दांडी मार्च के वीरों को प्रधानमंत्री की श्रद्धांजलि, सत्य की विजय का संदेश किया साझा

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक महत्व रखने वाले की वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री ने उन सभी महान व्यक्तित्वों को नमन किया जिन्होंने इस आंदोलन में भाग लेकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ सत्य और अहिंसा का संदेश दुनिया तक पहुंचाया।
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर संदेश जारी करते हुए 1930 में शुरू हुए इस ऐतिहासिक आंदोलन को याद किया और स्वतंत्रता संग्राम के सभी सहभागी सेनानियों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
सत्य की शक्ति का संदेश
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में एक प्रसिद्ध संस्कृत सुभाषित भी साझा किया, जिसका मूल भाव यह है कि सत्य की अंततः विजय होती है और असत्य का नाश हो जाता है। उन्होंने बताया कि सत्य का मार्ग वही पथ है जिस पर चलकर महान ऋषियों ने जीवन का परम उद्देश्य और सत्य का ज्ञान प्राप्त किया।
यह सुभाषित भारतीय परंपरा में सत्य और नैतिकता के महत्व को रेखांकित करता है तथा समाज को सही मार्ग अपनाने की प्रेरणा देता है।
दांडी मार्च का ऐतिहासिक महत्व
के नेतृत्व में 12 मार्च 1930 को शुरू हुआ दांडी मार्च ब्रिटिश शासन के नमक कानून के विरोध में किया गया एक ऐतिहासिक आंदोलन था। इस यात्रा के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिला और देशभर में असहयोग तथा सविनय अवज्ञा आंदोलन को नई गति प्राप्त हुई।
इस मार्च ने भारत के स्वतंत्रता संघर्ष को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई और सत्याग्रह की शक्ति को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया।
राष्ट्र के लिए प्रेरणा
प्रधानमंत्री ने कहा कि दांडी मार्च केवल एक आंदोलन नहीं था, बल्कि यह सत्य, साहस और अहिंसा की शक्ति का प्रतीक है। इस आंदोलन में शामिल स्वतंत्रता सेनानियों का योगदान आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति और नैतिक मूल्यों के प्रति प्रेरित करता रहेगा।
आज भी यह ऐतिहासिक घटना हमें यह संदेश देती है कि सत्य और न्याय के मार्ग पर चलकर ही समाज और राष्ट्र को आगे बढ़ाया जा सकता है।
