मार्च 20, 2026

डीहबलई ग्राम पंचायत में मतदाता सूची से 428 नाम हटाए जाने पर विवाद, जांच शुरू

कुंडा, प्रतापगढ़। त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन-2026 से पहले ग्राम पंचायत डीहबलई (विकास खंड बाबागंज) में मतदाता सूची को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। यहां 428 मतदाताओं के नाम डुप्लीकेट बताकर सूची से हटाए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस कार्रवाई पर स्थानीय ग्रामीणों और समाजसेवियों ने गंभीर सवाल उठाए हैं और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है।

इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब कुशहा गांव निवासी समाजसेवी आदर्श पांडेय ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को शिकायती पत्र सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन नामों को डुप्लीकेट बताकर हटाया गया है, उनमें बड़ी संख्या में वैध मतदाता शामिल हैं। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया बिना उचित सत्यापन के पूरी की गई, जिससे कई लोगों का मतदान अधिकार प्रभावित हुआ है।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि हटाए गए नामों में कुशहा गांव के कई निवासी शामिल हैं, जिससे पूरे गांव में आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह कार्रवाई सुनियोजित तरीके से की गई है, जिसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करना हो सकता है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम वाचस्पति सिंह ने खंड विकास अधिकारी, बाबागंज को जांच के निर्देश दिए। इसके बाद सहायक विकास अधिकारी द्वारा जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है। सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में कुछ अनियमितताओं के संकेत मिले हैं, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

ग्रामीणों ने इस घटना पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि यह कदम न केवल लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है, बल्कि उनके संवैधानिक अधिकारों का भी उल्लंघन है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो इससे चुनाव की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग सकता है।

समाजसेवी आदर्श पांडेय ने कहा कि यह मामला केवल 428 नामों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे चुनावी तंत्र की पारदर्शिता और विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले संभावित हार के डर से इस तरह की कार्रवाई की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सभी प्रभावित मतदाताओं को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

प्रशासन की ओर से संकेत मिले हैं कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और जिन वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, उन्हें पुनः शामिल करने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। अब सभी की नजरें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि चुनावी प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और निष्पक्ष रह पाती है।

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