नाबालिग प्रकरण में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई: प्रभारी निरीक्षक निलंबित
दिनांक 19 मार्च 2026 को पुलिस महानिरीक्षक, देवीपाटन परिक्षेत्र, गोंडा कार्यालय द्वारा जारी प्रेस नोट ने पुलिस कार्यप्रणाली में जवाबदेही और संवेदनशीलता की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर किया है। इस प्रकरण में नाबालिग लड़की से जुड़े गंभीर मामले में लापरवाही बरतने वाले थाना खरगूपुर के प्रभारी निरीक्षक के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आवेदिका श्रीमती राजेश्वरी ने अपनी नाबालिग पुत्री के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि अभियुक्त विनय ने उसकी पुत्री को बहला-फुसलाकर अगवा कर लिया। इस मामले में थाना खरगूपुर, जनपद गोंडा में मुकदमा पंजीकृत किया गया और विवेचना के दौरान पुलिस ने बालिका को बरामद करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। बाद में आरोपी के जेल से जमानत पर छूटने के पश्चात पीड़िता से संबंधित आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई।
इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस महानिरीक्षक ने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई के निर्देश दिए। बावजूद इसके, 77 दिन बीत जाने के बाद भी स्थानीय स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि न तो अभियुक्त की जमानत निरस्त कराने के प्रयास किए गए और न ही वायरल हो रहे आपत्तिजनक सामग्री को हटवाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक श्री अमित पाठक ने स्वयं थाना खरगूपुर जाकर मामले की समीक्षा की। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि प्रभारी निरीक्षक द्वारा अपने कर्तव्यों के निर्वहन में घोर लापरवाही, अनियमितता और असंवेदनशीलता बरती गई है। इसके परिणामस्वरूप निरीक्षक श्री शेषमणि पाण्डेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
साथ ही, पुलिस अधीक्षक गोंडा को निर्देश दिए गए हैं कि वे संबंधित अधिकारी के खिलाफ उत्तर प्रदेश अधीनस्थ श्रेणी के कर्मचारियों की (दण्ड एवं अपील) नियमावली 1991 के तहत विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करें। इसके अतिरिक्त, पर्यवेक्षण अधिकारियों—क्षेत्राधिकारी नगर एवं अपर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी)—से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।
यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि पुलिस विभाग नाबालिगों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगा। यह न केवल पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि पुलिस तंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता को भी मजबूत करता है।
समाज में इस तरह के मामलों के प्रति संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है, ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके और अपराधियों के मन में कानून का भय बना रहे।
