बिहार में शराबबंदी को लेकर तेज हुआ पुलिस अभियान

बिहार में लागू शराबबंदी कानून को प्रभावी बनाने के लिए पुलिस ने वर्ष 2026 में व्यापक स्तर पर कार्रवाई तेज कर दी है। इस साल अब तक हर महीने औसतन लगभग 3.7 लाख लीटर अवैध शराब की जब्ती दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 18 प्रतिशत अधिक है। यह बढ़ोतरी प्रशासन की सख्ती और अवैध शराब कारोबार के खिलाफ बढ़ते दबाव को दर्शाती है।
शराबबंदी कानून की पृष्ठभूमि
बिहार सरकार ने वर्ष 2016 में पूरे राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू की थी। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य सामाजिक सुधार, पारिवारिक स्थिरता और अपराध में कमी लाना था। समय के साथ इस कानून को सख्ती से लागू करने के लिए लगातार नए कदम उठाए जा रहे हैं।
जब्ती के आंकड़े और वर्तमान स्थिति
वर्ष 2026 में अवैध शराब के खिलाफ अभियान और अधिक तेज हुआ है। इसके परिणामस्वरूप:
- हर महीने औसतन 3.7 लाख लीटर शराब जब्त की जा रही है
- यह आंकड़ा वर्ष 2025 की तुलना में लगभग 18% अधिक है
- 2024 में औसत जब्ती 2.88 लाख लीटर थी
- 2025 में यह बढ़कर 3.14 लाख लीटर हो गई
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
हाल की घटनाएँ और सामने आई चुनौतियाँ
हाल ही में कटिहार रेलवे स्टेशन पर शराब जब्ती के दौरान मद्य निषेध विभाग और जीआरपी पुलिस के बीच टकराव की घटना सामने आई। इस झड़प में कई लोग घायल हुए, जिससे विभागों के बीच समन्वय की कमी उजागर हुई।
इसके अलावा, पुलिस ने आठ जिलों में सक्रिय 24 बड़े शराब तस्करों की पहचान की है। इनके खिलाफ जिला बदर और संपत्ति जब्ती जैसी कड़ी कार्रवाई शुरू की जा चुकी है।
सरकार और पुलिस की कार्ययोजना
शराब तस्करी पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने कई रणनीतियाँ अपनाई हैं:
- खुफिया सूचना तंत्र को मजबूत किया गया है, जिससे छापेमारी अधिक सटीक हो रही है
- विशेष टीमों का गठन किया गया है, जो राज्यभर में अभियान चला रही हैं
- कानूनी सख्ती बढ़ाई गई है, ताकि तस्करों में डर बना रहे
प्रभाव और प्रमुख समस्याएँ
सकारात्मक असर:
- अवैध शराब कारोबार पर दबाव बढ़ा है
- कई इलाकों में शराब की उपलब्धता घटी है
प्रमुख चुनौतियाँ:
- विभिन्न विभागों के बीच तालमेल की कमी
- पड़ोसी राज्यों से जारी तस्करी
- ग्रामीण क्षेत्रों में छिपाकर भंडारण और सप्लाई
निष्कर्ष
बिहार में शराबबंदी कानून को सफल बनाने के लिए प्रशासन लगातार सक्रिय है। बढ़ती जब्ती और तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई यह संकेत देती है कि सरकार इस मुद्दे को लेकर गंभीर है। हालांकि, बेहतर समन्वय और सीमा पार तस्करी पर नियंत्रण जैसे मुद्दों पर अभी और काम करने की जरूरत बनी हुई है।
