डीहबलई के 428 मतदाताओं के नामों को लेकर एडीओ पंचायत ने एसडीएम को भेजी रिपोर्ट

कुंडा, प्रतापगढ़। त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन-2026 को लेकर मतदाता सूची के सत्यापन की प्रक्रिया में एक अहम मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत डीहबलई के 428 मतदाताओं के नामों को डुप्लीकेट मानकर सूची से हटाए जाने पर अब सवाल खड़े हो गए हैं। इस संबंध में सहायक विकास अधिकारी (पंचायत), बाबागंज द्वारा उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को विस्तृत रिपोर्ट भेजी गई है, जिसमें पूरी प्रक्रिया पर पुनर्विचार की मांग की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से ग्राम पंचायत डीहबलई के 428 मतदाताओं के नामों को डुप्लीकेट के रूप में चिह्नित कर दिया गया और उन्हें मतदाता सूची से हटा दिया गया। हालांकि, इन नामों के सत्यापन को लेकर संबंधित बीएलओ (बूथ लेवल अधिकारी) द्वारा कोई ठोस या लिखित प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया। यह स्थिति चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है।
सहायक विकास अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि किसी भी मतदाता का नाम सूची से हटाने से पहले उसका भौतिक सत्यापन आवश्यक होता है। लेकिन डीहबलई के मामले में ऐसा कोई सत्यापन रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया। इससे यह आशंका उत्पन्न होती है कि कई वास्तविक मतदाताओं के नाम भी गलती से हटा दिए गए होंगे।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि पंचायत चुनाव जैसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया में मतदाता सूची की शुद्धता अत्यंत आवश्यक है। यदि बिना उचित जांच के नाम हटाए जाते हैं, तो इससे लोगों के मतदान के अधिकार का हनन हो सकता है। इसलिए एडीओ पंचायत ने एसडीएम से अनुरोध किया है कि इन 428 मतदाताओं के नामों को पुनः मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू की जाए।
प्रशासनिक स्तर पर अब इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। संभावना जताई जा रही है कि एसडीएम स्तर से जांच कराकर बीएलओ की कार्यप्रणाली की समीक्षा की जाएगी और आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे। साथ ही, भविष्य में इस तरह की त्रुटियों से बचने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश भी तय किए जा सकते हैं।
स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर लोगों में भी चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उनके नाम बिना सूचना के हटा दिए गए हैं, तो यह उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और सभी पात्र मतदाताओं के नाम पुनः सूची में जोड़े जाएं।
कुल मिलाकर, ग्राम पंचायत डीहबलई का यह मामला पंचायत चुनाव से पहले मतदाता सूची की पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करने की आवश्यकता को उजागर करता है। प्रशासन के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है कि वह इस त्रुटि को सुधारते हुए लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लोगों का विश्वास बनाए रखे।
