, सुंदर पिचाई ने भारत की डिजिटल प्रगति की सराहना करते हुए संकेत दिया कि गूगल भारत में तकनीकी निवेश, अनुसंधान सहयोग और कौशल विकास कार्यक्रमों को आगे बढ़ा सकता है।
यह संवाद केवल औपचारिक शिष्टाचार नहीं था, बल्कि तकनीकी सहयोग को व्यवहारिक रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की पृष्ठभूमि
सम्मेलन 16 फरवरी से आरंभ होकर कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की भागीदारी का साक्षी बना। 110 से अधिक देशों के नीति-निर्माता, टेक विशेषज्ञ और उद्योग प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए।
मुख्य विषयों में शामिल रहे:
- वैश्विक एआई नियमन और गवर्नेंस
- सुरक्षित एवं जिम्मेदार एआई
- विकासशील देशों में एआई की भूमिका
- नवाचार और निवेश
सुंदर पिचाई आगामी सत्र में अपने मुख्य संबोधन के माध्यम से एआई के भविष्य और भारत के योगदान पर दृष्टिकोण साझा करेंगे।
संभावित सहयोग के प्रमुख आयाम
1. शिक्षा और कौशल सशक्तिकरण
भारतीय छात्रों को एआई आधारित प्रशिक्षण, रिसर्च ग्रांट और टेक्निकल मेंटरशिप के अवसर मिल सकते हैं। इससे उच्च शिक्षा संस्थानों और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल बनेगा।
2. डिजिटल बुनियादी ढाँचा
भारत के डिजिटल परिवर्तन अभियानों को तकनीकी विशेषज्ञता और क्लाउड सेवाओं से मजबूती मिल सकती है, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में डिजिटल पहुँच बढ़ेगी।
3. जिम्मेदार एआई पर सहयोग
डेटा सुरक्षा, पारदर्शिता और नैतिक मानकों पर संयुक्त प्रयास भारत को एआई उपयोग में संतुलित और भरोसेमंद मॉडल प्रस्तुत करने में मदद कर सकते हैं।
4. स्टार्टअप और नवाचार
भारतीय नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को वैश्विक निवेश और नेटवर्किंग के अवसर मिल सकते हैं, जिससे एआई-आधारित समाधान विश्व बाजार तक पहुँच पाएँगे।
आगे की दिशा
यह बैठक इस बात का संकेत देती है कि भारत केवल एआई तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर नीति और नवाचार का सहभागी बनना चाहता है। यदि प्रस्तावित सहयोग योजनाएँ ठोस रूप लेती हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत का एआई क्षेत्र रोजगार, शोध और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के नए आयाम छू सकता है।
मोदी–पिचाई संवाद को भारत की तकनीकी कूटनीति और नवाचार दृष्टि के एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखा जा सकता है।
