मार्च 20, 2026

गैस आपूर्ति बढ़ने से यूरिया उत्पादन में ऐतिहासिक उछाल, किसानों को मिलेगी बड़ी राहत

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भारत सरकार के द्वारा किए गए हालिया प्रयासों से देश में यूरिया उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। प्राकृतिक गैस की अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित होने के बाद यूरिया उत्पादन में लगभग 23 प्रतिशत का बड़ा उछाल आया है, जो आने वाले खरीफ सीजन 2026 के लिए किसानों के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

गैस आपूर्ति बढ़ने से उत्पादन में तेजी

उर्वरक उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैस एक प्रमुख कच्चा माल है। सरकार ने के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजार से अतिरिक्त गैस की खरीद की है। स्पॉट टेंडरिंग के जरिए भारत को 7.31 MMSCMD अतिरिक्त गैस मिलने लगी है, जिससे कुल गैस आपूर्ति बढ़कर 39.31 MMSCMD हो गई है।

इस बढ़ी हुई आपूर्ति का सीधा असर यूरिया उत्पादन पर पड़ा है। पहले जहां प्रतिदिन लगभग 54,500 मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन हो रहा था, वहीं अब यह बढ़कर करीब 67,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन हो गया है। इससे देश की आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी और आयात पर निर्भरता कम होगी।

उर्वरक भंडार में भी उल्लेखनीय वृद्धि

सरकार की रणनीति का असर केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि उर्वरकों के भंडारण में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। इस वर्ष मार्च 2026 तक देश में कुल उर्वरक भंडार 180.04 लाख मीट्रिक टन (LMT) तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत अधिक है।

विशेष रूप से डीएपी (DAP) के भंडार में दोगुनी वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि यूरिया, एनपीके और एसएसपी जैसे अन्य उर्वरकों के स्टॉक में भी अच्छी बढ़ोतरी हुई है। यह स्थिति खरीफ सीजन के दौरान संभावित मांग को पूरा करने में सहायक साबित होगी।

आयात में विविधता और वैश्विक टेंडर की रणनीति

वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने उर्वरक आयात के स्रोतों में विविधता लाने पर जोर दिया है। अलग-अलग देशों से संपर्क कर उर्वरकों की खरीद सुनिश्चित की जा रही है।

के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि खरीफ 2026 के लिए देश के पास पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध हैं और मार्च के अंत तक अतिरिक्त आपूर्ति भी पहुंचने की उम्मीद है। ग्लोबल टेंडरिंग प्रक्रिया को समय रहते शुरू करने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की स्थिति मजबूत हुई है।

किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता का सबसे बड़ा लाभ देश के किसानों को मिलेगा। समय पर और उचित मात्रा में यूरिया व अन्य उर्वरक मिलने से फसल उत्पादन बेहतर होगा, लागत में संतुलन रहेगा और कृषि उत्पादकता में वृद्धि होगी।

इसके अलावा, आयात पर निर्भरता घटने से अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भी कम पड़ेगा, जिससे किसानों को स्थिर आपूर्ति और बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी।

निष्कर्ष

सरकार द्वारा गैस आपूर्ति बढ़ाने, घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने और वैश्विक स्तर पर सक्रिय कूटनीति अपनाने के परिणामस्वरूप भारत उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यूरिया उत्पादन में 23 प्रतिशत की वृद्धि न केवल एक आर्थिक उपलब्धि है, बल्कि यह देश के कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

आगामी खरीफ सीजन में यह पहल किसानों के लिए राहत और कृषि विकास के लिए नई संभावनाएं लेकर आएगी।

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