क्षमता विकास आयोग ने प्रशिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए दक्षिणी क्षेत्रीय कार्यशाला आयोजित की

हैदराबाद, 14 मार्च 2026।
भारत सरकार के क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) ने 13 मार्च 2026 को हैदराबाद में स्थित प्रशासनिक कर्मचारी महाविद्यालय (एएससीआई) में एक दक्षिणी क्षेत्रीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का उद्देश्य विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों के बीच सहयोगात्मक क्षमता विकास को बढ़ावा देना और संसाधनों के साझा उपयोग के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करना था।
कार्यशाला में दक्षिण भारत के 23 सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थानों के कुल 47 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने संकाय आदान-प्रदान, प्रशिक्षण सामग्री साझा करने और उपलब्ध बुनियादी ढांचे के बेहतर उपयोग जैसे विषयों पर व्यावहारिक उपायों पर चर्चा की।
इस कार्यक्रम का आयोजन क्षमता विकास आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत आयोग की प्रधान सलाहकार चंद्रलेखा मुखर्जी के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि अब तक विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग मुख्यतः अनौपचारिक तरीकों पर आधारित रहा है। उन्होंने इस व्यवस्था को अधिक संगठित और संस्थागत स्वरूप देने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि प्रशिक्षण प्रणाली को केवल आपूर्ति-आधारित मॉडल से आगे बढ़कर मांग-आधारित क्षमता विकास की दिशा में परिवर्तित किया जाना चाहिए, ताकि प्रशासनिक जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा सके।
इसके बाद एएससीआई के महानिदेशक डॉ. निम्मागड्डा रमेश कुमार ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने लोक सेवकों के निरंतर प्रशिक्षण और नवाचार की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि एएससीआई में स्थापित सार्वजनिक नीति नवाचार केंद्र प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
मुख्य तकनीकी सत्र का संचालन राष्ट्रीय संचार अकादमी-वित्त के उप महानिदेशक और विषयगत कार्य बल के अध्यक्ष डॉ. कमल कपूर ने किया। उन्होंने हाल के सप्ताहों में किए गए परामर्श और विचार-विमर्श का सार प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए साझा संसाधन निर्देशिका तैयार करना, प्रशिक्षण सामग्री की अनावश्यक पुनरावृत्ति को कम करना तथा संस्थागत स्तर पर समन्वय स्थापित करना महत्वपूर्ण होगा।
डॉ. कपूर ने सहयोग के लिए तीन प्रमुख आधार बताए—
- संकाय का साझा उपयोग
- ज्ञान और प्रशिक्षण सामग्री का आदान-प्रदान
- बुनियादी ढांचे का साझा उपयोग
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को तीन अलग-अलग विषयगत समूहों में विभाजित किया गया। इन समूहों ने मौजूदा चुनौतियों की पहचान की, सहयोग बढ़ाने के लिए संभावित उपायों पर चर्चा की और व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए। चर्चा से कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव सामने आए, जिनमें एक केंद्रीकृत संकाय एवं संसाधन निर्देशिका तैयार करना, प्रशिक्षण सामग्री की खोज को सरल बनाने के लिए एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करना और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के कैलेंडर को समन्वित करना शामिल है। इसके साथ ही एनएससीएसटीआई मान्यता और क्रेडिट प्रणाली से जुड़े डिजिटल अवसंरचना डैशबोर्ड की भी परिकल्पना प्रस्तुत की गई।
कार्यशाला के अंतिम सत्र में विभिन्न समूहों की चर्चाओं का सार प्रस्तुत किया गया और भविष्य की कार्ययोजना पर विचार किया गया। समापन संबोधन में चंद्रलेखा मुखर्जी ने कहा कि क्षेत्रीय स्तर पर प्राप्त इन सुझावों को ठोस नीतिगत सिफारिशों में बदलना आवश्यक है, ताकि सिविल सेवा प्रशिक्षण व्यवस्था को अधिक समन्वित, आधुनिक और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जा सके।
