मार्च 12, 2026

हाथी-ट्रेन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए राष्ट्रीय पहल: 77 संवेदनशील रेल मार्गों की पहचान

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प्रस्तावना

भारत में तेज़ी से बढ़ते बुनियादी ढांचे और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाना आज एक महत्वपूर्ण चुनौती बन चुका है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में समस्या अधिक गंभीर है जहां रेलवे लाइनें हाथियों के पारंपरिक आवास और गलियारों से होकर गुजरती हैं। इन परिस्थितियों में कई बार हाथियों और ट्रेनों के बीच टक्कर की घटनाएं सामने आती हैं, जिनसे वन्यजीवों को भारी नुकसान होता है।

इन्हीं घटनाओं को कम करने और व्यावहारिक समाधान खोजने के उद्देश्य से ने राष्ट्रीय स्तर पर एक विशेष कार्यशाला आयोजित की।


देहरादून में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला

यह कार्यशाला 10 और 11 मार्च 2026 को , देहरादून में आयोजित की गई। कार्यक्रम का संचालन मंत्रालय के प्रोजेक्ट एलिफेंट प्रभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों के सहयोग से किया गया।

इस बैठक में भारतीय रेलवे, विभिन्न राज्यों के वन विभागों तथा संरक्षण विशेषज्ञों सहित लगभग 40 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य था—

  • हाथी-ट्रेन टक्करों के कारणों का वैज्ञानिक अध्ययन
  • जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान
  • दीर्घकालिक समाधान के लिए संयुक्त रणनीति तैयार करना

भारत में एशियाई हाथियों की स्थिति

भारत एशियाई हाथियों की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है। अनुमान है कि विश्व में पाए जाने वाले एशियाई हाथियों का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा भारत में निवास करता है।

इनके प्रमुख आवास निम्न क्षेत्रों में फैले हुए हैं—

  • पूर्वी भारत
  • उत्तर-पूर्वी भारत
  • दक्षिण भारत
  • मध्य भारत

हालांकि रेलवे नेटवर्क के विस्तार और जंगलों के विखंडन के कारण हाथियों के पारंपरिक आवागमन मार्ग प्रभावित हो रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।


प्रभावित राज्यों की सूची

ट्रेन से टकराने की घटनाएं मुख्य रूप से उन राज्यों में अधिक देखी जाती हैं जहां हाथियों की आबादी अधिक है। इनमें प्रमुख राज्य हैं—


संवेदनशील रेल खंडों की पहचान

मंत्रालय और भारतीय रेलवे द्वारा किए गए संयुक्त अध्ययन में हाथियों के आवास क्षेत्रों से गुजरने वाले रेलवे मार्गों का विस्तृत विश्लेषण किया गया।

इस अध्ययन में लगभग 3,452.4 किलोमीटर लंबे 127 रेल खंडों का मूल्यांकन किया गया।

विश्लेषण के आधार पर 14 राज्यों में फैले 77 रेल खंडों (लगभग 1,965.2 किमी) को अत्यधिक जोखिम वाले क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया और इन्हें प्राथमिकता सूची में रखा गया।


दुर्घटनाओं को रोकने के लिए 705 संरचनाओं का प्रस्ताव

विशेषज्ञों ने हाथियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कई प्रकार की संरचनाओं की सिफारिश की है। कुल 705 शमन संरचनाओं का प्रस्ताव रखा गया है, जिनमें शामिल हैं—

  • 503 रैंप और समतल पार मार्ग
  • 72 पुलों का विस्तार या पुनर्रचना
  • 39 बाड़ अथवा खाई जैसी सुरक्षा संरचनाएं
  • 4 निकास रैंप
  • 65 नए अंडरपास
  • 22 ओवरपास

इन संरचनाओं का उद्देश्य हाथियों को सुरक्षित रूप से रेलवे ट्रैक पार करने में सहायता प्रदान करना है।


नई रेलवे परियोजनाओं में वन्यजीव संरक्षण

सरकार ने यह भी सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए हैं कि भविष्य की रेल परियोजनाओं में वन्यजीव संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए। उदाहरण के तौर पर—

  • छत्तीसगढ़ में अचानकमार-अमरकंटक हाथी गलियारे से गुजरने वाली रेल परियोजना
  • महाराष्ट्र में दरेकासा-सालेकासा ट्रैक का तिहरीकरण
  • नागभिड़-इतवारी गेज परिवर्तन परियोजना
  • वाडसा-गडचिरोली रेलवे लाइन

इन परियोजनाओं में वन्यजीवों की आवाजाही के लिए विशेष संरचनाएं बनाई जा रही हैं।


असम में विशेष समाधान

में अजारा-कामाख्या रेलवे मार्ग का लगभग 3.5 किलोमीटर लंबा हिस्सा रानी-गरभंगा-दीपोर बील हाथी गलियारे को काटता है।

अतीत में यहां कई हाथियों की मृत्यु दर्ज की गई है। इस समस्या को देखते हुए योजना बनाई गई है कि इस रेल खंड को ऊंचा बनाया जाए, ताकि हाथी नीचे से सुरक्षित रूप से गुजर सकें।


आधुनिक तकनीक का उपयोग

हाथी-ट्रेन टकराव को रोकने के लिए आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है।

1. डिस्ट्रीब्यूटेड एकॉस्टिक सिस्टम

यह प्रणाली रेलवे ट्रैक के आसपास होने वाली गतिविधियों को पहचानने में सक्षम है। इसे पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के कुछ हिस्सों में परीक्षण के तौर पर लागू किया गया है।

2. कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित चेतावनी प्रणाली

के मदुक्कराई क्षेत्र में एक एआई आधारित निगरानी प्रणाली स्थापित की गई है। इसमें थर्मल और मोशन सेंसर से युक्त कैमरे लगाए गए हैं, जो लगभग 100 मीटर के दायरे में हाथियों की गतिविधि का पता लगाकर तुरंत चेतावनी भेजते हैं।

इससे ट्रेन चालकों को समय रहते गति कम करने या ट्रेन रोकने का अवसर मिल जाता है।


दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण

कार्यशाला में विशेषज्ञों ने उन कारणों की भी पहचान की जो हाथी-ट्रेन दुर्घटनाओं को बढ़ाते हैं—

  • जंगलों का विखंडन
  • भूमि उपयोग में परिवर्तन
  • ट्रेनों की अधिक गति
  • रात के समय संचालन
  • हाथियों का मौसमी प्रवास

इन कारणों को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र विशेष के अनुसार अलग-अलग रणनीतियां विकसित करने पर जोर दिया गया।


निष्कर्ष

कार्यशाला में यह स्पष्ट हुआ कि हाथियों और ट्रेनों के बीच होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए वैज्ञानिक शोध, आधुनिक तकनीक और विभिन्न संस्थानों के बीच समन्वय बेहद आवश्यक है।

प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, सुरक्षित पार मार्ग, बेहतर संकेत व्यवस्था और डेटा साझा करने जैसी पहलें हाथियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

यदि इन उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए तो भविष्य में हाथियों की मृत्यु दर को कम करने और उनके प्राकृतिक आवासों की रक्षा करने में बड़ी सफलता मिल सकती है।


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