मई 7, 2026

इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: शिवानी हॉस्पिटल के पक्ष में संपत्ति बिक्री समझौते को मिली कानूनी मान्यता

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ने एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए वर्ष 2012 में हुए पंजीकृत बिक्री समझौते को वैध माना है। यह मामला और मीमांसा नांगिया सहित अन्य पक्षों के बीच चल रहे संपत्ति विवाद से जुड़ा था। न्यायालय ने 6 मई 2026 को अपना निर्णय सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।

मामले के अनुसार कानपुर नगर के सर्वोदय नगर, काकादेव स्थित लगभग 1352 वर्ग गज की विवादित संपत्ति के मालिक धर्म प्रकाश नांगिया ने 22 अक्टूबर 2012 को शिवानी हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड के साथ बिक्री समझौता किया था। यह समझौता उप-पंजीयक कार्यालय में विधिवत पंजीकृत कराया गया था। समझौते के तहत संपत्ति का कुल मूल्य 5.25 करोड़ रुपये तय हुआ था, जिसमें से 2 करोड़ रुपये अग्रिम रूप से चेक के माध्यम से दिए गए थे।

वादी पक्ष ने अदालत को बताया कि बाद में संपत्ति को फ्रीहोल्ड कराने के लिए अतिरिक्त 41 लाख रुपये भी धर्म प्रकाश नांगिया को दिए गए। इस प्रकार कुल 2.41 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका था और शेष राशि बिक्री विलेख के समय देनी थी। समझौते में यह भी स्पष्ट था कि यदि विक्रेता निर्धारित समय में बिक्री विलेख निष्पादित नहीं करता, तो खरीदार अदालत के माध्यम से रजिस्ट्री कराने का अधिकार रखेगा।

सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि धर्म प्रकाश नांगिया की 4 जुलाई 2015 को मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उनकी बेटियों और कानूनी वारिसों ने समझौते का विरोध किया। प्रतिवादियों ने आरोप लगाया कि यह समझौता दबाव और अनुचित प्रभाव में कराया गया था क्योंकि अस्पताल संचालक डॉक्टर परिवार के निजी चिकित्सक थे। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय संपत्ति की वास्तविक कीमत लगभग 10 करोड़ रुपये थी और समझौता बाजार मूल्य से काफी कम पर किया गया।

प्रतिवादी पक्ष ने यह भी दलील दी कि अस्पताल के पास संपत्ति खरीदने की पर्याप्त आर्थिक क्षमता नहीं थी तथा कुछ चेक पहले अनादृत हुए थे। दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन ने बैंक रिकॉर्ड और दस्तावेजों के माध्यम से अदालत में यह साबित करने का प्रयास किया कि बाद में सभी भुगतान पूरे किए गए और संस्था लगातार बिक्री विलेख कराने के लिए तैयार थी।

मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि प्रतिवादी संख्या-3 शाहनाज फैसल उर्फ शिवानी नांगिया के धर्म परिवर्तन और संपत्ति अधिकारों को लेकर भी विवाद उठा। हालांकि अदालत ने मुख्य रूप से पंजीकृत समझौते और दोनों पक्षों के दस्तावेजी साक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित किया।

ट्रायल कोर्ट ने पहले ही वादी के पक्ष में विशिष्ट निष्पादन (Specific Performance) की डिक्री पारित कर दी थी। इसके खिलाफ दाखिल प्रथम अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पाया कि बिक्री समझौता विधिसम्मत रूप से निष्पादित किया गया था और वादी पक्ष समझौते को पूरा करने के लिए लगातार तैयार एवं इच्छुक था।

इस निर्णय के बाद अब प्रतिवादी पक्ष को न्यायालय के आदेशानुसार संपत्ति का बिक्री विलेख निष्पादित करना पड़ सकता है। यह फैसला संपत्ति विवादों और पंजीकृत बिक्री समझौतों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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